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मुख्यमंत्री आवास घेरेंगे वित्त रहित शिक्षाकर्मी

अनुदान में कटौती का विरोध, घाटा अनुदान या अधिग्रहण की मांग

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  • राज्य में 20 हजार वित्त रहित शिक्षक और शिक्षा कर्मी हैं कार्यरत
  • हर साल चार लाख विद्यार्थी वित्त रहित शिक्षण संस्थानों से पढ़ कर निकलते हैं
  • शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर मनमानी का आरोप लगाया

Lohardaga:  वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के सदस्य और इंटर शिक्षक शिक्षकेतर कर्मचारी महासंघ के प्रदेश महासचिव अरविंद कुमार सिंह ने लोहरदगा एमएलए महिला कॉलेज सहित कई शिक्षण संस्थानों का दौरा कर शिक्षकों के साथ बैठक की. इसमें सरकार द्वारा अनुदान में कटौती के मुद्दे पर आक्रोश जताते हुए पांच अक्टूबर को मुख्यमंत्री आवास घेराव का निर्णय लिया गया. वित्त रहित शिक्षण संस्थानों के अधिग्रहण या घाटा अनुदान सरकार दोनों में से एक विकल्प अपनाये, अन्यथा व्यापक आंदोलन करने की चेतावनी संगठन ने दी है. झारखंड सरकार द्वारा मांगें नहीं मानी गईं तो नवंबर में नई दिल्ली में आंदोलन होगा. प्रधानमंत्री, भाजपा केंद्रीय अध्यक्ष, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के आवास का घेराव शिक्षक शिक्षकेतर कर्मी करेंगे.

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20 हजार शिक्षक-शिक्षकेतर कर्मी करेंगे आंदोलन

श्री सिंह ने कहा कि राज्य के 20 हजार शिक्षक-शिक्षकेतर कर्मी सरकार के अन्याय के खिलाफ आंदोलन में खड़े होंगे. आगामी चुनाव में सरकार के खिलाफ प्रचार करेंगे. श्री सिंह ने कहा कि सभी शिक्षण संस्थानों ने अनुदान नहीं लेने का निर्णय लिया है. अनुदान नियमावली के मुताबिक 85 करोड़ का अनुदान दिया जाना था. विभागीय सचिव की मनमानी के कारण इसे घटा कर 42 करोड़ कर दिया गया है. अनुदान के पहले जांच होती है फिर इसके बाद जांच का क्या औचित्य है. भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का एक जरिया है. अधिकारी की मनमानी की वजह से ही वित्तीय वर्ष 2017-18 का अनुदान लैप्स हो गया था. मुख्यमंत्री के पीत पत्र को भी अधिकारी महत्व नहीं दे रहे.

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समान कार्य के लिए समान वेतन क्यों नहीं ?

पूरे राज्य के वित्त रहित शिक्षण संस्थान हर साल चार लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए तैयार करते हैं. जब समान कार्य के लिए समान वेतन कानून है तो वित्त रहित शिक्षण संस्थानों के कर्मियों के साथ अन्याय क्यों. शिक्षा क्षेत्र में इनका योगदान कमतर नहीं है. शिक्षण के अलावा तमाम तरह के सरकारी कार्यों में इनका योगदान होता है.

वित्त रहित शिक्षण संस्थानों को बंद करने की साजिश विभागीय अधिकारी कर रहे हैं. तमाम वित्त रहित शिक्षा संस्थानों ने अनुदान की पूरी राशि नहीं देने पर अनुदान नहीं लेने का निर्णय लिया है. यह भी मांग की है कि शिक्षक शिक्षकेतर कर्मचारियों के खाते में ही अनुदान की राशि दी जाए. राज्य की सभी इंटर कॉलेज, स्थापना अनुमति प्राप्त उच्च विद्यालय, संस्कृत और मदरसा इस आंदोलन में एक साथ हैं.

एमएलए महिला कॉलेज में बैठक के दौरान प्रिंसिपल प्रो शमीमा खातून, डॉ शशिप्रभा अग्रवाल, राजकिशोर प्रसाद, मंजू खत्री, गीता प्रसाद, मधुबाला अग्रवाल, शशि कुमारी गुप्ता, टाना भगत इंटर कॉलेज घाघरा के शिक्षक व मोर्चा के उपाध्यक्ष अरशद मोमिन इस मौके पर मौजूद थे.

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