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बसों के परिचालन नहीं होने से हर दिन हो रहा 50 करोड़ के कारोबार का नुकसान

कई बस मालिक डिफॉल्टर, नहीं चुका पा रहे किस्त की रकम

Ranchi : झारखंड में बस परिचालन बंद होने से हर दिन लगभग 50 करोड़ का कारोबार प्रभावित हो रहा है. कोरोना के चलते स्वास्थ्य सुरक्षा सप्ताह के चलते राज्य में 16 मई से बसों का परिचालन प्रतिबंधित है.

अंतर्राज्यीय तथा राज्य के अंदर मिलाकर 10 हजार से अधिक बसों का परिचालन नहीं हो रहा है. ऐसे में एक माह में बस से होने वाले कारोबार में 1300 करोड़ का नुकसान हो चुका है.

मिली जानकारी के अनुसार सिर्फ रांची में रोजाना 600 बसें चलती हैं. जिसमें 12 करोड़ का कारोबार होता है. इसमें डीजल की भी लागत है. ऐसे में हर दिन बस संचालकों की आय के साथ-साथ राज्य सरकार का राजस्व भी प्रभावित हुआ है. लॉकडाउन में ढील नहीं मिली तो यह नुकसान और बढ़ेगा.

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खड़ी बसें हो रहीं खराब, हर दिन हो रहा घाटा

कोरोना के चलते लगे 2020 में बसों का परिचालन बंद हुआ था. जुलाई 2020 से हालांकि बसों का परिचालन शुरू हुआ. लेकिन यात्रियों की संख्या 30 प्रतिशत से अधिक नहीं बढ़ी.

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बसें खाली ही चल रही थीं. ऐसे में बस व्यवसाय पूरी तरह से प्रभावित हो गया था. अब फिर 2021 में राज्य में कोरोना महामारी के चलते लगे स्वास्थ्य सुरक्षा सप्ताह ने उनका जीना मुहाल कर दिया. बसों का परिचालन नहीं होने से बस पड़ाव गैरेज में बसें खड़ी हैं. खड़ी बसें खराब हो रही हैं. बस संचालकों को हर दिन घाटा हो रहा है. वहीं कई बस मालिक डिफॉल्टर हो चुके हैं. क्योंकि उनके पास बैंक की किस्त, रोड टेक्स बीमा इत्यादि के पैसे नहीं आ रहे हैं.

ऐसे में इस व्यवसाय से जुड़े लाखों लोगों की नौकरियां चली गयी हैं. ड्राइवर, कंडक्टर, एजेंट आदि के पास काम नहीं है. और उनके सामने रोजी-रोटी का बड़ा संकट उत्पन्न हो गया है.

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16 माह से स्कूल बसों को नहीं हो रहा भुगतान

2020 से ही झारखंड में स्कूल बंद हैं. रांची में ही सिर्फ 450 से अधिक बसें स्कूलों में चलती है. स्कूल बंद रहने से यहां बसों का परिचालन बंद है. बसें स्कूल परिसर में या गैराज में पड़ी हैं.

स्कूलों द्वारा बस सेवा नहीं लिए जाने के कारण बीते 16 माह से वे किराये का भुगतान नहीं कर रहे हैं. बता दें कि एक स्कूल एक बस का 50 हजार रुपये तक हर माह भुगतान करता है.

सरकार से राहत की आस

बस संचालक अब सरकार से राहत की आस लगाये हुए हैं. खड़ी बसों के लिए राहत पैकेज देने की मांग कर रहे हैं. बस संचालकों का कहना हैं कि जबतक राज्य में आपदा प्रबंधन अधिनियम लागू रहता है तब तक रोड टैक्स में अर्थदंड की छूट प्रदान की जाये.

रोड टैक्स एवं बैंकों तथा फाइनेंस कंपनी की किस्त पर दो वर्ष की मोरेटोरियम प्रदान की जाये. लाकडाउन अवधि का रोड टैक्स माफ किया जाये. इसके अलावा पुलिस विभाग व परिवहन विभाग की जांच व पीड़क कार्रवाई से छूट की मांग की जा रही है.

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राहत पर हो रहा विचार: चंपई

झारखंड के परिवहन मंत्री चंपई सोरेन ने कहा कि बस संचालकों की समस्याओं से वे अवगत हैं. सरकार व परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ इस संबंध में विमर्श हुआ है. यह देखा जा रहा है कि कैसे बस संचालकों को राहत दी जाये. रोड टैक्स माफी पर भी विचार किया जा रहा है.

सरकार बसों के परिचालन की अनुमति दे: सच्चिदानंद

झारखंड प्रदेश बस ऑनर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष सच्चिदानंद सिंह ने कहा कि जब हवाई जहाज ट्रेन-टैक्सी के परिचालन की अनुमति है तो फिर बसों के परिचालन पर क्यों पाबंदी है.

सरकार को अविलंब बसों के परिचालन की अनुमति प्रदान करनी चाहिए. रांची जिला के अध्यक्ष कृष्णमोहन सिंह ने कहा कि सरकार को सभी के रोजगार के बारे में सोचना चाहिए और अविलंब बसों का परिचालन गाइडलाइन के तहत करने की अनुमति देनी चाहिए.

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