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लोहरदगाः अंतिम यात्रा के लिए भी करनी पड़ती है मशक्कत, सड़क की हालत बदत्तर

सालों से मुक्तिधाम जानेवाली सड़क का नहीं हुआ जीर्णोद्धार

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Lohardaga: किसी अपने को खोने का दर्द वही समझ पाता है, जिसने उसे खोया हो. लेकिन परिजन की मौत और उनकी अंतिम यात्रा किसी भी शख्स, परिवार या समाज के लिए बहुत भारी होती है. एक तो अपने को खोने का गम लिए लोग भारी मन से शव यात्रा के लिए जाते हैं. ऊपर से शहर के मुक्तिधाम की उपेक्षा इनके दर्द को और बढ़ा देती है. दरअसल, श्मशान घाट जानेवाली सड़क इस कदर जर्जर है कि लोगों को भय लगा रहता है कि कहीं अर्थी और शव लिए लोग गिर ना जाये.

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प्रशासन नहीं ले रहा सुध

श्मशान जाने वाली सड़क की हालत बद्दतर है. हालात ये है कि श्मशान जाने में लोग कांप उठते हैं. लोगों को श्मशान जाने के लिए कीचड़ और गड्ढों से होकर गुजरना पड़ता है. डर सताता है कि कहीं लोग अर्थी और शव के साथ न गिर पड़े.

सड़क की हालत को लेकर न तो प्रशासन का ध्यान है और न ही सरकारी तंत्र का. लोगों में इस बात को लेकर आक्रोश है कि जब मुक्तिधाम के प्रति कोई ध्यान देने वाला नहीं है तो विकास की बात तो बेमानी है.

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कहीं शव ही ना गिर जाये !

सड़क की ये दूर्दशा इस बारिश में नहीं हुई. पिछले कई सालों से हालत ऐसी ही है. हर बार चुनाव के समय मुक्तिधाम में सुविधाओं और सड़क को लेकर वादे तो खूब होते हैं, पर स्थिति आज भी जस की तस है. समस्या को लेकर धार्मिक संगठनों की ओर से भी कोई बोलने वाला नहीं है. बरसात के समय तो मुक्तिधाम को जाने वाली आधी किलोमीटर की सड़क तो जैसे मुसीबत बन जाती है. लगता है कि अब गिरे की तब गिरे.

जिले में विकास का सच बताने के लिए मुक्तिधाम की ये सड़क काफी है. वही संपन्न लोगों द्वारा भी व्यक्तिगत स्तर से सड़क निर्माण की दिशा में पहल ना होना सामाजिक स्तर पर सवाल खड़े करता है.

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