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करियर चुनने में खुद के दिल की आवाज सुनें, बोले माली गणराज्य के भारतीय राजदूत अंजनी कुमार

‘समय बर्बाद मत करो, जिंदगी उतनी भी बड़ी नहीं’

Ranchi: इस भागम-भाग की जिंदगी में इससे पहले कि आप भागें, थोड़ा रुकें. खुद की दिल की आवाज़ सुनें. और, फिर जो सुनाई दे, उस दिशा में आगे बढ़ें, सफलता जरुर हासिल होगी. उक्त बातें डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची में इंग्लिश लैंग्वेज एंड लिटरेचर (ईएलएल), अंग्रेजी विभाग और डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के द्वारा आज़ादी का अमृत महोत्सव के लेक्चर सेमिनार के अंतर्गत “ लाइफ स्किल और कैम्पस लाइफ” विषय पर आयोजित एकदिवसीय सेमिनार में बतौर मुख्य वक्ता IFS अंजनी कुमार (जो माली गणराज्य में भारत के राजदूत हैं) ने कही.

छोटी सी है जिंदगी, समय का करें सदुपयोग

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आगे उन्होंने समय के महत्व को बताते हुए कहा कि “ज़िन्दगी इतनी भी बड़ी नहीं कि हम वक्त जाया करें. हम आयें हैं, इस दुनिया में, हमें सिर्फ इतना पता है. हम कब जायेंगे, ये पता नहीं. और यही पता होना आपसे बहुत कम समय में बहुत उपयोगी कार्य सम्पादित करा लेती हैं. लेकिन हमारे पास समय कम है, इतनी छोटी- सी बात हमारे जेहन में धंसती नहीं,इसे हम मजाक में लेते हैं, और ऐसे में महज एक मजाक बन कर रह जाती है.” लाईफ स्किल क टिप्स साझा करते हुए उन्होंने कहा कि “ हर इंसान का रास्ता अद्वितीय है.

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किसी के कहने पर ना चुने करियर

आप अपने भाई, बहन, चाचा चाची रिश्तेदार को देखकर अपना करियर न चुनें, बल्कि खुद की अंतरात्मा की सुनें . सभी इस जिंदगी में अपनी लकीर लेकर आयें हैं. इसमें जरूरी होगा कि आप आत्मविश्वास रखें.”

विदेश में नौकरी का मतलब विदेशी बनना नही

उन्होंने अपने विदेश सेवा का अनुभव साझा करते हुए कहा कि “विदेश सेवा का मतलब यह नहीं की हम विदेशी बन जाएं.विदेश सेवा का मतलब हैं, हम अपनी संस्कृति को साझा करें.”

वसुदेव कुटुम्बकम के दर्शन को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि अगर अपनी चेतना को प्रकृति के तल पर लेकर जायेंगे तो पायेंगे वहां कोई सरहद नहीं. न हवा का, न पानी का, न परिंदों का . वहां सब एक–दूसरे से जुड़ें हैं.

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जीवन में विविधता, कुछ सत्य नहीं

इस जीवन में कोई अखंड सत्य नहीं होता. अगर पेड़ में आम नवम्बर के मौसम में नहीं आता, तो यह सत्य सिर्फ भारत के लिए है. अफ्रीका के लिए यह सत्य नहीं. वहां आम सालों भर मिल जाते हैं. यही विविधता का सच है. और हमें इसका आदर करना चाहिए.

आनंद लेने के लिए लक्ष्य ना बनायें, हर क्षण करें एंज्वाए

उन्होंने कहा जीवन के प्रत्येक सफर में कहीं पहुंच कर आप आनंद लेंगे, ऐसा जीवन में कोई पड़ाव नहीं आता. जीवन का सफर ही आनंद है .इसलिए प्रतिदिन प्रतिपल आनंद लें.

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“आचरण दूसरों से वैसा ही हो, जैसा आप खुद के लिए दूसरों से उपेक्षा रखते हों.“

छात्र के प्रश्नों के जवाब में उन्होंने कहा कि यूपीएससी के इंटरव्यू में आपके प्रजेंस ऑफ माइंड और पर्सनेलिटी चेक किया जाता है, ना की आपका ज्ञान. UPSC आपसे अपेक्षा रखती है कि आप दिमाग और दिल के बिच संतुलन बनाए रखें.

अपने अध्यक्षीय भाषण के दौरान प्रो. तपन कुमार शांडिल्य ने कहा कि “शिक्षा, लाइफ स्किल के बिना अधूरा है. कुशल व्यक्ति देश के लिए संपत्ति के समान होता है.“

आगे उन्होंने कहा कि सुविधाओं के बीच तो सभी निखरते हैं. जो समस्याओं के बीच अपने आप को तराशता है, वही हीरा है. प्रकृति सभी के अंदर कुछ खूबियां देकर भेजती है, आपको अपने स्किल को डिवेलप करके कामयाबी का राह बनाना है.

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किताबों के महत्व को बताते हुए उन्होंने कहा कि किताबें अब कम , शहर में मोबाइ के दुकान ज्यादा हो गये हैं. छात्रों को फिर से मोबाइल की दुकानों का चलन कम और किताबों की दुकानों की संख्या को बढा देना है.

कार्यक्रम में स्वागत भाषण विश्वविद्यालय के DSW डॉ. अनिल कुमार ने दिया. मंच संचालन ई एल एल डिपार्टमेंट के सौरभ मुखर्जी ने किया. धन्यवाद ज्ञापन ई एल एल विभाग के कोर्स कोर्डिनेटर डॉ. विनय भरत ने किया . इस मौके पर विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार डॉ. नमिता सिंह ने मुख्य वक्ता अंजनी कुमार सहाय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि छात्रों को इनकी बताई नसीहतों को imbibe करना चाहिए.

इस मौके पर मानविकी संकाय के डीन डॉ. अयूब , डॉ रीना नन्द , डॉ. अभय सागर मिंज, डॉ. रामदास उंराव, डॉ. अशोक नाग, ई एल एल की श्वेता गौरव, कर्मा कुमार, डॉ. पंकज, कुमारी शालिनी , मिनी सहाय, डॉ. समा सोनाली तथा अन्य मौजूद थे. जब एम्बेसडर अंजनी सहाय ने स्पैनिश में गीत सुनाए, तो पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा.

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