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#Lockdown: एक महीने में झारखंड को 15000 करोड़ के नुकसान का अनुमान

Chhaya

Ranchi: देश में लॉकडाउन लागू हुए लगभग 17 दिन बीत चुके हैं. जहां एक ओर लोग कोरोना वायरस से बचाव में लगे हैं. वहीं उद्योग जगत में हो रहे आर्थिक नुकसान को लेकर व्यापारियों और उद्योगपतियों में असंतोष भी है. भले ही केंद्र सरकार की ओर से व्यापारियों को कुछ राहत दी गयी है.

लेकिन कर्मचारियों के वेतन न काटने, बिजली बिल में फिक्सड चार्जेस समेत अन्य कई ऐसे नियम भी लागू किये गये, जिससे व्यापार जगत में हलचल है. एक आंकड़े के मुताबिक, राज्य सरकार को उद्योग से होने वाले राजस्व में बड़ा नुकसान होने वाला है.

केंद्र के आदेश के बाद राज्य के सभी उद्योग, कारखाने चाहे बड़े हों या छोटे बंद हैं. आने वाले दिनों में केंद्र सरकार लॉकडाउन बढ़ा भी सकती है. फेडरेशन ऑफ झारखंड चेंबर ऑफ कॉर्मस एंड इंडस्ट्रीज की मानें तो राज्य में उद्योगों से एक माह में कम से कम 15000 करोड़ का व्यापार करते हैं. इसमें टाटा जैसी बड़ी कंपनियों के व्यापार शामिल नहीं हैं. अगर आने वाले दिनों में केंद्र सरकार लॉकडाउन बढ़ाती है, तो छोटे व्यापारियों और उद्योगों के लिए मुसीबत और बढ़ जायेगी.

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आर्थिक मंदी के असर से निकले भी नहीं थे

पिछले साल देश में चल रहे आर्थिक मंदी के दौरान भी राज्य के अलग-अलग हिस्सों में कई उद्योग बंद हुए थे. इसकी भरपाई अभी राज्य के उद्योग कर ही रहे थे कि कोरोना महामारी की अलग मार इन्हें मिली. एक आंकड़े की मानें तो सिर्फ जमशेदपुर में ही 700 छोटे उद्योग पिछले साल बंद हुए.

जिसमें फूडिंग, प्लास्टिक और ऑटोमोबाइल के रहे. रांची के तुपुदाना इंडस्ट्रीयल एरिया में 150 में से लगभग 60 उद्योग बंद हुए. अन्य बचे छोटे उद्योग भी बंदी की कागार पर हैं. यही स्थिति अन्य इलाकों में भी रही. बता दें राज्य में सिर्फ उद्योगों का बंद होना ही एक समस्या नहीं है. बल्कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत उद्योग के लिए ली गयी जमीन पर अधिकार, कच्चा माल लाने में हो रही परेशानी आदि भी कई समस्याएं हैं.

लॉकडाउन के साथ ही बढ़ी मुसीबत

भले ही कोरोना जैसी महामारी के प्रति सभी सजग हैं. व्यापारी वर्ग इसका स्वागत भी कर रहे हैं. लेकिन केंद्र और राज्य सरकार की ओर से व्यापारियों को और राहत की उम्मीद है. पिछले दिनों चेंबर की ओर से मुख्यमंत्री को पत्र लिखा गया.

जिसमें उद्योगों और कारखानों के लिए बिजली में फिक्सड चार्जेस हटाने की मांग की गयी. मांग तीन महीने के लिए की गयी. हालांकि अभी तक राज्य सरकार की ओर से इसपर कोई पहल नहीं की गयी. बिजली दरों में फिक्सड चार्जेस हटाने से इन व्यापारियों को काफी मदद मिलेगी. विशेषकर छोटे और मंझोले उद्योगों को.

बता दें राज्य में छोटे उद्योगों की संख्या अधिक है. और अधिकांश छोटे उद्योग टाटा, मेकॉन जैसी मदर कंपनियों पर निर्भर हैं. ऐसे में अगर केंद्र या राज्य सरकार इसपर सटीक पहल नहीं करती है. तो छोटे उद्योगों पर काफी असर पड़ेगा. कुछ व्यापारियों का कहना है की भले ही काम बंद है, लेकिन लोन समेत कई खर्च हैं, जो वहन करना ही है. सरकार को इसपर ध्यान देना चाहिए.

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केंद्र की इस घोषण के लिए तैयार नहीं थे

केंद्र सरकार ने 24 मार्च को एकाएक लॉकडाउन की घोषणा की. चेंबर अध्यक्ष कुणाल आजमानी ने बताया कि व्यापारी इसके लिए तैयार नहीं थे. एकाएक निर्णय लिया गया. हालांकि महामारी के प्रति सजगता जरूरी है. लेकिन पूर्व तैयारी भी होनी चाहिए. अधिकांश व्यापारी राज्य के ऐसे हैं, जिनका कच्चा माल अब बबार्द हो रहा है.

जबकि सबसे अधिक लागत कच्चा माल लाने में लगता है. पहले से अगर केंद्र सरकार लॉकडाउन की संभावना व्यक्त करती, तो कम से कम व्यापारी तैयार रहते. लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया. आजमानी ने बताया कि व्यापारी सरकार के लॉकडाउन के समर्थक हैं. लेकिन इस 21 दिनों के लॉकडाउन के काफी साइड इफेक्ट्स हैं.

अभी तो कर्मचारियों को वेतन दिया जा रहा है. लेकिन काम शुरू होने के बाद विकट स्थिति होगी. राज्य में लगभग 40 हजार कर्मचारी प्रत्यक्ष रूप से छोटे और मंझोले उद्योगों पर निर्भर हैं. जबकि अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े लोगों की संख्या इससे भी अधिक है.

डेढ़ से दो माह लगेंगे वापस अपनी स्थिति में आने में

पूर्व चेंबर अध्यक्ष दीपक कुमार मारू ने बताया कि किसी भी व्यापारी ने कर्मचारियों का वेतन नहीं काटा. बिजली बिल के फिक्सड चार्जेस में सरकार कमी नहीं कर रही. व्यापारी किराया भी दे रहे हैं, राहत कार्य भी चला रहेंहैं.. लेकिन सरकार को सोचना चाहिए कि उद्योग अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. व्यापारी सब कुछ करें.

साथ ही कहा कि सरकार से भी उम्मीदें है. जिसे सरकार को पूरी करनी चाहिये. लॉकडाउन 15 अप्रैल को हटें या इसके बाद बढ़ाया जायें. उद्योगों को वापस अपनी स्थिति में आने में लगभग डेढ़ से दो माह का समय लगेगा. इसे सबसे अधिक प्रभाव छोटे और मध्यम व्यापारियों को होगी. क्योंकि बड़े व्यापारी किसी तरह खुद को खड़े कर लेंगे.

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