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लोकसभा चुनाव: सिंहभूम सीट पर 14 वर्ष का वनवास तोड़ेगी कांग्रेस या फिर खिलेगा कमल

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  • हाल में शामिल हुईं गीता कोड़ा के सहारे कांग्रेस करना चाहती है नैया पार
  • अंतिम बार 2004 में कांग्रेस जीती थी सिंहभूम संसदीय चुनाव

Nitesh ojha

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने महागठबंधन में रहते हुए राज्य की कुल 7 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है. इन 7 सीटों में रांची, धनबाद, हजारीबाग, सिंहभूम, खूंटी, चतरा और लोहरदगा संसदीय क्षेत्र शामिल हैं. सिंहभूम सीट पर चुनाव में इस बार का मुकाबला काफी दिलचस्प माना जा रहा है. जहां कांग्रेस जानती है कि महागठबंधऩ में रहते हुए इस बार के लोकसभा चुनाव में पार्टी को सबसे ज्यादा फायदा चाईबासा सीट पर ही होगा. इस संसदीय सीट पर जगन्नाथपुर विधायक गीता कोड़ा को प्रत्याशी बना कर पार्टी अपनी जीत सुनिश्चित करना चाहेगी. पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की पत्नी और जय भारत समानता पार्टी से विधायक बनीं गीता कोड़ा हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुई थीं. सूत्रों के मुताबिक गीता कोड़ा ने सिंहभूम सीट पर चुनाव लड़ने की शर्त पर कांग्रेस की सदस्यता ली थी. वहीं महागठबंधन में शामिल होने से कांग्रेस को इसबार जेएमएम और जेवीएम का भी समर्थन हासिल है. हालांकि जेएमएम विधायकों के विरोध को देख कांग्रेस के लिए यह राह आसान भी नहीं है. इससे पहले कांग्रेस ने इस सीट पर 2004 में अंतिम बार चुनाव जीता था. दूसरी और भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा पर विश्वास जताते हुए एक बार उन्हें यहां से प्रत्याशी बनाया है. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि महागठबंधन के सहयोगी दलों और पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के समर्थन से कांग्रेस क्या इसबार सिंहभूम संसदीय सीट पर अपने 14 वर्ष के वनवास को खत्म करने में सफल हो पाएगी. या एक बार फिर यहां भाजपा का कमल लहरायेगा.

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भाजपा ने झोंकी ताकत

कोल्हन क्षेत्र में कांग्रेस की संभावित प्रत्याशी गीता कोड़ा और भाजपा के लक्ष्मण गिलुवा के बीच का मुकबला कई कारणों से दमदार माना जा रहा है. एक तरफ प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा के लिए पार्टी ने यहां पूरी ताकत झोंक दी है. वही कांग्रेस चाहती है कि प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय के नेतृत्व में पार्टी 14 साल के बाद एक बाऱ फिर चाईबासा संसदीय क्षेत्र में चुनाव जीते. सिंहभूम में फिर से अपना वजूद तलाश रही कांग्रेस इस बार विधायक गीता कोड़ा के सहारे चुनावी नैया पार लगाना चाह रही है. सिंहभूम सीट पर कांग्रेस ने अब तक कुल 4 (1984, 1989, 1998 और 2004 में) बार चुनाव जीत दर्ज की है. जबकि भाजपा को कुल 3 बार जीत मिली है.

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2014 के चुनावी मत को देखने से भी कांग्रेस का पलड़ा है भारी

बात अगर 2014 के लोकसभा चुनाव में मिले मतों की करें, तो इससे भी कांग्रेस का पलड़ा भारी दिख रहा है. इस चुनाव में मोदी लहर के दौरान भाजपा प्रत्याशी लक्ष्मण गिलुवा को कुल 303,131 मत मिले थे. वहीं दूसरे स्थान पर रही जयभारत समानता पार्टी प्रत्याशी गीता कोड़ा (अब कांग्रेस में विलय) को 215,607 मत मिले थे. तीसरे स्थान पर रही कांग्रेस के चितरंजन किस्कू को (कुल 111,796 मत) और झाविमो प्रत्याशी दशरथ गंगरई (कुल 35,681 मत) चौथे स्थान पर थे. अगर महागठबंधन में शामिल दलों के मतों को मिला दें, तो कांग्रेस की संभावित प्रत्याशी गीता कोड़ा को कुल 3,63,084 मत मिलते दिखता है, जो कि भाजपा प्रत्याशी से करीब 60,000 वोट ज्यादा है.

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जेएमएम विधायकों के विरोध से कांग्रेस के लिए आसान नहीं है डगर

हालांकि सिंहभूम संसदीय क्षेत्र कांग्रेस के हाथों में जाने की नाराजगी जेएमएम विधायकों पर भी खुल कर सामने आ रही है. गत 18 मार्च को इस लोकसभा क्षेत्र अंतर्गत जेएमएम विधायकों ने पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष शिबू सोरेन और कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन से मुलाकात कर पार्टी के ही किसी प्रत्याशी को ही टिकट देने की पेशकश की थी. इनका कहना था कि सिंहभूम सीट को भाजपा से छीनने की शक्ति सिर्फ जेएमएम के पास ही है. जबकि जगन्नाथपुर विधानसभा गीता कोड़ा के पास है. गीता कोड़ा ने कांग्रेस से अलग रहते हुए यह सीट जीती थी. जबकि कुछ माह पहले ही उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ली है. इसके अलावा चाईबासा से जेएमएम विधायक दीपक बिरूआ ने कुछ दिन पहले मधुकोड़ा के बहाने कांग्रेस को घेरा था. उन्होंने कहा कि कांग्रेस देश की चौकीदार पर चोर होने का आरोप लगाती है. जबकि पार्टी में शामिल गीता कोड़ा की पत्नी और राज्य के पूर्व सीएम मधु कोड़ा पर साढ़े चार हजार करोड़ घोटाला का आरोप लग चुका है. ऐसे में जब उनकी विधायक पत्नी गीता कोड़ा सिंहभूम सीट से कांग्रेस की संभावित प्रत्याशी बनती हैं, तो कांग्रेस जनता को क्या जवाब देगी. पार्टी उन पर भी सवाल खड़ा कर सकती है.

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