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लोहरदगा: फिर से पकड़ बनाने की कोशिश में भाकपा माओवादी,  संगठन में शामिल होने के लिए बनाया जा रहा दबाव  

Ranchi : लोहरदगा में फिर से पकड़ मजबूत बनाने के लिए प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी की ओर से कोशिश की जा रही है. नक्सलियों द्वारा लोहरदगा जिले में एक के बाद एक घटना को अंजाम देकर  उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश की जा रही है.

बताया जा रहा है कि ग्रामीणों को धमकाकर संगठन में शामिल होने के लिए दबाव बनाया जा रहा है. लेकिन गांवों में आयी जागरूकता की वजह से नक्सलियों को उनके मंसूबे में कामयाबी नहीं मिल पा रही है. इसलिए नक्सलियों की ओर से इलाके में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए कई घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है.

लोहरदगा में नक्सलियों के निशाने पर हैं ग्रामीण

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लोहरदगा में नक्सलियों के निशाने ग्रामीण हैं. बता दें कि पिछले एक वर्ष के दौरान नक्सलियों के द्वारा प्लांट किये गये लैंडमाइंस की चपेट में कई निर्दोष ग्रामीण आ चुके हैं. इस वर्ष जनवरी से लेकर अब तक लोहरदगा में लैंडमाइंस की चपेट में करीब 11 से अधिक निर्दोष ग्रामीण आ चुके हैं. जिनमें दो की मौत हो गयी. यह भी बता दें कि लोहरदगा में कुख्यात नक्सली रविन्द्र गंझू का दस्ता सक्रिय है.

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भौगोलिक स्थिति का फायदा उठा रहा है माओवादियों का दस्ता

लोहरदगा-गुमला और लातेहार जिले के ज्यादातर हिस्सों में जंगल और पहाड़ होने से माओवादियों को छिपने में मदद मिलती है. माओवादियों का दस्ता क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर बचने में कामयाब रहा है. माओवादियों द्वारा सुरक्षाबल को नुकसान पहुंचाने के लिए लैंडमाइन लगाने की कार्रवाई भी की जा रही है. इसकी चपेट में निर्दोष ग्रामीण भी आ रहे हैं.

बॉक्साइट ट्रकों के बंद होने से तिलमिलाये हुए हैं नक्सली

लोहरदगा में बॉक्साइट ट्रकों की बंदी की वजह से नक्सली तिलमिलाये हुए हैं. बॉक्साइट ट्रकों के परिचालन की स्थिति में नक्सली काफी हद तक आर्थिक दोहन के लिए सक्रिय रहते थे. हाल के समय में बॉक्साइट ट्रकों का परिचालन बंद होने से नक्सलियों को लेवी नहीं मिल रही है. जिस वजह से नक्सली एक के बाद एक घटनाओं का अंजाम देकर दहशत फैलाने का काम कर रहे हैं.

सैलानियों की सुरक्षा पर लगा प्रश्न चिह्न

नववर्ष 2020 के कुछ दिन पूर्व ही लैंडमाइंस ब्लास्टिंग ने सैलानियों की सुरक्षा पर प्रश्न चिह्न लग दिया है. सैलानियों के लिए पेशरार, केकरांग झरना व लावापानी पिकनिक स्थल सबसे पसंदीदा है. मंगलवार को भी कुछ सैलानी लावापानी को केकरांग होकर जा रहे थे. परंतु घटनास्थल केकरांग झरना से ही बैरंग वापस लौट गये.

ज्ञात हो कि 15 से 20 दिनों के अंतराल में दो बम विस्फोट का मामला सामने आया है. ऐसे में ग्रामीण व सैलानी कैसे सुरक्षित हैं, यह सवाल है. 15 दिन पूर्व ही लोहरदगा लातेहार बॉडर बुलबुल में भी बम विस्फोट हुआ था. जिसमें एक ग्रामीण की मौत हो गयी थी और कई घायल हुए थे.

10 लाख का इनामी कुख्यात नक्सली रविन्द्र गंझू बना है चुनौती

भाकपा माओवादी संगठन का जोनल कमांडर और 10 लाख का इनामी कुख्यात नक्सली रविन्द्र गंझू लोहरदगा, गुमला और लातेहार जिले में पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है. पुलिस रविंद्र गंझू के खिलाफ लगातार अभियान भी चलाती है, इसके बावजूद भी पुलिस के हाथ से वह बार-बार बचकर निकल जाता है.

इन तीनों जिलों में नक्सली गंझू का खौफ ऐसा है कि विकास कार्य में लगी कंपनियों, कारोबारियों से वो लेवी वसूलने का काम करता है. और लेवी नहीं देने पर हत्या और आगजनी जैसी घटना का अंजाम देता है.

 हाल के महीने में जिले में हुई कुछ नक्सल घटनाएं

  • 12 दिसंबर 2019:  लोहरदगा लातेहार बॉडर बुलबुल में भी बम विस्फोट हुआ था, जिसमें एक ग्रामीण की मौत हो गयी.
  • 24 दिसंबर 2019:  लोहरदगा जिले के सुदूरवर्ती बगड़ू थाना क्षेत्र के केकरांग झरना के समीप मंगलवार की सुबह करीब 9 बजे आईईडी विस्फोट में एक बच्ची की मौत हो गयी और कई लोग घायल हो गये.
  • 23 दिसंबर 2019:  किस्को थाना क्षेत्र में नक्सलियों ने सड़क निर्माण कार्य में लगे दो जेसीबी मशीन को आग के हवाले कर दिया था.
  • 23 मार्च 2018: लोहरदगा-गुमला जिले के सीमावर्ती सेरेंगदाग थाना क्षेत्र के चपाल चिलम टोंगरी में भाकपा माओवादी नक्सली संगठन के जोनल कमांडर रवींद्र गंझू के दस्ते के साथ मुठभेड़ हुई थी.
  • 30 नवंबर 2018: लोहरदगा जिले के सुदूरवर्ती जोबांग और चंदवा थाना क्षेत्र के सीमावर्ती बिरजंघा जंगल-तलसा जंगल में भाकपा माओवादी नक्सली संगठन के रविन्द्र गंझू के दस्ते और लोहरदगा पुलिस के बीच जबरदस्त मुठभेड़ हुई थी.
  • 8 दिसंबर 2018: लोहरदगा किस्को थाना क्षेत्र के भूसाखाड़ जंगल में शनिवार शाम माओवादी कमांडर रवींद्र गंझू के दस्ते और पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई थी.
  • 16 मार्च 2019: लोहरदगा-गुमला बॉर्डर के पेशरार के जंगल के उलिगांव के पास सुरक्षा बलों और नक्सली की मुठभेड़ हुई. ये मुठभेड़ माओवादी रविंद्र गंझू के दस्ते के साथ हुई थी. दोनों ओर से हुई गोलीबारी में सुरक्षा बल को भारी पड़ता देख माओवादी भाग निकले.
  • 2 अगस्त 2019: लोहरदगा जिले के घोर नक्सल प्रभावित पेशरार थाना क्षेत्र के लोहड़ी पहाड़ में रवींद्र गंझू के दस्ता के साथ मुठभेड़ हुई थी.

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