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गुमला के सिसई प्रखंड में मनरेगा योजना के नाम पर हो रही पैसों की बंदरबांट

41 योजनाओं में हुई हेराफेरी

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Pravin Kumar
Gumla : मनरेगा ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने के जरिये के साथ-साथ पलायन रोकने के लिए महत्वपूर्ण सरकारी उपाय के रूप में माना जाता है. वहीं, गुमला जिला के सिसई प्रखंड में मनरेगा के तहत कुदरा पंचायत में चली योजना बिचौलियों और मनरेगा अधिकारी के साथ-साथ प्रखंड के अधिकारी की मिलीभगत से कागजों में ही पूरी की जा रही है. कुदरा पंचायत में 2016-17 में कुल 41 योजनाएं बिना तकनीकी स्वीकृति के ही शुरू कर पूरी कर ली गयी हैं. इनमें गड़बड़ियों का ममला समाने आने के बाद भी प्रखंड विकास पदाधिकारी मामले से अपनी अनभिज्ञता जहिर करते हैं.

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41 योजनाओं के बोर्ड के नाम पर हड़प लिये गये 20 हजार 500 रुपये

कुदरा पंचायत में चलीं मनरेगा की 41 योजनाओं में से किसी भी योजना के पूरा होने के बाद भी बोर्ड नहीं लगाया गया. जबकि, प्रति योजना 500 रुपये की राशि की निकासी बोर्ड लगाने के नाम पर कर ली गयी. राशि की निकासी के लिए नौशाद आलम को वेंडर के रूप में दिखया गया है, जबकि किसी भी योजना का बोर्ड योजनास्थल पर नहीं लगाया गया है. यहां बोर्ड लगाने के नाम पर कुल 20 हजार 500 रुपये की राशि निकाल ली गयी.

पंचायत में एक ही व्यक्ति के अंगूठे के निशान मस्टर रोल में दर्ज

पंचायत में कूप निर्मण की योजना में मजदूरी भुगतान में भी काफी गड़बड़ी का मामला उजागर हुआ है. पंचायत के करकरी गांव में प्रमिला उरांव के कूप निर्माण की योजना स्वीकृत की गयी, जिसका योजना कोड 7080 90724 है. योजना राशि के गबन के मकसद से मस्टर रोल में मजदूरी भुगतान के लिए अलग-अलग व्यक्तियों को मजदूरों के रूप में दिखाया गया और हस्ताक्षर की जगह अंगूठे का निशान एक ही व्यक्ति द्वारा लगाया गया है. ऐसा पंचायत में चली मनरेगा के तहत अन्य योजना में भी किये जाने के प्रमाण सामने आये हैं. हबीब अंसारी लाभुक के नाम से स्वीकृत कूप निर्माण योजना में भी इसी तरह का मामला सामने आया है.

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करकरी गांव में बकरी शेड के नाम पर हड़प लिये गये चार लाख

करकरी गांव में आठ बकरी शेड के नाम पर भी राशि की निकासी की गयी, जबकि लाभुकों को कहा गया कि आप अपनी राशि से योजना का निर्माण करें. वहीं, योजना राशि की निकासी वेंडर नौशाद आलम द्वारा 22 मार्च 2018 को दिये गये बिल के आधार पर की गयी है, जिसका बिल नंबर 699,693 है. गांव में कुल आठ योजनाओं में औसतन चार लाख रुपये की राशि की निकासी हुई है. पंचायत में मनरेगा योजना में वैसे लोगों के भी काम करने का मामला समाने आया है, जिनका रोजगार कार्ड अर्थात जॉब कार्ड भी नहीं बना है. कूप निर्माण योजना के तहत लाभुक मजीद अंसारी के कूप में काम करनेवाले जोगेंद्र उरांव (पिता स्व. बिरसा उरांव) ने स्वीकार किया है कि मनरेगा योजना में काम करने के लिए कहा गया, जबकि जोगेंद्र उरांव के नाम से जॉब कार्ड भी नहीं बना है और मस्टर रोल में भी किसी अन्य का नाम दर्ज है. ऐसे में पंचायत में संचालित योजना में मजदूरी भुगतान में भी फर्जीवाड़ा करने का मामला समाने आ चुका है.

प्रशासनिक स्वीकृति के बिना ही कैसे निकाल ली गयी योजना की राशि

कुदरा पंचायत में चली मनरेगा योजना में सबसे बड़ी गड़बड़ी का मामला यह सामने आया कि बिना तकनीकी स्वीकृति के ही 41 योजनाओं का काम शुरू कर पूरा कर दिया गया. जबकि, तकनीकी स्वीकृति और प्रशासनिक स्वीकृति के बिना कार्य करने पर रोजगार सेवक, पंचायत सेवक, पंचायत सचिव, प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारियों, कंप्यूटर ऑपरेटर मनरेगा कानून के तहत दोषी होते हैं, जबकि पंचायत में चली योजना के लिए अब तक किसी भी पदाधिकारी पर कार्रवाई नहीं की गयी है.

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मनरेगा योजनाओं के लिए लाभुकों से पैसों की वसूली

पंचायत में चल रही मनरेगा योजनाओं के लिए लाभुकों से पैसों की वसूली के कई मामले सामने आ चुके हैं. मरियम उरांव से 1400 रुपये, सुशील उरांव से 2500 रुपये ओज कुमार जायसवाल ने लाभुक चयन करने के नाम पर लिये. वहीं मजीद अंसारी ने आजम अंसारी से तीन हजार, कतरीना लकड़ा से 500 रुपये शौचालय निर्माण के नाम पर घूस ली. वहीं, बिचौलिया वाहिद अंसारी द्वारा खदी उरांव, बुधनी उरांव, आरिफ अंसारी से भी लाभुक के रूप में चयन करने के एवज में घूस लेने की बात कही गयी है. प्रखंड में चल रही सरकार की तमाम योजनाओं में लाभुकों से घूस लेने के कई मामले समाने आये हैं, वहीं बिचौलियों द्वारा लाभुक के चयन से लेकर समाग्री की सप्लाई के नाम पर राशि की निकासी कर लेने के प्रमाण भी समाने आये हैं.

क्या कहते हैं सिसई के प्रखंड विकास पदाधिकारी

इन तमाम मामलों पर सिसई के प्रखंड विकास पदाधिकारी ने कहा- प्रखंड में मनरेगा योजना बेहतर तरीके से चल रही है. इस में गड़बड़ी के मामले हमारे समक्ष नहीं आये हैं. आप प्रमाण दीजिये, तो इस पर जांच करके कार्रवाई करेंगे. वहीं, कुदरा पंचायत में चलीं 41 योजनाओं की बिना तकनीकी स्वीकृति के काम पूरे करके योजनाओं की राशि निकाल लिये जाने के मामले से भी उन्होंने साफ इनकार किया, जबकि सोशल ऑडिट में मामला उजागर हो चुका है.

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