Opinion

लव जेहाद : ये ‘तैयब अलियों’ का नया शिगूफा है

Shrinivas

आप बेरोजगारी, महंगाई, भूख, विस्थापन और कोरोना आदि का रोना रोते रहिये, धर्मान्धता फैलाने के लिए उनके पास एक से एक हथियार हैं, जो देश को बुनियादी मुद्दों से भटकाने के लिए कारगर हैं. ऐसा ही एक नया हथियार या शिगूफा है- लव जिहाद. उप्र की योगी सरकार ने इस पर एक अध्यादेश लाने का फैसला कर लिया है- अवैध धर्मांतरण विरोधी अध्यादेश. गत 24 नवम्बर को कैबिनेट से इस अध्यादेश को मंजूरी मिलने बाद यूपी सरकार ने कहा कि यह ‘महिलाओं को इंसाफ दिलाने के लिए जरूरी था!’ बढ़िया जोक है, नहीं!?

 

सभी जानते हैं कि इस कदम का उद्देश्य एक खास वर्ग को खतरनाक तरीके से भावुक के पुराने एजेंडे पर नये सिरे से अमल और हिंदू युवतियों को मुसलिम से प्रेम और विवाह करने से रोकना है.

इसे भी पढ़ेंः पति से लड़कर फांसी लगा कर की आत्महत्या, पूछताछ के लिए पति को लिया गया हिरासत में

 

लड़कियों का उनकी मर्जी के खिलाफ, बचपन में ही विवाह कर दिया जाये, इनको कोई परेशानी नहीं होती. विधवाएं उपेक्षा की शिकार होकर नारकीय जीवन जीती रहें, यह इनकी चिंता का विषय नहीं है. किसी हिंदू लड़की के विजातीय हिंदू से भी विवाह करने पर जब उसके परिवार की कथित प्रतिष्ठा इस हद तक आहत हो जाती है कि वे अपनी बहन और बेटी की हत्या तक कर देते हैं, यह कोई समस्या नहीं है! कोई महिला दहेज के लिए प्रताड़ित होती है, उसकी हत्या भी हो जाये, तो विशेष चिंता की बात नहीं है! कोई मर्द किसी युवती से झूठ बोल कर, शादी या कोई अन्य प्रलोभन देकर उसके साथ दुष्कर्म करे, वह इनके लिए एक   ‘सामान्य’ अपराध है. कोई युवक किसी युवती से अपना परिचय और धर्म छिपा कर विवाह कर ले, तो कोई बात नहीं. बशर्तें कि वे अहिंदू न हों.  बस कोई हिंदू लड़की किसी गैर हिंदू से दोस्ती न करे,  विवाह न करे. स्वेच्छा से भी धर्मांतरण न करे.

 

इनका मानना है कि कोई बालिग  लड़की (किसी धर्म की) भी किसी से प्रेम नहीं कर सकती. यह ‘स्वाभाविक’ ही नहीं है. प्रकृति और कानून कुछ भी कहे, हम उसे ऐसा करने नहीं देंगे.

वैसे तो ये स्त्री-पुरुष के बीच सहज नैसर्गिक आकर्षण और प्रेम के ही खिलाफ हैं. इसके बावजूद कि ये जिस महान भारतीय संस्कृति और इतिहास पर गर्व करते हैं, उसमें प्राचीन हिन्दू नायकों और देवताओं तक के प्रेम विवाह के उदाहरण भरे पड़े हैं. लेकिन ये मानते हैं कि विवाह का फैसला सिर्फ अभिभावक कर सकते हैं.  बालिग युवक और युवती के बीच दोस्ती और उनका परस्पर सहमति से विवाह करने का फैसला इस जमात के अनुसार गलत और स्वेछाचार है. तभी तो इनके जत्थे  ‘वेलेंटाइन डे’ पर उत्पात करते हैं. प्रेमी जोड़ों को, कभी कभी एक साथ जा रहे भाई -बहन तक को प्रताड़ित करते हैं. तभी तो योगी सरकार ने बाकायदा एक ‘एंटी रोमियो’ फ़ोर्स ही बना दिया था. और कोई हिंदू लड़की मुसलिम से दोस्ती कर ले, यह इनके लिए एकदम असह्य है. उप्र के अवैध धर्मांतरण विरोधी अध्यादेश का अघोषित उद्देश्य यही है.

