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#Lockdown: 20 अप्रैल के बाद मनरेगा योजनाएं होंगी शुरू, कृषि कार्यों के लिए मिलेगी व्यापक छूट – डॉ रामेश्वर उरांव

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Ranchi :  वित्त तथा खाद्य आपूर्ति मंत्री सह झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा है कि राज्य सरकार लॉकडाउन में दूसरे राज्यों में फंसे राज्यवासियों को डीबीटी के माध्यम से 2000 रुपये उपलब्ध कराने पर विचार कर रही है. इस संबंध में मुख्यमंत्री से बात करने के बाद शुक्रवार तक निर्णय ले लिया जायेगा.

डॉ उरांव ने यह बातें गुरुवार को रांची में कोविड-19 को लेकर गठित मंत्रिमंडलीय उपसमिति की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में कही.

उन्होंने कहा कि बैठक में लोगों को रोजगार मुहैया कराने सहित लॉकडाउन में बाहर में फंसे मजदूरों को राहत और मदद पहुंचाने को लेकर गंभीरतापूर्वक विचार किया गया.

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उन्होंने कहा कि 20 अप्रैल के बाद खेती-बारी और कृषि कार्य को लेकर व्यापक छूट दी जायेगी. इसके अलावा निकाय क्षेत्रों के बाहर निर्माण कार्य को भी मंजूरी दी जायेगी.

20 अप्रैल से मनरेगा योजनाओं के काम भी प्रारंभ किये जायेंगे. इसके लिए ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम द्वारा आवश्यक राशि उपलब्ध करा दी गयी है. ईंट भट्ठा में भी काम करने की छूट दी जायेगी, अन्य क्षेत्रों में भी छूट को लेकर विचार-विमर्श किया जा रहा है.

उपसमिति की बैठक में मंत्री चंपई सोरेन, सत्यांनंद भोक्ता और बन्ना गुप्ता उपस्थित थे. साथ ही कई महत्वपूर्ण विभागों के प्रधान सचिव भी मौजूद थे.

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बिहार-ओडिशा की तर्ज पर प्रवासी मजदूरों को सरकार देगी आर्थिक मदद

रामेश्वर उरांव ने कहा कि इस समय कितनी संख्या में प्रवासी मजदूर दूसरे राज्यों में फंसे है, इसका मिलान किया जा रहा है और आंकड़े एकत्रित किये जा रहे हैं.

इस संख्या का पता लगाने में सांसद और विधायक महत्वपूर्ण माध्यम हैं. वहीं सही और पूरी संख्या का पता लगाने के लिए मुखिया और आंगनबाड़ी सेविकाओं से भी मदद ली जायेगी.

डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि बाहर में फंसे प्रवासी श्रमिकों के रहने और खाने-पीने का इंतजाम करना हर सरकार की ड्यूटी है. इस संबंध में सरकार दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भी बात करेगी और जहां लोग फंसे है, उन्हें मदद उपलब्ध कराने की कोशिश की जायेगी.

उन्होंने कहा कि बिहार-ओड़िशा समेत कई राज्यों ने बाहर में फंसे प्रवासी श्रमिकों को आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराने का प्रयास किया है.

इसी तर्ज पर झारखण्ड सरकार भी डीबीटी के माध्यम से ऐसे लोगों को 2000 रुपये की राशि उपलब्ध कराने पर विचार कर रही है. सीएम से विचार-विमर्श के बाद इस संबंध में जल्द ही निर्णय ले लिया जायेगा.

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लॉकडाउन के बाद आने वाले लोगों को फ्री ट्रैन सुविधा पर भी विचार

उन्होंने बताया कि लॉकडाउन समाप्त होने के बाद लाखों की संख्या में लोग वापस लौटेंगे. ऐसे लोगों के लिए रेलवे से फ्री ट्रेन चलाने की व्यवस्था करने का आग्रह किया जायेगा.

साथ ही पड़ोसी राज्यों और निकटवर्ती जिलों में फंसे लोगों को वापस लाने के लिए बसों का भी इंतजाम किया जायेगा. डॉ उरांव ने कहा कि लाखों लोग लौटेंगे, उन सभी के स्वास्थ्य जांच की समुचित व्यवस्था की जायेगी.

इसके लिए व्यापक पैमाने पर सामुदायिक केंद्रों और पंचायत भवनों में क्वारेंटाइन सेंटर बनाये जा रहे हैं. संदिग्ध मरीज जांच के बाद ही अपने घर जा पायेंगे और 14 दिनों तक होम क्वारेंटाइन में रहेंगे.

वहीं जिन पर थोड़ा ही संदेह होगा, उन्हें सरकारी क्वारेंटाइ सेंटर में 14 दिनों तक रहना होगा और पूरी संतुष्टि के बाद ही वे अपने घर जा पायेंगे.

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