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सिख समाज के कृपाण की तरह तीर-धनुष आदिवासी अस्मिता का प्रतीक, सर्व सुलभ रखने की मान्यता दे सरकार : सीता सोरेन

देश भर के जाने माने सोशल एक्टिविस्ट हंसराज मीणा ने जामा विधायक के मांग का किया समर्थन

Ranchi  :  जेएमएम नेता सह जामा विधानसभा से विधायक सीता सोरेन एक बार फिर सुर्खियों में है. सीता सोरेन ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की है कि झारखंड की संस्कृति, सभ्यता व रीति-रिवाज के अनुसार तीर-धनुष को सर्व सुलभ तरीके से रखने की मान्यता दी जाए.

दरअसल उनकी मांग संताल परगना कॉलेज (दुमका) हॉस्टल से 2016 में जब्त किए गए आदिवासियों के तीर-धनुष वापस लेने की मांग को लेकर है. विधायक सीता सोरेन के एक करीबी ने बताया कि संताल परगना कॉलेज में यह परंपरा रही है कि जो भी छात्र पहली बार कॉलेज आता है,  वह अपने साथ तीर-धनुष लेकर आता था.

2016 तक यह परंपरा बरकरार रही, लेकिन भाजपा सरकार ने इस परंपरा को तोड़ दिया. उस वर्ष करीब 25,000 तीर-धनुष जब्त किए गए थे. जेएमएम विधायक की मांग का समर्थन देश के जाने-माने सोशल एक्टिविस्ट हंसराज मीणा ने भी किया है.

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ट्वीट कर सीता सोरेन से की गयी थी मांग

दरअसल, ट्विटर पर एक ट्वीट कर सीता सोरेन से इस बाबत मांग की गयी थी. उनसे पूछा गया था कि क्या “अबुवा दिसोम-अबुवा राज (अपना देश अपना राज्य)” में संताल परगना कॉलेज हॉस्टल से 2016 में जब्त किए गए आदिवासियों का तीर-धनुष वापस हो सकता है? जब छात्र हॉस्टल में प्रथम बार आते है तो वे तीर-धनुष अपने साथ लाते है. यह यहां की धार्मिक व सांस्कृतिक परंपरा रही है.

विधायक ने कहा, झारखंड का पूजनीय प्रतीक है तीर-धनुष

विधायक सीता सोरेन ने मुख्यमंत्री से कहा है कि झारखंड की संस्कृति,  सभ्यता व रीति रिवाज के अनुसार तीर-धनुष सर्व सुलभ रखने की मान्यता दी जाए.

उन्होंने तीर-धनुष को झारखंड के गौरव अस्मिता का पूजनीय प्रतीक है. सिख समाज के कृपाण की तरह आदिवासी समाज को भी तीर-धनुष रखने का पूरा अधिकार है.

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