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#LockDown21 : बड़े शहर से पुरुलिया लौटे मजदूरों ने दिखायी जागरुकता, पहले करायी जांच फिर पेड़ों पर चारपाई बांध कर गुजार रहे क्वारंटाइन का समय

Purulia : तेजी से फैलते जा रहे कोरोना वायरस से बचाव के लिए किये गये लॉकडाउन के बीच पश्चिम बंगाल के पुरुलिया से एक ऐसी तस्वीर सामने आयी है जिसे देख कर दुख तो हो रहा है. पर साथ ही उनकी जागरुकता और जज्बे को देख ऐसा लग रहा है कि ऐसी ही कोशिशों से हम कोरोना वायरस को हरा पायेंगे.

यहां कुछ दिन पहले चेन्नई से लौटे मजदूरों के घरों में क्वारंटाइन मतलब एकांतवास के लिए अलग कमरा नहीं  था. अपने परिवार और गांववालों को संक्रमण से बचाने के लिए इन लोगों ने पेड़ों पर रहना ठीक समझा.

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गांववाले पेड़ के नीचे भोजन रख जाते हैं

गांववाले इन्हें खाने के लिए थाली में भोजन पेड़ के नीचे रख जाते हैं और ये पेड़ों से उतर कर खाना लेकर फिर ऊपर चढ़ कर जीवन गुजार रहे हैं.

संक्रमण के खतरे को देखते हुए देश में 21 अप्रैल तक लॉकडाउन लागू है. इस वजह से शहरों में काम कर रह रहे मजदूर अपने गांव वापस लौट रहे हैं.

गांव लौटनेवाले लोगों को सावधानी के तौर पर 14 दिन क्वारंटाइन रहने की सलाह दी जा रही है. पुरुलिया जिले में चेन्नई से लौटे कुछ लोगों ने अपने आपको पेड़ पर क्वारंटाइन किया है.

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पेड़ों पर बांध ली है चारपाई

दरअसल इन लोगों के घरों में सेल्फ आइसोलेशन के लिए अलग से कमरे नहीं हैं. इसलिए उन्हें ऐसा करना पड़ा है. जंगलों में इन लोगों ने पेड़ों पर अपनी चारपाई बांध ली है और वहीं जीवन गुजार रहे हैं. ऐसा करके ये अपनी रक्षा भी कर रहे हैं और गांववालों को भी कोरोना के खतरे से बचा रहे हैं.

पहले अपनी जांच करायी, फिर क्वारंटाइन में गये

चेन्नई से लौटने के बाद गांव में जाने से पहले इन्होंने हेल्थ सेंटर में अपनी जांच करायी है. डॉक्टरों ने 14 दिनों तक होम क्वारंटाइन में रहने की सलाह दी है. इन मजदूरों का कहना है कि इनका घर उन क्षेत्रों में है जहां जंगलों में बड़ी संख्या में हाथी रहते हैं. कई बार हाथियों ने गांव में हमले किये हैं. ऐसे में पेड़ों पर चारपाई बांधकर सोना इनके लिए थोड़ी राहत देनेवाला है. इससे वे जानवरों से भी बच रहे हैं और दूसरे लोगों को कोरोना के खतरे से भी बचा रहे हैं. मजदूरों के परिवार वालों और गांव के लोग मिलजुल कर इनके खाने की व्यवस्था में लगे हैं.

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