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रिम्स में लैब से निकलनेवाले लिक्विड वेस्ट का होगा डिस्पोजल

Vivek Sharma

Ranchi : राज्य का सबसे बड़ा हॉस्पिटल रिम्स हमेशा अव्यवस्था को लेकर चर्चा में बना रहता है. हॉस्पिटल से निकलनेवाले बायोमेडिकल वेस्ट के डिस्पोजल को लेकर भी आजतक प्रॉपर इंतजाम रिम्स प्रबंधन नहीं कर पाया है. लेकिन हॉस्पिटल से निकलनेवाले लिक्विड वेस्ट के डिस्पोजल के लिए अब नयी मशीन लगायी जा रही है. जिससे हॉस्पिटल और पैथोलॉजिकल लैब से निकलनेवाले लिक्विड वेस्ट का डिस्पोजल किया जा सकेगा. वहीं इससे पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होगा. बताते चलें कि रिम्स से निकलनेवाले लिक्विड वेस्ट को खुले में फेंका जा रहा था. जिसमें कई तरह के खतरनाक केमिकल होते थे.

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एक हजार लीटर की कैपेसिटी

हॉस्पिटल कैंपस में लगायी जा रही मशीन का इंस्टालेशन ट्रॉमा सेंटर में होगा. जहां पर हॉस्पिटल से निकलनेवाले लिक्विड केमिकल वेस्ट और लैब के वेस्ट को डिस्पोज किया जायेगा. लगभग 3 लाख रुपये की इस मशीन की एक दिन की कैपेसिटी एक हजार लीटर की होगी. ऐसे में उम्मीद जतायी जा रही है कि इस मशीन से पूरा हॉस्पिटल कवर हो जायेगा.

राज्य का पहला डिस्पोजल प्लांट

राज्य में बायोमेडिकल वेस्ट के डिस्पोजल के लिए रिम्स में केवल अपना इंसीनरेटर है. वहीं कुछ एजेंसियां इसके लिए काम करती हैं. जो कि जिलों के हॉस्पिटल्स से टाईअप में हैं. ऐसे में रिम्स का एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (इटीपी) राज्य का पहला प्लांट होगा, जहां पर लिक्विड वेस्ट के डिस्पोजल की व्यवस्था होगी.

हर दिन आते हैं ढाई हजार मरीज

हॉस्पिटल में हर दिन दो से ढाई हजार मरीजों का आना होता है. जिसमें इमरजेंसी से लेकर इनडोर और ओपीडी वाले मरीज भी शामिल होते हैं. इन मरीजों में से लगभग 1000 मरीजों को अलग-अलग टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है. जिनका टेस्ट रिम्स के सेंट्रल लैब में किया जाता है. जहां सैंपल में ब्लड, टिश्यू, आर्गन के अलावा कई अन्य वेस्ट भी होते हैं. जिसे यूं ही कचरे में डाल कर बाहर निकाल दिया जाता रहा है. अब इस वेस्ट का ट्रीटमेंट होगा और डिस्पोजल भी किया जायेगा.

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