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लोहरदगाः मुखबिर बता कर नक्सलियों ने की एक व्यक्ति की हत्या

पिछले एक साल के दौरान हो चुकी है 23 मुखबिरों की हत्या

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Lohardaga: एक बार फिर से नक्सलियों ने अपनी उपस्थिति झारखंड में दर्ज करवानी शुरू कर दी है. लंबे समय से शांत रहने के बाद माओवादियों के एक बार फिर से घटनाओं को अंजाम देना शुरू कर दिया है. लोगों में दहशत का माहौल पैदा कर नक्सली एक बार फिर से अपनी पैठ बनाने की फिराक में लगे हुए हैं. इसी दौरान एक और घटना सामने आयी है.

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सुदूरवर्ती नक्सल प्रभावित पेशरार थाना क्षेत्र के बुलबुल गांव में भाकपा माओवादी नक्सली संगठन के जोनल कमांडर रविंद्र गंझू के दस्ते ने दिलीप भगत नाम के एक ग्रामीण की गोली मार कर हत्या कर दी है. पुलिस मुखबिरी के आरोप में ग्रामीण की हत्या की गयी है.

यह घटना शुक्रवार देर रात की है. घटनास्थल घोर नक्सल प्रभावित और सुदूरवर्ती जंगली क्षेत्र होने की वजह से पुलिस को शनिवार को इस मामले की जानकारी हुई है. इसके बाद पुलिस शव की बरामदगी और आगे की कार्रवाई में जुट गई है. वहीं घटना के बाद लोगों में दहशत का माहौल व्याप्त है.

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दिलीप भगत को मिल रही थी नक्सलियों से धमकी

दिलीप भगत को नक्सलियों से लगातार धमकी मिल रही थी. इस वजह से वह पेशरार थाना में ही शरण लिये हुए था. पिछले चार-पांच दिनों से अपने गांव गया हुआ था. इसी दौरान यह घटना हो गयी. अब पुलिस मामले की जांच कर रही है. बताया जा रहा है कि दिलीप एसपीओ भी था, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो पायी है.

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पिछले एक साल में नक्सलियों ने की 23 लोगों की हत्या

पुलिस को चप्पे-चप्पे की खबर मिले, इसलिए पुलिस मुखबिरों का सहारा लेती है. नक्सली गतिविधि और दूसरी ऐसी खबरों के बदले पुलिस की तरफ से मुखबिरों को कुछ इनाम भी मिलता है.

इनाम में क्या और कितना मिलता है, यह भी सरकार के रिकॉर्ड में नहीं होता. नक्सली इलाकों में मुखबिरों की ही वजह से पुलिस को कई बार बड़ी कामयाबी मिलती है. लेकिन इस बात की जानकारी नक्सलियों को अगर हो जाती है, तो फिर वो खबर देनेवाले मुखबिर से बदला जरूर लेते हैं.

झारखंड में पिछले 1 साल के दौरान पुलिस का मुखबिर बता कर 23 लोगों की नक्सलियों ने हत्या कर दी. जिनमें रांची में 3, चाईबासा में 4, खूंटी में 5, सिमडेगा में 4 , गिरिडीह में 4 , लोहरदगा में 1 और चतरा में 2 लोगों की हत्याएं शामिल हैं. नक्सलियों का कहना है कि पुलिस की मुखबिरी करनेवाले लोगों को खोज कर सजा दी जायेगी.

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