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#Lockdown: वेल्लोर में फंसे लोगों की हिम्मत दे रही जवाब, बोले-कोरोना नहीं तो डर और बेबसी जान ले लेगी

  • चार सौ रुपये किराया और चावल के लिए तरस रहे लोग
  • प्रशासन के आदेश के बाद भी लॉज मालिक ले रहे लोगों से किराया
  • कोई इलाज तो कोई अन्य काम से गये थे वेल्लोर, फंस गये
  • स्थानीय प्रशासन से बात करने में भाषा की हो रही समस्या
  • झारखंड सरकार से लगायी मदद की गुहार

Pravin/Chhaya

Ranchi: कोरोना संक्रमण रोकने के लिए लगाये गये लॉकडाउन के 18 दिन हो गये हैं. राज्य के करीब साढ़े सात लाख लोग दूसरे राज्यों में फंसे हुए हैं.

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इनमें बड़ी संख्या मजदूरों की है, पर कुछ वैसे लोग भी हैं जो किसी निजी काम या इलाज करना के लिए वेल्लोर गये थे और वहीं फंसे हैं.

इलाज के लिए वेल्लोर गये लोगों की स्थिति अब बदहाल हो चुकी है. लोग वापस आने के लिए परेशान हैं. लॉकडाउन के कारण उन्हें कोई राहत नहीं मिल पा रही.

न्यूज विंग ने वेल्लोर में इलाज के लिए गये राज्य के कुछ ऐसे ही लोगों से बात की तो पता चला कि अधिकतर लोगों के पास लॉकडाउन खत्म होने के बाद आने के लिए उनके पास पैसे नहीं हैं.

स्थानीय प्रशासन भले मदद कर रहा हो, लेकिन रूम किराया और पेट भरने के लिए तो जुगाड़ करना ही है. कुछ लोगों ने बताया उन्हें भाषा की भी परेशानी हो रही है.

50 रुपये किलो चावल के लिए भी सोचना पड़ रहा


जमशेदपुर के टेल्को कॉलोनी के रहने वाले सुरेश कुमार लॉकडाउन के पहले अपनी दो बेटियों के इलाज के लिए वेल्लोर गये. लॉकडाउन के ठीक एक दिन पहले बेटियों को डिस्चार्ज किया गया.

लेकिन लॉकडाउन के कारण सुरेश वापस नहीं आ सके. सुरेश अपनी पत्नी और बेटियों के साथ वेल्लोर में फंसे हैं. अपनी स्थिति का जिक्र करते हुए सुरेश ने कहा कि भले अब लॉकडाउन हट जाये, पर वापस जाने के लिए सोचना होगा क्योंकि अब पैसे नहीं हैं.

चार सौ रुपये किराया में एक कमरा लेकर बेटियों का इलाज करा रहे थे. लेकिन अब स्थिति ऐसी है की चार सौ रुपये देना तो दूर, 50 रुपये किलो चावल तक नहीं खा पा रहे. यहां तो सब कुछ 50 रुपये किलो है. इससे कम में कुछ नहीं. रात-रात भर जाग के गुजार रहे हैं.

सीओ ने आकर लॉज मालिकों को कहा है कि किराया नहीं लिया जाये, इसके बाद भी लॉज मालिक किराया ले रहे हैं. ऐसे में क्या किया जाये.

सरकार से उम्मीद है कि किसी तरह टेस्ट करें और हम लोगों को यहां से वापस अपने राज्य ले जायें. टेस्ट कराने के लिए तो तैयार है. पर कम से कम सरकार बात तो सुने. इन्होंने कहा कि अगर सरकार कुछ नहीं करती है तो कोरोना तो नहीं, लेकिन डर और बेबसी जान ले लेगी.

स्कूल से बच्चे को लाने गये और वहीं रह गये

अमित जुएल ने जानकारी दी की वे चेन्नई अपने बच्चे को स्कूल से लाने के लिए गये थे. इसी बीच लॉकडाउन हुआ और अमित अपने बच्चे के साथ वहीं फंसे रह गये.

अमित ने बताया की अब स्थिति ऐसी है की एक समय ही खाना मिल रहा है. अमित ने बताया कि झारखंड के लिए नोडल पदाधिकारी बनाये गये तमिलनाडु के अविनाश कुमार को कई बार फोन किया गया, लेकिन नंबर डायवर्ट आ रहा है.

हेल्पलाइन नंबर पर भी भाषा की परेशानी हो रही है जिससे परेशानी और बढ़ गयी है. न्यूज विंग ने भी नोडल पदाधिकारी अविनाश कुमार से बात करने की कोशिश की लेकिन संपर्क नहीं हो पाया.

इलाज के लिए गये सीएमसी, फंस गये

बोकारो के अमरनाथ सिंह ने जानकारी दी कि वे सीएमसे, वेल्लोर सीएमसी इलाज के लिए गये थे. लॉकडाउन के कारण अब अमरनाथ वहीं फंसे रह गये.

अमरनाथ ने बताया कि अब स्थिति ऐसी है की इनके पास पैसा तक नहीं है, जिससे लॉज का किराया दे सकें. जबकि लॉज मालिक किराया के लिये परेशान कर रहे हैं.

इन्होंने बताया की ये 13 मार्च को वेल्लोर पहुंचे थे. 20 मार्च तक इलाज भी हो गया. 23 मार्च का टिकट कटा था. अब राशन के लिए भी सोचना पड़ रहा है.

कुछ इसी तरह का मामला तमाड़ के रहने वाले सुकुमार महतो व रांची के शिशिर कुजूर का भी है ये भी वेल्लोर इलाज कराने गये थे. अब लॉज का किराया देने में खुद को असमर्थ पा रहे हैं. वे झारखंड सरकार से मदद की  उम्मीद रखते हैं.

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