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लोहरदगा डीएसई : गाइडलाइन को तिलांजलि दे बनाया प्रभारी प्राचार्य, सेवानिवृत्ति का लाभ देने में भी मनमानी

नियम विरुद्ध काम करने का आरोप, हाई कोर्ट भी इस मुद्दे पर कर चुका है टिप्पणी

Ranchi : लोहरदगा जिला शिक्षा पदाधिकारी अखिलेश चौधरी पर नियम विरुद्ध काम करने का मामला संज्ञान में आया है. इन पर शिक्षा विभाग के निर्देश के विरुद्ध जा कर प्रभारी प्राचार्य बनाने, विभागीय कार्य में मनमानी करने की बात भी सामने आ रही है. इनके इस रवैये पर दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल के क्षेत्रीय उपशिक्षा निदेशक अरविंद विजय बिलुंग द्वारा दो बार स्पष्टीकरण पूछा गया है. इसके बाद भी इन्होंने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया है. इसे लेकर अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने इनपर विभागीय कार्रवाई करने की मांग की है.

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क्या है मामला

लोहरदगा डीएसई पर जो आरोप लगाये जा रहे हैं उसके मुताबिक यह है कि शिक्षा सचिव राजेश शर्मा ने उच्च एवं उत्क्रमित उच्च विद्यालयों में प्रभारी प्राचार्य बनाने को लेकर निर्देश दिया गया है. इसके अनुसार स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों में से न्यूनतम पांच वर्षों का अनुभव रखने वाले शिक्षकों में से चयनित नाम क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक को भेजना है. इनकी अनुमति के बाद प्राचार्य का प्रभार दिया जाना है लेकिन लोहरदगा डीएसई ने ऐसा नहीं किया. उन्होंने बिना क्षेत्रीय उपशिक्षा निदेशक की अनुमति के दो से तीन वर्ष मात्र की सेवानुभव वाले शिक्षकों को प्रभारी बना दिया.

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इसके अतिरिक्त मध्य विद्यालय लोहरदगा के प्रभारी के संबंध में झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश द्वारा यथास्थिति बनाए रखने के आदेश को भी अखिलेश चौधरी द्वारा आज तक अनुपालन नहीं कराया गया.

इनपर यह भी आरोप लगाये गये हैं कि विभागीय कार्यों को निष्पादित करने में भी इनके द्वारा हमेशा ही मनमानी की जाती है. सेवानिवृत होने वाले शिक्षकों के सेवानिवृति लाभों के भुगतान में समय पर इनके द्वारा कार्य शुरू तक नहीं किया जाता है. शिक्षकों द्वारा अपने कार्यों को निष्पादित करने की मांग करने पर उन्हें धमकाने की नियत से अनर्गल तथ्य बनाकर उनसे शो कॉज कर प्रताड़ित भी किया जाता है.

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क्या कहते हैं लोहरदगा डीएसई

लोहरदगा जिला शिक्षा पदाधिकारी अखिलेश चौधरी का कहना है कि ऐसे आरोप व्यक्ति विशेष द्वारा लगाया जा रहा है. अधिकारिक दवाब बना कर काम कराने की कोशिश की जा रही है. जहां तक रही बात उच्च अधिकारियों के पत्र और स्पष्टीकरण का, तो उन्हें जवाब दिया जा रहा है.

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