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मनरेगा में लूट जारी, सरकारी राशि का हो रहा है गबन, सरकार बेपरवाह

मजदूरों के नाम पर बिना काम किये राशि का गबन मनरेगा कर्मी की मदद से दलाल कर रहे है .

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Pravin kumar

Ranchi : केंद्र की महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा ग्रामीणों को रोजगार उपलब्‍ध कराने के दृढ़ संकल्प के साथ शुरू हुई थी. लेकिन  झारखंड में यह सरकारी राशि के गबन का केन्द्र बन गयी है. जिसका खामियाजा स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ रहा है. मनरेगा योजना में मजदूरों के नाम पर बिना काम किये राशि का गबन मनरेगा कर्मी की मदद से दलाल कर रहे है. मामला पश्चिम सिंहभूम के बंदगांव पंचायत स्थित टिमडा एवं टोकाड गांव का है,  जहां के मनरेगा मजदूर कह रहे हैं कि पिछले चार महीने से मनरेगा योजना में कार्य नहीं किया है इसके बाद भी योजना राशि के मजदूरी मद के 69,552 मजदूरो के नाम पर फर्जी मास्टर रोल तैयार कर निकाल लिये गये हैं.

क्या है योजना

कोका हमसाय की जमीन से सिंगरी हमसाय की जमीन तक 1000 फीट कच्चे नाले का निर्माण किया जाना है. जिसका योजना कोड 3408012001/कउ/9010253756 है .योजना लागत 58,000 है. योजना वर्ष 2018-19 में   स्वीकृत की गयी है. इस योजना में 32,256 रूपये का निकासी कर ली गयी है, जबकि जिन मजदूरों के नाम पर मास्टर रोल बनाया गया है,  उन्‍होने पिछले चार महीने से मनरेगा में मजदूरी नहीं की है. भैया राम मुंडा का जॉब कार्ड सख्या 012/1494 में 18 दिन,  प्रभु सहाय मुंडा के जॉब कार्ड में 78 कार्य दिवस मास्टर रोल में दर्ज  है. वहीं अभिजीत हमसाय के 42 दिन और सुरा मुंडा के जॉब कार्ड में 54 दिन कार्य दिवस दर्ज कर मजदूरी का भुगतान दिखाया गया है. वहीं पंचायत के टोकाड गांव की योजना, जिसका योजना कोड 3408012001/कउ/9010253755 है. इसमें मजदूरी के नाम पर 37,286 रूपये की राशि की फर्जी निकासी कर ली गयी है.

मजदूरों से जब इस योजना में मजदूरी करने के सम्बंध में पूछे जाने पर वे कहते हैं कि हमने मजदूरी नहीं की है. उपरोक्त दोनों योजनाओं में पंचायत और प्रखंड कर्मियों की मिलीभगत से  69,552 रूपये सरकारी राशि का गबन कर लिया गया.

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गबन की शिकायत का सात दिनों में करना है निपटारा

मनरेगा योजना में किये गये गबन को लेकर झारखंड नरेगा वॉच के द्वारा सूचना प्रखंड विकास पदाधिकारी बंदगांव, उपायुक्त पश्चिम सिंहभूम, मनरेगा आयुक्त ग्रामीण विकास विभाग झारखंड सरकार एवं प्रधान सचिव ग्रामीण विकास विभाग को भी दी गयी है. शिकायत किये जाने के 10 दिन से अधिक समय बीत जाने पर भी अब तक किसी प्रकार का कार्रवाई न होना भ्रष्टाचार पर राज्य सरकार की जीरो टोलरेंस की बात को झुठलाता है.

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मनरेगा योजना को लेकर राज्य सरकार उदासीन, चालीस फीसदी मनरेगा कर्मियों के पद रिक्त

आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को  अनिवार्य किये जाने से मनरेगा योजना और श्रमिकों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है. वहीं मनरेगा कर्मियों का प्रखण्ड कार्यक्रम पदाधिकारी से लेकर ग्राम रोजगार सेवक तक के 1482 पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं. जिन्हें पूर्ण किये बगैर योजनाओं के सफल क्रियान्वयन की उम्मीद नहीं की सकती. आंकड़े बताते हैं कि प्रखण्ड कार्यक्रम अधिकारी स्वीकृत पदों के मुकाबले 100 से अधिक पद रिक्त हैं. वहीं  सहायक अभियंताओं के 261 स्वीकृत पदों में सिर्फ 123 कार्यरत हैं. कनीय अभियंता के लिए 846 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से मात्र 481 ही कार्यरत हैं. कम्प्यूटर सहायकों हेतु 261 में सिर्फ 142 कार्यरत हैं. इसी प्रकार लेखा सहायकों के 261 पद सृजित हैं और 157 कार्यरत हैं. ग्राम रोजगार सेवकों के 585 पद खाली पड़े हैं.

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राज्य सरकार का शिकायत निवारण ढांचा बेअसर

मजदूरों को उन्हें प्रदत्त पूरे अधिकार मिलें,  इसके लिए कानून की धारा 19 में प्रभावशाली शिकायत निवारण प्रणाली विकसित करने का उल्लेख है. जिसमें राज्य रोजगार गारंटी परिषदों का गठन, राज्य एवं जिलों के स्तर पर टोल फ्री नंबरों की स्थापना,  मनरेगा लोकपालों की नियुक्ति, सर्वाधिक सामाजिक संपरीक्षा, ग्राम पंचायत, प्रखण्ड एवं जिला मुख्यालयों में शिकायत कोषांगों की स्थापना, ऑनलाईन शिकायत दर्ज करने की सुविधा आदि माध्यमों का उल्लेख किया गया है. धारा 23(6) में निर्दिष्ट अनुसार कार्यक्रम अधिकारी सात दिनों के भीतर ऐसी सभी शिकायतों का निपटारा करेंगे. कार्यक्रम अधिकारी द्वारा 7 दिनों के भीतर किसी शिकायत का निपटारा करने में असमर्थ रहने की स्थिति में इसे अधिनियम का उल्लंघन करना माना जायेगा तथा यह धारा 25 के तहत दण्डनीय है. इन प्रभावशाली प्रावधानों के बावजूद मजदूरों की शिकायतों पर कार्रवाई न होने के कारण स्थिति निराशाजनक होती जा रही है. मनरेगा योजना में राज्य में हो रहे गबन को देखते हुए सवाल उठता है कि क्‍़या योजनाओं का चयन गबन के लिये ही किया जाता है?

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