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लोकसभा चुनाव: कहीं महागठबंधन का नया प्लॉट तो नहीं हो रहा तैयार

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  • बाबूलाल और हेमंत की नजदीकियां कहीं नये समीकरण का आगाज तो नहीं
  • कांग्रेस से बेरूखी दे रही अलग मैसेज, झामुमो, झाविमो और राजद नये प्लॉट का भर रहे दंभ
  • सीटों की दावेदारी भी है बड़ा पेंच, फूंक-फूंक कर रखी जा रही नये प्लॉट की नींव

Ravi/Pravin

Ranchi: लोकसभा चुनाव 2019 का आगाज बस चंद महीनों में होगा. सभी दलों ने नये अंदाज और नई रणनीति के साथ तैयारी शुरू कर दी है. बूथ से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठन और कार्यकर्ताओं को गोलबंद करने में लगे हैं. दिगर की बात यह है कि पूरा विपक्षी महकमा भाजपा को शिकस्त देने के लिए दम-खम लगा रहा है. महागठबंधन की नींव मजबूत करने में जूटे हैं. लेकिन हाल के दिनों में दो पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी और हेमंत सोरेन की नजदीकियां कांग्रेस को सोचने पर मजबूर कर दी है.

महागठबंधन में नये प्लॉट के कयास

राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह भी है कि बाबूलाल और हेमंत की नजदीकियां महागठबंधन के नये प्लॉट की ओर है. इसमें राजद भी शामिल हो सकता है. झामुमो का तर्क है कि लोकसभा सीटों के बंटवारे के साथ विधानसभा सीटों का भी बंटवारा होना चाहिए. चर्चा यह भी है कि झामुमो विधानसभा चुनाव में 35 से अधिक सीटों पर दावा कर रहा है.

जबकि कांग्रेस तीन राज्यों में पार्टी जीत और झारखंड में कोलेबिरा उपचुनाव में मिली जीत को लेकर उत्साहित है और महागठबंधन का नेतृत्व करना चाह रही है. चर्चा यह भी है कि कांग्रेस के दावे के कारण झामुमो, झाविमो और राजद महागठबंधन के नये प्लॉट की नींव जल्द रख सकते हैं.

गठबंधन में बड़े नेताओं की दावेदारी पेंच की बड़ी वजह

गठबंधन में बड़े नेताओं की दावेदारी पेंच की बड़ी वजह है. हालांकि, विपक्षी दल संयुक्त रूप से चुनाव लड़ने का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन झारखंड मुक्ति मोर्चा कम सीटों की दावेदारी कर गठबंधन के साथ चलने के मूड में तो है लेकिन विधानसभा में उसे अधिक से अधिक सीटों की दरकार है. चर्चा यह भी है कि कांग्रेस महागठबंधन को लीड करना चाहती है. इस वजह से वह भी अधिक से अधिक सीटों पर दावा ठोकने के मूड में है.

पहले क्या था फॉर्मूला, अब क्या है

राजनीतिक जानकारों की मानें, तो पहले कांग्रेस लोकसभा की सात सीटों पर दावेदारी कर रही थी. झामुमो को चार सीट देने पर सहमति बनी थी.  झारखंड विकास मोर्चा को दो सीट देने की बात सामने आई थी. राजद के लिए एक सीट रखा गया था. लेकिन बदलते परिवेश में अगर झाविमो, झामुमो और राजद का गठबंधन होता है तो राजद दो, झामुमो सात, वामदल एक और झाविमो चार सीटों पर बात बनेगी. अगर झामुमो गठबंधन से अलग हुआ तो कांग्रेस को आठ, जेवीएम को तीन, वामदल को एक और राजद को दो सीट मिल सकती है.

कब-किस पार्टी ने जीता चुनाव

13वीं लोकसभा चुनाव में जेएमएम का हुआ सफाया

1999 में हुए 13वीं लोकसभा के चुनाव में राज्य की 14 सीटों से झारखंड नामधारी दलों का सफाया हो गया था. झारखंड मुक्ति मोर्चा एक भी सीट नहीं जीत सका. भारतीय जनता पार्टी ने धनबाद, हजारीबाग, रांची, गिरिडीह, जमशेदपुर, सिंहभूम, खूंटी, लोहरदगा, पलामू, गोड्डा, दुमका की सीट जीती थी. वहीं दो सीटों पर कांग्रेस जिसमें कोडरमा और राजमहल है एवं एक सीट पर चतरा से आरजेडी ने चुनाव जीता था.

भाजपा को 14वीं लोकसभा चुनाव में एक सीट हाथ लगी

2004 में 14वीं लोकसभा चुनाव में राज्य से बीजेपी का लगभग सफाया हो चुका था. बीजेपी मात्र एक सीट पर ही चुनाव जीत पायी और उस जीत का कारण यूपीए से अलग रखी गयी पार्टी माले बनी. कोडरमा सीट से बाबूलाल मरांडी ने चुनाव जीता था. झारखंड मुक्ति मोर्चा 211712 मत लाकर दूसरे स्थान पर रहा. वहीं, सीपीआई एमएल के उम्मीदवार राजकुमार यादव 136554 वोट लाकर तीसरे स्थान पर रहे. अगर यूपीए फोल्डर में माले भी शामिल होती, तो संभवत: 14वीं लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को झारखंड से कोई सीट नहीं मिलती.

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने चार सीटों पर चुनाव जीता, जिनमें राजमहल, दुमका, गिरिडीह और जमशेदपुर की सीटें रहीं. कांग्रेस ने छह सीटों पर जीत दर्ज की, जिनमें गोड्डा, धनबाद, रांची, लोहरदगा, की सीटें भी शामिल थीं. वहीं राष्ट्रीय जनता दल ने दो सीटों पर विजय प्राप्त की, जिनमें चतरा और पलामू सीट शामिल थीं. जबकि सीपीआई हजारीबाग सीट पर विजयी हुई.

15वीं लोकसभा में दो निर्दलीय उम्मीदवार जीते

2009 में 15वीं लोकसभा के लिए हुए आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने आठ सीटों पर विजय हासिल की थी. जिनमें राजमहल, गोड्डा, गिरिडीह, धनबाद, जमशेदपुर, खूंटी, लोहरदगा एवं हजारीबाग की सीटें थीं. वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा ने दो सीटों पर चुनाव जीता था, जिसमें दुमका और पलामू की सीट शामिल थी.

झारखंड विकास मोर्चा ने कोडरमा सीट से और कांग्रेस ने रांची सीट पर विजय हासिल की थी. दो निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी चुनाव जीता था, जिनमें चतरा सीट से इंदर सिंह नामधारी और सिहंभूम सीट से मधु कोड़ा निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीते थे.

16वीं लोकसभा चुनाव में राज्य से कांग्रेस का सफाया

2014 में 16वीं लोकसभा का चुनाव भाजपा के लिए बेहतर साबित हुआ. इसमें मोदी लहर ने तो कांग्रेस का सफाया ही कर दिया. हालांकि झारखंड मुक्ति मोर्चा अपनी दो सीटें बचाने में कामयाब रहा. राजमहल और दुमका सीट से झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार जीते. वहीं, बाकी 12 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों ने चुनाव में जीत हासिल की.

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