Bihar

#Lockdown : बिहार के 130 लाख लोग कोरोना संकट के दौर में आ सकते हैं भूख की चपेट में 

  • केंद्र सरकार पर 10 लाख टन अनाज बिहार है का बकाया

Patna: देश में अनाज भंडार भरा हुआ है. 1 मार्च, 2020 तक केंद्र सरकार के भंडार में 800 लाख टन अनाज रखा हुआ था. यह भंडार गेहूं की खरीद के बाद और बढ़ जायेगा. कोरोना के असर के दौरान बिहार सरकार को बड़े स्तर पर आपातकालीन खाद्य सहायता देनी होगी, ताकि लोग भूख की चपेट में न आयें.

अगले एक वर्ष में बिहार के सभी ग्रामीण परिवारों और शहर में रहनेवाले गरीब परिवारों को राशन देने के लिए बिहार सरकार को सिर्फ 20 लाख टन अनाज की आवश्यकता है. इस 20 लाख टन अनाज में से 10 लाख टन अनाज केंद्र सरकार पर बकाया है.

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वर्तमान आवंटन 2011 की जनगणना के आधार पर किया गया है

वर्तमान आवंटन 2011 की जनसंख्या के आधार पर किया गया है. जबकि 2019 तक बिहार की जनसंख्या करीब 2.16 करोड़ बढ़ गयी है, इसलिए सिर्फ 10 लाख टन के अतिरिक्त आवंटन से बिहार के सभी ग्रामीण परिवार और शहरी गरीब परिवार को राशन मिल पायेगा.

नीतीश कुमार को लिखा गया पत्र.

ज्ञात हो कि खाद्य सुरक्षा कानून, 2013 के अंतर्गत बिहार के करीब 84% लोगों को राशन मिलना है, लेकिन यह 2011 की जनगणना के अनुसार मिलता है. आज की तारीख में केंद्र सरकार बिहार के करीब 8.6 करोड़ लोगों के लिए अनाज देती है.

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नीतीश कुमार को लिखा पत्र

जनगणना के अनुसार 2019 में बिहार की जनसंख्यां 12.57 करोड़ है. इसलिए बिहार में अभी सिर्फ 70% लोगों को ही अनाज की पात्रता है. अगर यह मान लिया जाये कि छूटे हुए लोगों में से सिर्फ एक तिहाई लोग गरीब हैं और भूख की चपेट में आ सकते हैं तो करीब 130 लाख लोग यानी बिहार की जनसंख्या का कुल 10% कोरोना के समय भूख की चपेट में आ सकता है.

मशहूर अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज़ और जन आन्दोलनों का राष्ट्रीय समन्वय (एनएपीएम) से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता आशीष रंजन, कामयानी स्वामी और महेंद्र यादव ने नीतीश कुमार को एक पत्र लिख कर यहे बातें कहीं हैं. उन्होंने मुख्मंत्री से आग्रह किया है कि वह केंद्र सरकार से 20 लाख टन की मांग करें ताकि अगले एक साल तक बिहार में सभी ग्रामीण और शहरी गरीब परिवारों को अनाज मिल सके. साथ ही अनाज वितरण प्रणाली को मजबूत करने, भष्टाचार रोकने एवं निगरानी पर विशेष ध्यान देने के लिए आग्रह किया गया है.

जन वितरण प्रणाली के साथ सामुदायिक रसोई एवं भोजन उपलब्ध कराने के अन्य उपाय पर जोर डालने की सिफारिश की गयी है.

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