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रांची के कोचिंग संस्थानों की लूट कथा 7: न मॉनिटरिंग करने वाली संस्था और न ही है नियमावली

Rahul Guru
Ranchi: रांची के अलावा बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर और हजारीबाग झारखंड के ऐसे शहर हैं, जहां बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थान हैं. इसके अलावा लगभग हर जिले में छोटे-बड़े कोचिंग संस्थान हैं. केवल रांची की बात करें तो इंजीनियरिंग-मेडिकल परीक्षाओं की तैयारी कराने वालों संख्या 400 से अधिक है.

रांची के कोचिंग बाजार पर फिटजी, गोल इंस्टीट्यूट, बायोम इंस्टीट्यूट, न्यूटन ट्यूटोरियल, चैंप्स स्क्वेयर, ब्रदर्स एकेडमी और आकाश इंस्टीट्यूट जैसे संस्थानों का ही असर है. इसके अतिरिक्त 700 से अधिक ऐसे कोचिंग संस्थान हैं, जो दूसरी कंपीटेटिव परीक्षाओं की तैयारी कराते हैं.

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कोचिंग संस्थानों की मॉनिटरिंग के लिए नहीं है कोई संस्था

रांची सहित राज्य के विभिन्न शहरों में हजारों की संख्या में संचालित हो रहे कोचिंग संस्थान अभिभावकों और स्टूडेंट्स के साथ मनमानी करते हैं. अभिभावक और स्टूडेंट्स कोचिंग संस्थानों की मनमानी से चाह कर भी नहीं बच सकते हैं. अभिभावक यदि किसी कोचिंग संस्थान में ठगे जाते हैं तो स्थानीय थाना में एफआइआर होने से ज्यादा कुछ नहीं होता है.

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इसकी बड़ी वजह यह है कि कोचिंग संस्थानों को नियंत्रित करने वाली राज्य में कोई संस्था है ही नहीं. राज्य गठन के 20 साल होने के बाद भी, अब तक कोचिंग संस्थानों के नियंत्रण के लिए न तो कोई नियमावली बन पायी और न ही कोई एजेंसी.

इस तरह की कोई नियमावली बने इसके लिए न तो राज्य सरकार की ओर से प्रयास किया गया और न ही कोचिंग संस्थानों ने कभी पहल की है. यही वजह है कि इतने सालों के बाद भी नियमावली नहीं होने की वजह से कोचिंग संस्थान मनमानी कर रहे हैं.

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बिहार में है कोचिंग संस्थानों को नियंत्रित करने की नियमावली

कोचिंग संस्थानों को नियंत्रित करने वाली नियमावली बिहार में बनी हुई है. बिहार में यह बिहार कोचिंग संस्थान (नियंत्रण एवं विनियमन) अधिनियम 2010 के नाम से है. बिहार में यह नियमावली काफी रिसर्च के बाद तैयार की गयी है. पांच चैप्टर (अध्याय) की यह नियमावली कोचिंग संस्थानों पर नियंत्रण के साथ स्टूडेंट्स का ख्याल भी रखती है.

नियमावली के मुताबिक

कोचिंग संस्थानों का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है.
– एक कोचिंग संस्थान का रजिस्ट्रेशन तीन वर्ष के लिए मान्य होगा.
– कोचिंग संस्थानों को उनकी ओर से कराये जा रहे कोर्स और कोर्स अवधि की जानकारी देनी होगी.
– कोचिंग में पढ़ाने वाले शिक्षकों की योग्यता और अनुभव बताना होगा.
– कोचिंग में गैर सरकारी शिक्षक और रिटायर शिक्षक ही पढ़ायेंगे.
– कोचिंग संस्थानों को आधारभूत संरचना का जिक्र करना होगा.
– कोचिंग संस्थानों को कोर्स, कोर्स पूरा कराने की अवधि और कोर्स की फीस का जिक्र प्रोसपेक्टस के माध्यम से करना होगा.
– कोचिंग संस्थानों में प्रति छात्र न्यूनतम एकवर्ग मीटर जगह हो.
– कोचिंग संस्थानों को बेंच-डेस्क, लाइट की व्यवस्था, पीने का पानी, फायर फायटिंग, शौचालय की सुविधा, इमरजेंसी मेडिकल सुविधा और पार्किंग सुविधा सुनिश्चत करना होगा.

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जिला अधिकारी होते हैं अध्यक्ष

कोचिंग नियंत्रण नियमावली के तहत कोचिंग संस्थानों की रजिस्ट्रेशन कमिटी होती है. इस कमेटी में जिला अधिकारी अध्यक्ष, पुलिस अधीक्षक सदस्य, जिला शिक्षा पदाधिकारी सदस्य सचिव और जिले के अंगीभूत कॉलेज के प्राचार्य सदस्य होते हैं.

अगर किसी जिले में एक अधिक अंगीभूत कॉलेज है तो रोटेशन में कॉलेजों के प्राचार्य एक साल के लिए सदस्य होंगे. इस नियमावली के चौथे चैप्टर में स्पष्ट लिखा हुआ है कि कोचिंग संस्थान और स्टूडेंट्स के बीच किसी तरह का विवाद होता है तो इसका निपटारा एसडीओ करेंगे. विवाद के 30 दिनों के भीतर निपटारा किया जायेगा. एसडीओ की अध्यक्षता में गठित कमेटी विवाद का निराकरण करेगी.

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क्यों नहीं बिहार की तर्ज पर बन सकती नियमावली

गौरतलब है कि झारखंड में कई एजेंसियों की नियमावली बिहार से ली गयी है. इसमें सबसे महत्वपूर्ण है झारखंड लोक सेवा आयोग नियमावली. बिहार लोक सेवा आयोग नियमावली की तर्ज पर यहां झारखंड लोक सेवा आयोग नियमावली गठित की गयी है. ऐसे में कोचिंग संस्थानों के नियंत्रण और स्टूडेंट हित में बिहार कोचिंग नियमावली की तर्ज पर झारखंड में कोचिंग नियमावली क्यों नहीं बन सकती है?

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