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बालू की लूट : राज्य को दूसरा सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले खनन विभाग में किसने दी है लूट की छूट ! -3

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Akshay Kumar Jha

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Ranchi: छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड, झारखंड के साथ ही अपने पैरेंट स्टेट से अलग होकर राज्य बने थे. फिर ऐसा क्या हुआ कि छत्तीसगढ़ और उत्तराखड झारखंड को विकास के मामले में कोसों पीछे छोड़ आगे बढ़ गए. जबकि झारखंड के पास इन दोनों राज्यों के मुकाबले खनिज संपदा ज्यादा है. फिर भी हम पिछड़ गए. राजस्व के मामले में खनन विभाग राज्य के सेल्स टैक्स विभाग के बाद दूसरा ऐसा विभाग है, जो राज्य को गाढ़ी कमायी देता है.

अगर खनन विभाग का सरकार के स्तर पर सही तरह से रेग्यूलेशन हो तो शायद टैक्स भी ज्यादा आए. लेकिन ऐसा नहीं हो सका. खनन विभाग को सरकार के स्तर से जब जी चाहा तोड़कर अलग कर दिया और जब चाहा तो उद्योग से जोड़ दिया. सालभर में सिर्फ बालू से सरकारी अधिकारियों और दबंगों ने मिलकर पब्लिक के 600 करोड़ से ज्यादा लूट लिए. क्या इसे लूटपर सरकार की तरफ से लगाम नहीं लगायी जा सकती है. लेकिन सरकार ने इस ओर कभी ध्यान ही नहीं दिया.

इसे भी पढ़ें – झारखंड में बालू लूट की खुली छूट, एक साल में हुआ 600 करोड़ का अवैध कारोबार-1

राज्य को चाहिए 58 माइंस इंस्पैक्ट लेकिन कार्यरत सिर्फ 11

खनन मामले में ऑन-द-स्पॉट रेड करना. या फिर हो रही चोरी पर लगाम लगाना माइंस इंस्पेक्टर का काम है. राज्य में करीब 58 इंस्पेक्टर के पद स्वीकृत हैं. लेकिन सिर्फ 11 इंस्पेक्टर ही राज्य के सभी माइंस को संभाले हुए हैं. यहां तक कि एक माइंस इंस्पेक्टर दो-दो जिले के प्रभार में हैं. जबकि होना तो यह चाहिए था कि हर अंचल पर एक इंस्पैक्टर होना चाहिए, ताकि खनन विभाग पूरी तरह से माफियागिरी पर नकेल कस सके. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. अब ऐसे में माइंस इंस्पेक्टर को हर हाल में क्षेत्र की पुलिस पर निर्भर रहना पड़ता है.

यह बात किसी से छिपाने की नहीं है कि पुलिस क्षेत्र में खनन माफियागिरी को रोकना चाहती है या नहीं. जब तक रेड का समय होता है, पुलिस की टीम तैयार ही नहीं हो पाती और जबरन माइंस इंस्पेक्टरों को भी पुलिस की ही तरह सेट हो जाना पड़ता है. क्योंकि अकेला चना कितने घड़े फोड़ सकता है, यह सार्वजनिक है.

इसे भी पढ़ें – बालू लूट की खुली छूटः पुलिस, प्रशासन और दबंगों ने मिलकर कर ली 600 करोड़ की अवैध कमायी-2

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दुर्भाग्यपूर्णः खनन विभाग में 9 नन गजटेड अधिकारी को बनाया गजटेड अफसर

सरकार की राज्य को लेकर मंशा इस बात से जाहिर हो जाती है कि, कैसे खनन विभाग में एक ननगजटेड अधिकारी को गजटेड अफसर बनाकर काम चलाया जा रहा है. हर तरह का हथकंडा अपनाया जा रहा है, लेकिन ना तो डीएमओ स्तर पर बहाली निकाली जा रही है और ना ही इंस्पेक्टर बहाल किए जा रहे हैं. ऐसा खनन विभाग में ही संभव है कि राज्य को जहां हर जिले में एक डीएमओ चाहिए, वहां एएमओ और इंस्पेक्टर डीएमओ के प्रभार में हैं. इंस्पेक्टर एक ननगजटेड अधिकारी होते हैं, बावजूद इसके इन्हें डीएमओ बनाकर एक गजटेड अफसर बना दिया जाता है.

वहीं राज्य में जहां 24 डीएमओ की जरूरत है, वहां सिर्फ 15 पदों पर ही गजटेड अधिकारी हैं, बाकी 9 पर ननगजटेड इंस्पैक्टर ही डीएमओ के प्रभार में हैं. जिसका नतीजा है कि एक साल में 600 करोड़ की लूट हो जाती है.

कौन है इस लूट के लिए जिम्मेदार

जाहिर तौर पर अधिकारी और दबंग इस लूट में शामिल हैं, तो सरकार इन्हें लूट करने का खुला लाइसेंस दे रही है. खनन विभाग करीब-करीब हर बार सीएम का ही विभाग होता है. सीएम के मंत्री होने के नाते और राज्य को दूसरे सबसे ज्यादा राजस्व देने के नाते इसकी पूरी जिम्मेदारी सूबे के मुखिया यानि सीएम पर आती है.

ऐसा नहीं है कि यह लूट की कहानी सिर्फ बालू तक ही सीमित है. खनन के दूसरे मामलों में भी खुले तौर पर लूट की खबर है. लेकिन सरकार को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है.

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