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रिम्स में ही चिकनगुनिया के मिल रहे हैं लार्वा, ऐसे में कहां इलाज करायें मरीज

नर्स, कर्मचारी एवं सुरक्षाकर्मियों में मिल रहे चिकनगुनिया के लक्षण

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Ranchi : जिस भवन का निर्माण मरीजों को चिकनगुनिया, मलेरिया, डेंगू आदि बिमारियों से निजात दिलाने के लिए किया गया था. वह आज स्वंय चिकनगुनिया और डेंगू जैसी बीमारी का शिकार हो चुका है. जहांं अपना इलाज कराने और स्वस्थ होकर लौटने की चाहत लिए मरीज आते हैं वहीं अगर बिमारी के वायरस पनपे तो मरीज कहां जाये. जी हां इन दिनों कुछ ऐसा मामला राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में देखने को मिल रहा है. अस्पताल में ही चिकनगुनिया के लार्वा मिलने लगे हैं. यह इस वजह से हो रहा है क्योंकि अस्पताल की साफ-सफाई सही ढंग से नहीं हो पाती है.

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नर्स, कर्मचारी एवं सुरक्षाकर्मियों में मिल रहे चिकनगुनिया के लक्षण

गार्ड हृदय पांडेय में चिकनगुनिया के लक्षण पाये गए हैं. इसके बाद एक-एक कर कई सुरक्षाकर्मियों और नर्सों ने अपनी जांच करायी.  रिम्स प्रबंधन भी इसके बाद हरकत में आयी और अस्पताल परिसर में साफ-सफाई की बातें करने लगी. वहीं टीम द्वारा किए गए निरीक्षण में भी अस्पताल और हॉस्टल में एडिस मच्छर पाए गए थे. इसके बाद अस्पताल के निदेशक ने नगर निगम और पीएचईडी विभाग पर दोषारोपण करते हुए सफाई कराने के निर्देश दे डाले. रिम्स में सैकडों छात्र-छात्राएं डॉक्टरी की पढ़ाई करते हैं, इनसे अच्छी खासी मोटी रकम वसूली जाती है. बावजूद यहां साफ-सफाई की घोर अव्यवस्था है. इसके अतिरिक्त रिम्स परिसर में अंदरूनी सफाई के लिए निजी कंपनी को भी हायर किया गया है. लेकिन सफाई सिफर है. सिर्फ बाहरी स्थानों पर सफाई कराकर कंपनी अपनी जिम्मेदारी पूरी समझ लेती है. जबकी अस्पताल के बाथरूम, वार्ड गंदे ही रहते हैं.

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अस्पताल प्रबंधन, नगर निगम व पीएचईडी विभाग को सफाई का निर्देश

रिम्स के निदेशक डॉ. आरके श्रीवास्तव ने नगर निगम और पीएचईडी विभाग को पत्र लिखकर रिम्स परिसर की पानी टंकी की सफाई कराने, हॉस्टल में डस्टबीन लगवाने की बात कर रहा है. लेकिन रिम्स के अंदर ही गंदगी भरी पड़ी है इसपर शायद अस्पताल प्रबंधन की नजर नहीं जाती है. अस्पताल का बेसमेंट जिसकी सालों से सफाई नहीं हुई, यहां गंदगी का अंबार लगा हुआ है. बरसात का पानी महीनों तक बेसमेंट में जमा रहता है. इसी पानी में डंगू के मच्छर पनपते हैं.

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न्यूज विंग ने लगाई थी खबर अगरबत्ती जलाकर सोते हैं मरीज

अभी कुछ दिन पहले ही न्यूज विंग ने खबर चलाई थी कि मच्छरों से बचने के लिए मरीज अगरबत्ती जलाते हैं. इस खबर में भी बेसमेंट की गंदगी के बारे में बताया गया था. अस्पताल में भर्ती मरीजों ने बताया था कि मच्छरों से बचने के लिए वे मच्छर भगाने वाली अगरबतती जलाते हैं. जिससे बीमारी बढ़ने की संभावनायें और बढ़ जाती है और यदि अगरबत्ती ना जलाया जाये तो मच्छर काटते हैं. ऐसे में अन्य बीमारियों के होने का खतरा बना रहता है.

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हर महीने जाती है पीएचईडी की टीम, बेसमेंट, सीवर, टंकी की होती है सफाई : तपेश्वर

पीएचईडी विभाग के गोंदा प्रमंडल के प्रभारी तपेश्वर चौधरी ने बताया कि रिम्स प्रबंधन अपनी गलती छिपाकर पीएचईडी विभाग के नाम पर खेल रहा है. रिम्स के निदेशक द्वारा कही गई बात सच नहीं है. हर माह पीएचईडी विभाग की टीम अस्पताल में साफ-सफाई का जायेजा लेती है और सफाई कराती है. प्रभारी ने बताया कि रिम्स प्रबंधन ने अंदरूनी सफाई के लिए निजी कंपनी के साथ एमओयू किया है, लेकिन निजी कंपनी कुछ सफाई नहीं कराती है. उन्होंने कहा कि मरीजों द्वारा कई बार पानी की बोतल, कपड़े, रुई, फेंकने से सिवर जाम हो जाता है. इस कारण भी पानी बाहर नहीं निकल पाता है. समय-समय पर इसकी भी सफाई कराई जाती है. उन्होंने बताया कि अगस्त में बेसमेंट की सफाई के दौरान लगभग 50 मोबाईल फोन भी गिरे मिले.

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