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#LockDown21: उर्दू शिक्षकों का फंसा वेतन, छह माह से कर रहे इंतजार

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Ranchi: राज्य के 700 से अधिक उर्दू शिक्षकों का पिछले वित्तीय वर्ष में मिलने वाला वेतन लॉकडाउन की वजह से फंस गया है. इस वजह से राज्य के कई जिलों के उर्दू शिक्षकों को दो से तीन माह तक का वेतन नहीं मिल पाया है. वहीं कई ऐसे भी जिले हैं, जहां अक्टूबर माह से ही वेतन नहीं मिल पाया है. लोग छह महीने से वेतन का इंतजार कर रहे है वहीं कोरोना के प्रकोप में यह मामला और भी देर तक फंसता नजर आ रहा है.

लॉक डाउन की लंबी अवधि की वजह से उर्दू शिक्षकों को काफी परेशानी का सामना पड़ रहा है. दरअसल योजनामद राशि से उर्दू शिक्षकों को वेतन मिलता है, इस वजह से अन्य शिक्षकों की तुलना में उर्दू शिक्षकों के वतन मिलने की प्रक्रिया काफी लंबी है. यही वजह है अक्सर उर्दू शिक्षकों को वेतन मिलने में देर होती है.

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26 मार्च तक थी वेतन मिलने की बात

लॉकडाउन होने से पहले विभागीय सचिव ने 26 मार्च तक राज्य के सभी उर्दू शिक्षकों के वेतन मिलने की बात कही थी, लेकिन इससे पहले ही पूरे देश में लॉकडाउन कर दिया गया जिसकी वजह से वेतन भुगतान की प्रक्रिया रूक गयी.

अब महीने का अंत हो जाने के बाद भी वेतन की उम्मीद नहीं दिख रही है. अगर इस माह भी शिक्षकों को वेतन नहीं मिला तो चार महीने तक का इनका वेतन बकाया हो जायेगा.

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बिना वेतक के कैसे काम संभव होगा: शिक्षक

उर्दू शिक्षकों से मिली जानकारी के अनुसार पाकुड़ जिला में जनवरी से, रांची जिला में फरवरी से, गढ़वा जिला में जनवरी से, चतरा जिला में अक्टूबर से, लोहरदगा में अक्टूबर से, रामगढ़ में जनवरी से उर्दू शिक्षकों का वेतन बकाया है. ऐसे में शिक्षकों का कहना है कि बिना वेतन काम करना कैसे संभव हो पायेगा.

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उन्होंने वेतन बनने की प्रक्रिया के बारे में बताया कि अल्पसंख्यक विद्यालयों के शिक्षकों का वेतन बनकर डीएसइ के पास जाता है. इसके बाद डीएससी हस्ताक्षर कर डीइओ कार्यालय भेजते हैं, फिर डीइओ कार्यालय से वेतन बिल फिर डीएसइ कार्यालय आता है. इसके बाद बिल ट्रेजरी में जमा होता है. शिक्षकों का कहना है कि यह प्रक्रिया इतना पेचिदा होता है कि अक्सर इस वजह से हम शिक्षकों को वेतन मिलने में देर होती है.

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