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रंगदारी के खिलाफ डीओ धारको ने बुलंद की आवाज

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Dhanbad: इंडस्ट्रीज एंड कामर्स एसोसिएशन ने कतरास की कोलियरियों में रंगदारी से संबंधित वस्तुस्थिति से धनबाद के उपायुक्त ए दोड्डे को बुधवार को लिखित रूप से अवगत कराया है. इस संबंध में न्यूज विंग ने  एसोसिएशन के अध्यक्ष बीएन सिंह से बात की है. उन्होंने बताया कि उपायुक्त को लिखे पत्र में वस्तुस्थिति की जानकारी दी गयी है. जैसा कि पता है कतरास में बाघमारा के विधायक ढुल्लू महतो की प्रभाववाली कोलियरियों में प्रतिटन कोयला लदाई की दर 650 रुपये से बढ़ाकर 1250 रुपये कर देने के बाद से डीओधारकों ने कोयला उठाव बंद कर दिया है. डीओधारकों ने कहा है कि इतनी रकम की वसूली सरासर रंगदारी है. वह मजदूरों को उनके खाते में सीधा पैसा देने के लिए तैयार हैं.

सवाल यह भी हैं

  • क्या डीओधारकों से वसूली गयी रकम यानी प्रति ट्रक करीब दस हजार रुपये क्या मजदूरों को मिलते हैं?
  • मजदूरी का भुगतान किस तरह किया जाता है?
  • अगर मजदूरी के भुगतान का कोई रिकार्ड नहीं है तो यह मजदूरी के पैसे का गबन है? इसे लेकर अब तक जांच करवाकर प्रशासन ने रकम की उगाही करनेवाले के खिलाफ मुकदमा क्यों नहीं दर्ज किया?
  • क्या मजदूरी भुगतान के नाम पर वसूली करनेवाले पर मुकदमा नहीं करना संबंधित पदाधिकारी के कर्तव्य में घोर लापरवाही नहीं मानी जाएगी? यह कार्रवाई का कारण नहीं बनता?
  • यह जांच का विषय नहीं कि कोयला लदाई करनेवाले कितने मजदूर हैं और उनको ईपीएफओ और सरकारी प्रावधान के मुताबिक अन्य सुविधा मिलती है या नहीं? अगर नहीं तो जिम्मेवार क्या कर रहे हैं?
  • यह सवाल भी गंभीर है कि रंगदारी वसूली की प्रतिदिन लाखों रुपये की होनेवाली वसूली को डीओ होल्डर किस मद में रखते हैं? इसका अपने अकाउंट में किस तरह उल्लेख करते हैं?

गेंद डीसी के पाले में है

मंगलवार को ही पत्रकारों से बात करते हुए धनबाद के डीसी ए दोड्डे ने कहा था कि उन्हें उद्यमियों से रंगदारी वसूली की कोई जानकारी नहीं है. अगर, उद्यमी उनसे शिकायत करेंगे तो वह निश्चित रूप से कार्रवाई करेंगे. हालांकि एसोसिएशन ने कहा कि मामले की जानकारी डीसी, एसएसपी सहित सभी संबंधित अधिकारी को रोज देते हैं. अखबारों में भी खबर छप रही है. अब क्या डीसी मामले में कार्रवाई करेंगे. क्या कार्रवाई करेंगे? न्यूज विंग ने यह सवाल उनसे ई-मेल के माध्यम से पूछा है पर इसका कोई जवाब अब तक नहीं मिला है.

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