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रांची के कोचिंग संस्थानों की लूट कथा-6 : इंजीनियर-डॉक्टर बनाने का सपना दिखा छठी क्लास के स्टूडेंट्स का बर्बाद कर रहे करियर

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Rahul Guru

Ranchi: रांची के कोचिंग संस्थान केवल पढ़ाते नहीं है. वे अभिभावकों और स्टूडेंट्स के बीच ऐसा भ्रमजाल बनाते हैं, जिसमें स्टूडेंट्स फंसते चले जाते हैं. ये अभिभावकों और स्टूडेंट्स का ऐसा ब्रेन वॉश करते हैं कि उनके यहां एडमिशन लिया तो इंजीनियर या डॉक्टर बनना तय.

लेकिन, ऐसा होता नहीं. होता यह है कि बच्चे साइंस-गणित विषयों में ही उलझ कर रह जाते हैं. उनकी स्कूलिंग खराब हो जाती है. बाकी विषयों की बेसिक जानकारी भी उन्हें नहीं मिल पाती. और अगर डॉक्टर या इंजीनियर नहीं बनें, तो फिर वह किसी काम के नहीं रहते हैं. रांची के कोचिंग संस्थानों की लूट कथा की छठी कड़ी कोचिंग संस्थानों की ऐसी ही भ्रमजाल की जानकारी दे रही है.

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प्री-फाउंडेशन के नाम पर करते हैं ब्रेन वॉश

रांची के अधिकांश कोचिंग संस्थानों के टीचर ही डायरेक्टर और डायरेक्टर ही टीचर है. पर ये न तो टीचर हैं और न ही डायरेक्टर हैं. असल में ये बिजनेसमैन हैं, जो एजुकेशन देने के नाम पर पूरी तरह से व्यापार करते हैं. इनके पास ऐसे-ऐसे जुमले हैं कि इनके संस्थान में एडमिशन ले लिया तो इंजीनियर या डॉक्टर बनने से कोई भी नहीं रोक पायेंगे. ये ऐसा इसलिए भी कहते हैं क्योंकि ये फाउंडेशन से पढ़ाई नहीं बल्कि उसके एक कदम पहले प्री-फाउंडेशन से पढ़ाई कराते हैं.

रांची के कोचिंग संस्थानों में प्री-फाउंडेशन कोर्स की शुरुआत क्लास 6 में पढ़ रहे बच्चे से शुरू होती है. कई कोचिंग संस्थान क्लास 8 से इसकी शुरुआत करते हैं. कोचिंग संस्थान ने इस प्री-फाउंडेशन कोर्स की जो जानकारी अपने वेबसाइट पर दी है, उसके मुताबिक वे क्लास 6 के बच्चे की आइक्यू (IQ) और मेंटल लेबल को बढ़ा सकते हैं. मतलब कि आपका बच्चा यदि इनके कोचिंग के प्री-फाउंडेशन कोर्स में नहीं पढ़ा तो उसका IQ और मेंटल लेबल नहीं बढ़ेगा.

रांची में फिटजी, आकाश इंस्टीट्यूट और गोल इंस्टीट्यूट प्री-फाउंडेशन कोर्स कराते हैं. फिटजी ‘लिटिल जीनी’ नाम से कोर्स कराता है. यह कोर्स क्लास 6 से शुरू होता है. इसी तरह आकाश इंस्टीट्यूट क्लास 8 से ही चार साल का स्पेशल कोर्स कराते हैं. जिसमें संस्थान दावा करता है कि क्लास 8 में पढ़ रहे स्टूडेंट्स को चार साल बाद डॉक्टर बना ही देगा.

इसी तरह गोल इंस्टीट्यूट भी अपना अलग प्री-फाउंडेशन कोर्स कराता है. इसका कोर्स क्लास 9 के बच्चों के लिए होता है.

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एनसीइआरटी की किताबों से बेहतरीन मानते हैं अपनी स्टडी मैटेरियल को

रांची के कोचिंग संस्थान संगठित तरीके से बच्चों का ब्रेन वॉश और अभिभावकों की जेब में सेंधमारी करते हैं. और इस ब्रेन वॉश करने के पैसे भी वसूलते हैं. आइए बताते हैं कैसे…..

आपको यदि लग रहा है कि रांची के कोचिंग संस्थानों में कुछ रुपये देकर एडमिशन करा लिया और हो गया, तो ऐसा नहीं है. रांची के कोचिंग संस्थान खुद को स्कूल के समानांतर संस्थान मानते हैं. जब आप इनके यहां एडमिशन के लिए जायेंगे तो आपको एडमिशन फीस, ड्रेस फीस, बैग, बैच, इंस्टीट्यूट मेंटनेंस के साथ-साथ स्टडी मैटेरियल के लिए अलग से फीस देनी होगी.

