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लूट की हवस : कोरोना संक्रमित मरीजों के सामने चौतरफा संकट, ट्रीटमेंट के नाम पर लाखों वसूल रहे हैं अस्पताल

Ranchi. कोरोना की दूसरी लहर सरकार और समाज के लिये चुनौती बनी हुई है. अब तक 158953 संक्रमित राज्य में मिल चुके हैं. 1406 लोगों की जान जा चुकी है. 25,619 एक्टिव केस अभी हैं. इन सबके बीच राज्य के अस्पतालों में कोरोना जांच कराना, जांच रिपोर्ट का समय पर ना मिलना, जरूरत पड़ने पर बेड की उपलब्धता में समस्या समेत तमाम परेशानियां सामने आ रही हैं. यहां तक कि अंतिम संस्कार तक पर आफत आ चुकी है. उपर से कुछ अस्पताल ऐसी विकट घड़ी में भी लूट मचाने में लगे हैं. अस्पतालों ने कोरोना के नाम पर लूट मचा रखी है. राज्य सरकार ने प्रतिदिन के लिये 12000 रुपये तक के हिसाब से कैपिंग तय कर रखी है, पर अस्पताल इससे ज्यादा वसूल रहे हैं. सोशल मीडिया पर इसे लेकर सरकार से एक्शन उठाने की अपील की गयी है.

द्वारिका अस्पताल में एक दिन का चार्ज एक लाख से ऊपर

बोकारो के अरविंद सिंह द्वारिका अस्पताल, नामकुम, रांची में कोरोना संक्रमित होने का बाद 17 अप्रैल को एडमिट हुए. वहां एक ही दिन में उनका बिल डेढ़ लाख रुपये का बन गया. सरकार द्वारा निर्धारित बेड चार्ज (मैक्सिमम 12000 रुपये प्रतिदिन) के विरूद्ध उनसे 14500 रुपये लिये गये. इसी तरह अन्य मदों में लगभग सवा लाख से अधिक का बिल बनाया गया. एक ही दिन में डॉक्टरों के कंसल्टेशन के नाम पर लगभग 20,000 का बिल बना. तीन पीपीइ कीट के लिये साढ़े तीन हजार रूपये से अधिक पैसे लिये गये. एक ही दिन में एक लाख से अधिक का बिल देखना पेशेंट के लिये भयावह साबित हुआ है.

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सरकार देखे जमीनी सच्चाई

लाइफ सेवर्स के अतुल गेरा ने ट्विटर पर इस व्यवस्था को लेकर चिंता जतायी है. कहा है कि झारखंड में कोरोना के नाम पर लूट मचायी जा रही है. सरकार को इस जमीनी सच्चाई को देखना होगा. कोरोना जैसी भयावह त्रासदी के बीच लोग हर तरीके से मारे जा रहे हैं.

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