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लोकसभा में सवर्ण आरक्षण बिल पास

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New Delhi: गरीब सवर्णों को सरकारी नौकरियों और शैक्षिक संस्थानों में 10% आरक्षण के मुद्दे पर लोकसभा में जोरदार बहस के बाद पास हो गया है. इस पर शाम 5 बजे बहस हुई. लोकसभा में ‘सवर्ण आरक्षण’ पर चर्चा के दौरान पीएम मोदी और राहुल गांधी भी हैं मौजूद रहे.

है. इसी बीच शीत सत्र में राज्यसभा की कार्यवाही एक दिन बढ़ा दी गयी है, यानी अब राज्यसभा में 9 जनवरी तक कामकाज होगा. माना जा रहा है कि सरकार ग़रीब सवर्णों को 10 फ़ीसदी आरक्षण देने का जो संविधान संशोधन बिल लाने जा रही है, उसी के मद्देनज़र राज्यसभा की कार्यवाही बढ़ाई गयी है.

माना जा रहा है कि सरकार ने ये क़दम बीजेपी से नाराज़ चल रहे सवर्णों के एक बड़े धड़े को लुभाने के लिए उठाया है. मोदी  सरकार ने  मंगलवार को (08 जनवरी, 2019) आर्थिक रूप से पिछड़े ऊंची जातियों के लोगों को 10% अतिरिक्त आरक्षण देने के लिए संविधान संशोधन बिल लोकसभा में पेश किया गया था.

कैबिनेट ने ईसाइयों और मुस्लिमों समेत अनरिजर्वड कटैगरी के लोगों को नौकरियों और शिक्षा में 10% आरक्षण देने का फैसला लिया. इसका फायदा 8 लाख रुपए सालाना आय सीमा और करीब 5 एकड़ भूमि की जोत वाले गरीब सवर्णो को मिलेगा.

निजी क्षेत्र में भी पासवान ने की 60 फीसदी आरक्षण की मांग

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि अगड़ी जातियों के गरीब लोगों को 10 फीसद आरक्षण दिए जाने से वो खुश है. उन्होंने सरकार के फैसले को सही करार देते हुए कहा कि ये सभी के सिए समान अवसर वाली बात है. पासवान ने कहा की सवर्ण आर्थिक तौर कमजोर हुए हैं. उन्होंने 60 फीसद आरक्षण को संविधान की 9वीं अनुसूची में डाले जाने की मांग की.

रामविलास पासवान ने कहा कि बिना किसी का हक मारे आरक्षण देने में क्या दिक्कत है. जब उन्होंने पार्टी बनाई थी उस वक्त उन्होंने अगड़ी जातियों को आरक्षण देने की मांग की थी. रामविलास पासवान ने कहा कि बिल को 9वीं अनुसूची में डाले जाने से कोर्ट दखल नहीं देगा.

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने तीन चीजों की मांग की-

  1. 1.60 फीसदी आरक्षण को नौवीं सूची में डाला जाए
  2. निजी क्षेत्र में भी 60 फीसदी आरक्षण लागू हो
  3. भारतीय न्यायिक सेवा आयोग का गठन हो

सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण की जरूरत: थावरचंद गहलोत

केंद्रीय मंत्री थावर चंद गहलोत ने कहा कि हर धर्म के सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण का फायदा मिलेगा. केरल से कांग्रेस सांसद प्रोफेसर केवी थॉमस ने कहा कि केन्द्र सरकार के आरक्षण के फैसले को सभी अखबारों ने इस खबर को प्रमुखता से लिया है. पहले संसद में पास करना है और फिर 50 फीसदी राज्यों में पास करना होगा और उनके पास तीन महीने का वक्त है. इससे पता चलता है कि सरकार इसको लेकर सरकार कितनी गंभीर है. केरल से कांग्रेस सांसद प्रोफेसर केवी थॉमस ने कहा कि सरकार बिल लाई है लेकिन नौकरियां कहां हैं. उन्होंने आरक्षण देने के आधार पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति की आठ लाख रुपये सैलरी सालाना होगी उसे आरक्षण का लाभ मिलेगा यानि 63 हजार महीने सैलरी पाने वाले व्यक्ति को इसका लाभ मिलेगा ये बहुत बड़ा एमाउंट है. सांसदों के पास 1000 एकड़ में घर होना चाहिए इतना तो सांसदों के पास भी नहीं होता है.

मुझे लगता है कि अब समय आ गया है: जेटली

लोकसभा में बहस के दौरान वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि पिछली सरकारों ने सवर्ण आरक्षण पर अभी तक सही प्रयास नहीं किए थे. वित्त मंत्री ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि जुमले की शुरुआत विपक्ष ने की थी. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद में बहस के दौरान कहा कि मुझे लगता है आज इसका समय आ गया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष के मेनिफेस्टों में लिखा हुआ है, उसका समर्थन कीजिए. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि संसद में पास होकर 50 फीसद से ज्यादा आरक्षण संभव है. 50 फीसद आरक्षण जातिगत है. 50 फीसद का आरक्षण सामाजिक तौर पर पिछड़े समाज के लिए है. सामाजिक भेदभाव कम करने के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया था.

एआईएडीएमके के सांसद थंबी दुराई ने लोकसभा में आरक्षण बिल पर बहस में भाग लेते हुए कहा कि सामाजिक आधार पर रिजर्वेशन होना चाहिए.

टीएमसी सांसद ने उठाया महिला आरक्षण बिल का मुद्दा

टीएमसी के सुदीप बंधोउपाध्याय ने लोकसभा में कहा कि सरकार इस आरक्षण बिल की तरह ही महिला आरक्षण बिल को प्राथमिकता के साथ क्यों नहीं लेती है? यह बिल केवल नौकरियों के बारे में ही नहीं है, बल्कि झूठी आशाओं और नकली सपनों के साथ युवाओं को गुमराह करने के बारे में भी है.

जाति नहीं बदलती, वित्तीय स्थिति में परिवर्तन होता है- भर्तुहरि महताब, बीजेडी नेता

बीजेडी नेता भर्तुहरि महताब ने कहा- “कोई अपनी अपनी जाति नहीं बदल सकता है, हालांकि उस किसी भी व्यक्ति की वित्तीय स्थिति में परिवर्तन हो सकता है. इसलिए, कम से कम हर दस वर्ष पर पर्याप्त सूचना का संकलन किया जाना चाहिए और ये प्रस्तावित बिल में शामिल नहीं है.”

सीपीआई-एम नेता जितेन्द्र चौधरी ने कहा- बिल को जेपीसी के पास भेजा जाना चाहिए

सीपीआई(एम) नेता जितेन्द्र चौधरी ने कहा- मैं यह सुझाव देता हूं कि इस बिल को ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी के पास भेजा जाना चाहिए ताकि इस बिल पर और व्यापक चर्चा हो सके.

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