Opinion

इस तस्वीर को देखिये, यही असल लॉकडाउन का भारत है, कोरोना से लड़ाई नमक-रोटी-माड़-भात खाकर नहीं जीत सकते

Soumitra Roy

ऊपर की इस तस्वीर को देख रहे हैं ? यही असल में लॉकडाउन का भारत है.

बहिष्कृत, शर्मसार, असहाय और अपराध बोध से ग्रस्त एक गरीब मजदूर. मग और थाली लिए लाइन में खड़ा हुआ.

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“डेटा साइंस वेबसाइट डेटामीट का ट्रैकर कहता है कि लॉकडाउन के दौरान आने वाले कल की चिंता में 74 लोग देश में खुदकुशी कर चुके हैं.”

ये उन 300 से ज़्यादा प्रवासी मज़दूरों के अलावा हैं,  जो पैदल अपने घर भागे थे, नहीं पहुंच पाये.

सरकारी पैसे पर जी रहा मीडिया इसपर कभी बात नहीं करेगा. और NCRB ऐसे आंकड़ों को बीमारी, कर्ज़ या प्रेम संबंध बताता है.

इससे पहले भी वर्ष 2016 में एक सनक ने नोटबंदी के दौरान 100 से ज़्यादा लाशें गिराई थीं.

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अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने कोरोना के कारण लॉकडाउन से 40 करोड़ के भुखमरी की कगार पर पहुंचने की आशंका जताई है. भारत की एक-तिहाई जनसंख्या के पास राशन कार्ड तक नहीं है.

जन साहस संस्था ने लॉकडाउन से पहले 3000 प्रवासी मजदूरों पर सर्वे किया था. पता चला कि 10 में से 4 के पास खाना नहीं था, जबकि दो-तिहाई के पास तब एक हफ्ते का ही राशन, पैसा बचा था.

कुपोषण और कोविड-19 संक्रमण के बीच का संबंध भले ही अभी पुष्ट नहीं हुआ है. लेकिन 1908 की सर्दियों में पंजाब में फैले मलेरिया से 3 लाख लोगों के मरने की रिपोर्ट साफ इसकी ओर इशारा करती है. मोदी सरकार कोरोना से युद्ध के दावे कर रही है और आधी से ज्यादा आबादी भूखी है.

सेल नाम की पत्रिका में प्रकाशित 2016 की स्टडी बताती है कि भुखमरी, कुपोषण का वायरस संक्रमण से मुकाबला करने में सक्षम न होने का सीधा संबंध है. देश के जाने-माने इम्युनोलॉजिस्ट सत्यजीत रथ वायरस का संक्रमण होने पर अगर आपका भोजन संतुलित नहीं है, तो मौत की आशंका ज्यादा रहती है.

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ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत कोई महाशक्ति या विकसित देश नहीं, बल्कि रवांडा और बांग्लादेश से भी नीचे 102 नंबर पर है. भारत की 20 करोड़ आबादी कुपोषित है. भारत में दुनिया के सर्वाधिक टीबी मरीज हैं.

अमेरिका में कोरोना से 43 हजार लोग मरे हैं. लेकिन अध्ययन के प्रारंभिक आंकड़े बताते हैं कि गोरों की तुलना में अफ्रीकी-अमेरिकियों, लैटिन अमेरिकियों की दोगुनी मौत हुई है. आर्थिक असमानता और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच न होने से नुकसान भयानक है.

कोरोना से लड़ाई नमक-रोटी या माड़-भात खाकर नहीं जीती जा सकती. सरकार को जल्दी ही ये बात अगर समझ नहीं आयी तो भारत कोरोना से जंग हार जायेगा.

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डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं.

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