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एकांतवास से लौटे भगवान जगन्नाथ, रथयात्रा आज

श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़, शाम चार बजे के बाद शुरु होगी रथयात्रा

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Ranchi: भगवान जगन्नाथ को विष्णु का 10वां अवतार माना जाता है, जो 16 कलाओं से परिपूर्ण हैं. पुराणों में जगन्नाथ धाम की काफी महिमा है, इसे धरती का बैकुंठ भी कहा गया है. पुरी से शुरु हुई भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा आज देश के कई हिस्सों में निकाली जाती है. वही बात करें रांची की तो रांची के जगन्नाथ मंदिर और रथ यात्रा का इतिहास करीब 325 साल पुराना है. तब से यहां हर साल दस दिनों का रथ मेला लगता है. वही शनिवार को रथ यात्रा को लेकर सारी तैयारी कर ली गई है.

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एक पखवारे तक गर्भगृह में रहने के बाद शुक्रवार को भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा व भाई बलराम के विग्रह का नेत्रदान किया गया. वही शनिवार को विशेष पूजा अर्चना के बाद सुबह पांच बजे से मंदिर को आम लोगों के लिए खोल दिया गया है. दोपहर के करीब दो बजे से दर्शन बंद कर दिये जायेंगे. उसके बाद रथयात्रा की तैयारी शुरु होगी. करीब ढाई बजे भगवान जगन्नाथ, भाई बलराम और बहन सुभद्रा का रथारोहण होगा. उसके बाद विष्णुलाक्षार्चना होगी. शाम चार बजे भगवान जगन्नाथ की आरती होगी, जिसके बाद रथयात्रा शुरु की जायेगी. और रथ पर सवार होकर भगवान जगन्नाथ अपनी मौसी के घर जायेंगे. शाम 6 बजे तक रथ मौसीबाड़ी पहुंचेगा. सात बजे शाम तक दर्शन-पूजन किया जा सकेगा. उसके बाद देवविग्रहों को मौसीबाड़ी में प्रवेश कराया जायेगा. बता दें कि 23 जुलाई को घुरती रथ यात्रा के साथ भगवान जगन्नाथ मुख्य मंदिर लौट आएंगे.

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रथ मेला की विशेष तैयारी

14 जुलाई 2018 से 23 जुलाई 2018 तक लगने वाले ऐतिहासिक जगन्नाथपुर रथ मेला को लेकर विशेष तैयारी की गई है. सुरक्षा के जहां व्यापक इंतजाम किये गये हैं. वही छह जगहों पर पार्किंग की व्यवस्था की गई है. मेला परिसर में हर दिन कलाकारों द्वारा रंगारंग सांस्कृति कार्यक्रम, नुक्कड़-नाटक, कठपुतली नृत्य, छऊ, पाईका, उरांव, नागपुरी लोकगीतों की प्रस्तुतियां दी जायेगी.

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