अब समझिए स्टडी मैटेरियल की कहानी

रांची के कोचिंग संस्थान अपने यहां एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स को अलग से स्टडी मैटेरियल देते हैं. स्टडी मैटेरियल ये खुद से तैयार कराये रहते हैं. वह मैटेरियल बकायदा बुक फॉर्मेट में होता है. देश में नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीइआरटी) संस्था 12 वीं तक के स्टूडेंट्स के लिए रिसर्च कर हर साल किताबें छपवाती है.

स्कूल एजुकेशन से लेकर आइएएस बनने तक की परीक्षा की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स इसी किताब को पढ़ते हैं. लेकिन रांची के कोचिंग संस्थान के लिए तमाम रिसर्च के बाद तैयार की गयी एनसीइआरटी की किताब बेकार है. इसलिए ये अपनी किताब छपवाते हैं और बच्चों से पैसे वसूल कर उन्हें इसी स्टडी मैटेरियल को पढ़ने के लिए कहते हैं. इनके मुताबिक स्टूडेंट्स दुनिया की हजार किताब पढ़ लें, लेकिन इनका स्टडी मैटेरियल नहीं पढ़ा तो सब बेकार.

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एनटीएसइ और ओलिंपियाड परीक्षा के नाम पर वसूली

रांची के कोचिंग संस्थान बच्चों और अभिभावकों को इंजीनियरिंग और मेडिकल परीक्षा से पहले एनटीएसइ सहित कई परीक्षाओं की तैयारी कराने की सलाह देते हैं. कोचिंग संस्थानों के मुताबिक, एनटीएसइ जैसी परीक्षाएं ही आपके बच्चे का भविष्य तय करती है. इसलिए बच्चे को क्लास 5 या 6 से ही एनटीएसइ जैसी परीक्षाओं की तैयारी कराइये. यानी इन परीक्षाओं को बेस बता कोचिंग सेंटर इसकी आड़ में इंजीनियरिंग और मेडिकल परीक्षाओं के लिए अभिभावकों से पैसे वसूलते हैं.

ऐसा नहीं है कि शिक्षा के क्षेत्र में क्लास 10 तक के बच्चों के लिये किसी तरह का कंपीटिटिव इग्जाम नहीं है. ऐसी 26 तरह की परीक्षाएं है. जिसे वर्षों रिसर्च के बाद तैयार किया गया है. जिसमें बच्चों की उम्र, समझ से उनकी सोचने-समझने की क्षमता तक को ध्यान में रखा जाता है. लेकिन हमारे कोचिंग संस्थान को उनसे कोई मतलब नहीं रहता.

देश में लगभग 30 परीक्षाएं हैं, जो स्टूडेंट्स के बेसिक के लिए पर्याप्त है. ये परीक्षाएं NTSE, KVPY, NSO, HBBYS, UCO, NSTSE, MTSE, IMO, NLSTSE, NSEJS, SSTSE, SLSTSE, IOS, RMO, IOM, IOEL, NSEB, NSEP, NSEC, NSEA, ZIO, IIO, NCO, NIMO, NBTO, GEO GENIUS, KO, SCYGANLSTSE, ASSET और IAIS हैं. पर इन परीक्षाओं को लेने की जगह रांची के कोचिंग संस्थान एनटीएसइ, केवीपीबाइ और कुछ ओलिंपियाड परीक्षाओं की तैयारी के नाम पर कमाई करते हैं.

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स्कूलों तक में हैं रांची के कोचिंग की सेंधमारी

रांची के कोचिंग संस्थानों का सिंडिकेट इतना तगड़ा है कि ये रांची के बड़े स्कूलों तक में सेंधमारी करते हैं. और ये सेंधमारी छुप कर नहीं खुल कर करते हैं. अपने प्री-फाउंडेशन कोर्स में एडमिशन लेने के लिए फिटजी और आकाश इंस्टीट्यूट जैसे संस्थान स्कूल-स्कूल जाकर एडमिशन टेस्ट लेते हैं. जहां वे स्कूली बच्चों को ऑफर देते हैं कि अगर आप मेरे यहां एडमिशन लेते हैं तो आपको फीस में छूट दी जायेगी.

इसके अलावा रांची का फिटजी सेंटर डीपीएस रांची के साथ टाइअप कर डीपीएस में ही अपना कोचिंग चलाता है. मतलब फिटजी के टीचर डीपीएस के बच्चों को उनके स्कूल जाकर पढ़ाते हैं. इस प्रोग्राम को पिनैकल नाम दिया गया है. इस पिनैकल प्रोग्राम में पढ़ाने के लिए कुल 75 बच्चों को सेलेक्ट किया जाता है. यह सुविधा केवल डीपीएस रांची के बच्चों के लिए है. इसकी फीस करीब 4 लाख रुपया है.

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