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#LockDown में वाहनों को जब्त कर मामला दर्ज करना न्यायोचित नहीं: भाकपा

Palamu: कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण लॉकडाउन घोषित है. लॉकडाउन का उल्लंघन करने पर हर दिन वाहन जब्त किये जा रहे हैं और चालान भी काटा जा रहा है.

साथ ही लॉकडाउन का उल्लंघन कर वाहन चलाने के आरोप में चालकों से 24 घंटे अंदर स्पस्टीकरण मांगी जा रही है. जवाब नहीं देने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की तैयारी है. इस मामले को भाकपा ने न्यायोचित नहीं बताया है.

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शोकॉज का जवाब देने में हो रही परेशानी

भाकपा के जिला सचिव रुचिर कुमार तिवारी ने लॉकडाउन के दौरान बाइक चालकों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने की जिला प्रशासन की कार्रवाई की निंदा की है.

उन्होंने ने कहा है कि देश में कोरोना वायरस के कारण प्रधानमंत्री के द्वारा लॉकडाउन का पालन करने को कहा गया है जिसके तहत पलामू जिला में भी लॉकडाउन के दौरान लोगों से घर में रहने की बात कही गयी है.

वहीं जिला प्रशासन द्वारा लॉक‌डाउन तोड़ने वालों के खिलाफ चालान काटा जा रहा है और बाइक मालिकों को 24 घंटे के अंदर स्पष्टीकरण का लिखित जवाब अपर समाहर्ता के कार्यालय में देने को कहा जा रहा है.

इससे आमलोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. क्योंकि इनमें से कई लोग जरूरी काम से बाहर निकले थे वहीं लॉकडाउन की वजह से फिर बाहर निकलकर जवाब देना लोगों के लिए आसान नहीं है.

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प्रशासन का निर्णय तुगलकी 

मालूम हो कि एक तरफ पुलिस लॉकडाउन का पालन कराने के लिए जोर दे रही है. लोगों को घरों में रहने पर जोर दिया जा रहा है. वहीं दूसरी ओर 24 घंटे के अंदर नोटिस का जवाब नहीं देने पर प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश चौक- चौराहे पर तैनात दंडाधिकारियों को दिया जा रहा है, जो बिल्कुल ही गलत है.

जिला प्रशासन के इस निर्णय को तुगलकी निर्णय कहा जाये तो कोई गलती नहीं होगी. जब किसी की बाइक या अन्य वाहन को जब्त कर लिया जा रहा है और आवागमन का कोई साधन नहीं है तो फिर 20 किमी से लेकर 100 किमी तक के दूर- दराज प्रखण्डों से मेदिनीनगर स्पष्टीकरण का जवाब देने लोग कैसे जायेंगें ? और जवाब नहीं देने पर उनपर मुकदमा दर्ज होना तय है.

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चालान काटकर दंडित करना काफी

पलामू जैसे पिछड़े जिले में ज्यादातर लोग गरीब है. यहां लॉकडाउन में चालान काटना उन्हें दंडित करने के लिए काफी है. ऐसे में जिला प्रशासन के द्वारा यह कहना कि लॉकडाउन के नियम तोड़ने वाले को लिखित जवाब अपर समाहर्ता के कार्यालय में देना होगा और उन पर एफआइआर भी दर्ज होगी यह गलत है.

चूंकि लॉकडाउन के कारण लोग पहले से ही परेशान हैं और बाद में उनकी आर्थिक स्थिति और कमजोर हो जाएगी और ऐसी परिस्थिति में जब लॉकडाउन टूटेगा तो उन लोगों को अपने मुकदमा से निजात पाने के लिए कोर्ट कचहरी का चक्कर लगाना पड़ेगा, जो अच्छी बात नहीं होगी.

डांट फटकार कर लोगों को छोड़ा जाये

ऐसी परिस्थिति में जिला प्रशासन से मांग की गयी है कि लॉकडाउन तोड़ने वालों को डांट फटकार कर एवं चालान काट कर दंडित किया जाए, ताकि पलामू की गरीब जनता को मुकदमा हो जाने के बाद की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े.

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