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Lockdown_Effect :  2 लाख मछुआरों पर बिछाया आफत का जाल, 7000 मीट्रिक टन तक घट गया मछली पालन

Ranchi : लॉकडाउन ने मछुआरों के सामने आफत का जाल बिछा दिया है. डैम, तालाबों में जाल लगाकर रोजी-रोटी कमाने का काम चुनौती भरा दिखने लगा है.

50 दिनों से अधिक हो चुके लॉकडाउन में अब तक मछलियों का उत्पादन 7000 एमटी से भी अधिक घट चुका है. ऐसे में मछली के भरोसे जीने वाले 10 लाख लोगों के सामने कठिन चुनौती खड़ी होने लगी है.

इससे मछली उत्पादन का लक्ष्य भी इस साल पूरा नहीं हो पाया. आगे भी उत्पादन लक्ष्य प्रभावित होने की आशंका है.   

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2 लाख 30 हजार एमटी का उत्पादन

मत्स्य विभाग के अनुसार 2019-20 में 2 लाख 30 हजार एमटी (मीट्रिक टन) तक मछली के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था. फ़रवरी 2020 तक फिश प्रोडक्शन की गति ठीक थी. मार्च में लॉकडाउन शुरू होने के साथ ही मछली उत्पादन से जुड़े काम ठप हो गए.

केंद्र सरकार की पहल पर 20 अप्रैल से कृषि, पशुपालन संबंधी कार्यों के लिए अनुमति मिली. पर मछुआरों को इसका लाभ उठाने में चुनौती बनी रही. ऐसे में लॉकडाउन के बाद से अब तक 7 हजार एमटी की कमी हो चुकी है. इससे इस साल मछली उत्पादन का टारगेट पूरा नहीं हो सका है. इस बार यह आंकड़ा 2 लाख 23 हजार तक ही सिमट कर रह गया है.

विभाग के मुताबिक मत्स्य उत्पादन के भरोसे लगभग 2 लाख परिवार रोजी रोटी कमाते हैं. इसके अलावा 7500 मत्स्य मित्र भी हैं. उन्हें उम्मीद है कि लॉकडाउन ख़त्म होने के बाद से मछली उत्पादन में सुधार का माहौल बनना शुरू होगा.  

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कोरोना खौफ से अब निकलने लगे मछुआरे

मत्स्य निदेशक डॉ एच.एन द्विवेदी के अनुसार 20 अप्रैल से मछली कारोबार से जुड़े लोगों को राहत मिलनी शुरू हुई थी. हालांकि मछुआरे और उनके परिजन खुद भी कोरोना खौफ के कारण तालाबों तक जाने से बच रहे थे. यह स्थिति अब भी कुछ जगहों पर है.

ऊपर से लोकल थाना से उन्हें मछली बेचे जाने या बाहर भेजे जाने के मामले में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था. फिर विभाग के स्तर से डीजीपी और पुलिस प्रशासन से सहयोग मांगा गया. फ़िलहाल मछली विक्रेताओं, कारोबारियों को अब राहत मिलने लगी है.

कई जगहों पर लोग अब मछली मारने, बेचने के काम में लग गये हैं. धनबाद, बोकारो और दूसरे कई जगहों से मछलियां दूसरे जिलों और राज्यों में भेजी जाने लगी हैं.

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