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अज्ञात बीमारी से तिल-तिल कर मर रहा मासूम, कमर के नीचे का पूरा हिस्सा हुआ बेजान

पैसे के अभाव में इलाज नहीं करा पा रहे परिजन

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Lohardaga: लोहरदगा के किस्को प्रखंड का रहने वाला 12 साल का चंगू उरांव एक साल पहले तक अन्य बच्चों की तरह ही मस्ती की जिंदगी जी रहा था. वह राजकीय मध्य विद्यालय कोचा में नियमित रूप से पढ़ने जाता था. अन्य बच्चों की तरह ही पढ़ाई करता, खेलता- कूदता और घर वापस चला जाता था. साल भर पहले चंगू को किसी अज्ञात बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया, जिससे कमर के नीचे का उसका पूरा हिस्सा बेजान हो गया. न तो वह चल पाता है और न ही कमर हिला पाता है. घर के कमरे में बस लेटा रहता है.

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रिम्स ने भी खड़े किए हाथ

चंगू के पिता राजकुमार उरांव और मां जाटो उरांव बेहद गरीब हैं. बेटे की हालत पर आंसू बहा रहे हैं. उन्होंने चंदू का इलाज अपने स्तर से कराने का प्रयास किया. यहां तक कि रांची के रिम्स तक ले कर गए, पर बीमारी का पता ना चल सका. थक हार कर बेटे को ऊपर वाले के भरोसे छोड़ दिया है. बड़ी बात यह है कि गांव-गांव में स्वास्य्ा सुविधा का दावा करने वाली सरकार के तंत्र को इस बच्चे की सुध लेने की फुर्सत नहीं है.

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विद्यालय के शिक्षकों ने की मदद

अब घर के बंद कमरे में ही चंगू की जिंदगी सिमट कर रह गई है. विद्यालय के शिक्षक कबीरउद्दीन अंसारी और उनके मित्र नवनीत गौड़ को जब यह जानकारी हुई तो उन्होंने अपने स्तर से बच्चे के बीमारी और आर्थिक स्थिति को लेकर प्रयास किया. लोगों से सहयोग और पहल का अनुरोध किया है. माता-पिता को अब किसी चमत्कार और भगवान का इंतजार है.

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असाध्य रोगों के इलाज के लिए सरकारी मदद का प्रावधान

असाध्य रोगों के इलाज के लिए सरकार की ओर से मदद का प्रावधान है, लेकिन इस परिवार को अब तक कोई मदद नहीं मिली है. परिवार को इस बात की जानकारी भी नहीं है कि उन्हे कैसे सरकारी मदद मिल सकती है. हालांकि परिवार वालों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मदद की गुहार लगाई है, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उन्हे किसी तरह की मदद नहीं मिली है.

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