इसे भी पढ़ेंः कोरोना काल में सिख समुदायों ने निभायी अहम भूमिका : हेमंत सोरेन

 

बेशक यदि कोई आदमी इस बदनीयती से, अपनी पहचान छिपा कर प्रेम (असल में दिखावा और फरेब) करता है, फिर विवाह के लिए लड़की का धर्म बदलने की शर्त रखता है या जबरन ऐसा करता है, तो इसे उसका अधार्मिक कृत्य ही कहा जायेगा. कोई धर्म इसकी इजाजत नहीं देता. और वैसे भी इस तरह के अपराधों के लिए पहले से कानून बने हुए हैं. जाहिर है, ऐसी चंद अपवाद घटनाओं के बहाने एक नया कानून बनाने का मकसद ‘महिलाओं को इंसाफ’ दिलाना नहीं, ध्रुवीकरण की राजनीति करना है. वैसे भी, महज विवाह करने के लिए स्वेच्छा से धर्मान्तरण करना मुझे या किसी को कितना भी गलत या अनैतिक लगे, यह गैरकानूनी कैसे है?

 

बहुत पहले आयी एक फिल्म  ‘अमर, अकबर एंथोनी’ में मनोरंजन के साथ हिंदू, मुसलिम व ईसाई एकता का पैगाम भी था. उसमें एक ही हिंदू परिवार के तीन भाई बचपन में बिछड़ गये थे, जो अलग अलग धार्मिक परिवार और परिवेश में पीला बढे. उसमें मुसलिम पात्र (ऋषि कपूर) की प्रेमिका का बाप दरजी था- तैयब अली, जो इनके रिश्ते को पसंद नहीं करता था. हमेशा टांग अड़ाने का प्रयास करता था. फिल्म में उसके इस  प्यार विरोधी रवैये का मजाक उड़ाता एक गीत भी था- ‘तैयब अली प्यार के दुश्मन…’

 

तो यह ‘तैयब अलियों’ की जमात तो है ही. पर इससे भी आगे यह हिंदू-मुसलिम के बीच प्रेम और भाईचारे की विरोधी जमात है. यही इसकी यूएसपी है. यही इसकी पहचान भी है. इसे छोड़ देंगे, तो फिर इनकी प्रासंगिकता क्या रह जायेगी?

 

प्रसंगवश, यह सवाल पूछना क्या गलत होगा कि कलाकार से नेता/सांसद बने हेमा मालिनी और धर्मेन्द्र ने महज विवाह करने के लिए धर्मांतरण/इसलाम ग्रहण किया था या नहीं?  यदि नहीं, तो एक पत्नी के रहते धर्मेंद्र (एक हिंदू) ने हेमा मालिनी से विवाह कैसे किया? किया, तो क्या वह अपराध नहीं था?  सवाल है कि ये दोनों आज हिंदू हैं या मुसलमान? यह भी कि यदि योगी-मोदी-शाह एंड कंपनी को तब इसमें कुछ अनैतिक और गलत नहीं लगा, तो आज महज विवाह के लिए धर्मांतरण अपराध कैसे हो गया?

जाहिर है, इनके लिए यह कथित लव जेहाद का मामला इनके लिए महज मूलतः यह मुद्दा धर्मोन्माद धर्म, आस्था या अपने  समुदाय की ‘प्रतिष्ठा’ का भी नहीं है. सिर्फ और सिर्फ धर्मोन्माद के बीज बोकर राजनीतिक फसल काटने का है. शाहनवाज और मुख्तार अब्बास नकवी सहित ऐसे अन्य उदाहरणों को फिलहाल छोड़ देते हैं. हिंदू पति और मुसलिम पत्नी वाले जोड़ों वाली लम्बी सूची को भी.

 

अंत में- डॉ लोहिया की पुस्तक ‘भारत विभाजन के गुनहगार’ का एक उद्धरण :  ‘सामाजिक क्षेत्र में पूरी एकसानियत (मेलमिलाप/समरसता) विवाह से संबंधित होती है. मुझे यकीन है कि जब तक देश में होनेवाले सौ में से एक विवाह हिंदू और मुसलमान के बीच नहीं होगा, तब तक यह समस्या पूरी तौर पर नहीं सुलझेगी.. यह बात हिंदू पद्धति की आतंरिक जातियों के बारे में भी सही है…’

 

मगर जिनकी राजनीति की बुनियाद ही हिंदू-मुसलिम वैमनस्य पर टिकी की हो, उनके लिए लोहिया जैसों की सीख का क्या अर्थ हो सकता है!

इसे भी पढ़ेंः इसे भी पढ़ेंः 20 दिसंबर से शुरू होगी रांची-अहमदाबाद विमान सेवा, व्यापारियों को मिलेगी राहत

Advertisement

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: