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साक्षात मौत नजर आती है कोयलांचल की सड़कों पर

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Dhanbad : सड़क से हाइवा आते देख लोगों की रूह कांप जाती है. किस हाइवा से किसकी जान चली जाये, कोई नहीं जानता. कोयलांचल में हर महीने औसतन 10 लोग हाइवा के कारण होनेवाली दुर्घटना के शिकार होते हैं. इन हादसों में लोगों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है. इन हाइवा से प्राण रक्षा के लिए निरसा सहित कुछ इलाकों में बच्चे हाथ में लाल झंडा लेकर सड़क पार करते हैं.

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इतना खौफ क्यों है?

हाइवा पर अमूमन तीस टन तक कोयला लदा होता है. ज्यादातर इसका ड्राइवर बहुत ही कम उम्र का अनुभवहीन होता है. कई बिना लाइसेंस के ही हाइवा चलाते हैं. कोलियरियों, लोडिंग प्वॉइंट आदि से कोयला लोड करने से लेकर अनलोड करने की जगह तक विपरीत माहौल से जूझते कोयले के गर्द-गुब्बार से अंटे पड़े ज्यादातर ड्राइवर खलासी ओवर ड्रिंक लिये होते हैं. ऐसे में इतने लोडेड वाहन को हमेशा नियंत्रित रख पाना संभव नहीं होता है. चूंकि कोयले का कारोबार करनेवाले ऊंची पहुंचवाले होते हैं, इसलिए पुलिसवाले हाइवा को रोककर मुसीबत मोल नहीं लेना चाहते. कोयले के वैध और अवैध हर तरह के कारोबार में कांटा और लोडिंग प्वॉइंट पर होनेवाली वसूली का हिस्सा पुलिस के बड़े अफसर से लेकर छोटे मुलाजिमों तक जाता है, तो कोई क्यों हाइवा की तेज रफ्तार के आड़े आये. यूं समझिये कि हाइवा धनबाद की सड़कों का राजा है. कोयला परिवहन रोकना मतलब उद्योग को प्रभावित करना. ऊपर के स्तर से फिर कई सवाल-जवाब हो सकते हैं. लिहाजा हाइवा हवा से बात करता कोयलांचल की सड़कों पर लोगों की रूह कंपाता चल रहा है.

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नो एंट्री में कैसे आया हाइवा?

डीआरएम चौक पर मंगलवार की देर रात हाइवा की चपेट में आने से एक ही परिवार के दो डॉक्टर और ड्राइवर की मौत और दो अन्य के गंभीर रूप से घायल होने की घटना के लिए धनबाद के डॉक्टर पुलिस को दोषी मान रहे हैं. डॉक्टरों का आरोप है कि जब दुर्घटना हुई, तब नो एंट्री का समय था. उस समय हाइवा शहर की सड़क पर पुलिस की लापरवाही या मर्जी से आया. हालांकि, इस बात को लेकर विवाद है कि जब दुर्घटना हुई, तब नो एंट्री का समय था.

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कई सड़कों पर हाइवा परिचालन रोकने के लिए होता रहा है आंदोलन

जिन सड़कों पर भी हाइवा का परिचालन होता है, उनके आस-पास के लोग खुद को सुरक्षित नहीं मानते. इस कारण कई सड़कों पर हाइवा परिचालन रोकने के लिए लोग आंदोलन करते रहे हैं. मगर, कोयलांचल में हाइवा परिचालन तो रुक नहीं सकता, भले लोगों की जान सांसत में हो.

कोयला परिवहन करनेवाले वाहन ने ली इनकी जान

  • झरिया मार्ग पर बस्ताकोला में 12 जुलाई की रात सड़क दुर्घटना में एक युवक की मौत हो गयी. इससे आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर दिया और जगह-जगह पर टायर जलाकर प्रदर्शन करते हुए लगभग आधा दर्जन गाड़ियों के शीशे तोड़ दिये.
  • 5 जुलाई 2018 को कोइरीबांध निवासी राम कुमार की सड़क दुर्घटना में मौत हो गयी.
  • 16 फरवरी को प्रकाश सिंह और संजय कुमार, दोनों एक ही बाइक से धनबाद आने के दौरान हाइवा की चपेट में आ गये. मौके पर ही उनकी मौत हो गयी.
  • 17 मई  2018 को  सूरज सिंह पुटकी के रास्ते कोयला परिवहन करनेवाले वाहन की चपेट में आ गये. उनकी मौत हो गयी. वह बरारी के रहनेवाले थे.

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