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शोले के ठाकुर की तरह झामुमो ने काटे कांग्रेस के हाथ…

Rajesh Tiwary

Ranchi: रमेश सिप्पी की एक फिल्म आयी थी शोले. जिसने अपने समय में बॉक्स ऑफिस के सभी रिकॉर्डों को ध्वस्त कर दिया था. इस फिल्म में गब्बर सिंह और ठाकुर के बीच हुई डॉयलॉग ने काफी चर्चा बटोरी थी. जिसमें गब्बर सिंह बार-बार ठाकुर से यह कह रहा था कि ये हाथ मुझे दे दे ठाकुर… इस सीन में गब्बर सिंह विलेन की रोल में था और ठाकुर मुख्य रोल में थे. झारखंड की राजनीति में पिछले डेढ़ महीने से जो घटनाक्रम चल रहा है वह शोले फिल्म के इस सीन को याद दिला रहा है.

अंतर सिर्फ इतना है कि फिल्म में दोनों किरदार एक दूसरे के आमने-सामने थे और यहां जो किरदार है वे एक दूसरे की गलबहियां कर ढाई साल से सरकार चला रहे हैं. शोले में गब्बर ने सबको दिखाकर ठाकुर का हाथ काटा था और झारखंड की राजनीति में झामुमो ने कांग्रेस के हाथ काटे पर उसे पता भी नहीं चलने दिया. अब तो आलम यह हो गया है कि दोनों हाथ कट जाने के बाद भी कांग्रेस चूं तक नहीं बोल पा रही है.

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पहले राज्यसभा और अब राष्ट्रपति चुनाव में झामुमो के सामने कांग्रेस पस्त

कांग्रेस पार्टी झारखंड में हेमंत सोरेन की अगुवायी में चल रही सरकार का मुख्य घटक दल है. हेमंत सोरेन यदि पूर्ण बहुमत की सरकार का दंभ भर रहे हैं तो वो कांग्रेस की बदौलत ही है. लेकिन, जिसके सहयोग से हेमंत सोरेन की सरकार चल रही है उसे ही झामुमो की कूटनीति का शिकार होना पड़ रहा है. जबसे सरकार बनी है कांग्रेस के विधायक गला फाड़-फाड़ कर कई बार रांची से लेकर दिल्ली तक कह चुके हैं कि अपनी ही सरकार में उनकी नहीं सुनी जा रही है. विधायकों के बार-बार अगाह के बाद भी कांग्रेस नेतृत्व सत्ता की चासनी से चिपकी रही.

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पिछले महिने संपन्न राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेसियों ने झारखंड की एक सीट अपने कोटे में लेने के लिये रांची दिल्ली एक कर दिया था. कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी तक बात गयी थी. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोनिया गांधी से मुलाकात भी की. लेकिन रांची आते ही हेमंत ने ऐसा कार्ड खेला जिसमें कांग्रेस चारो खाने चित हो गयी और राज्यसभा सीट झामुमो के पाले चला गया.

इसके बाद शुरू हुआ राष्ट्रपति चुनाव का दौर. इस चुनाव में भाजपा ने ऐसा जाल बुना जिसमें झामुमो का फंसना तय माना जा रहा था. यूपीए ने पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा को राष्ट्रपति पद के लिये प्रत्याशी बनाया. जिस दिन यशवंत सिन्हा के नाम की घोषणा हो रही थी उस बैठक में झामुमो का प्रतिनिधि भी उपस्थित था. लेकिन झामुमो ने यहां भी कांग्रेस को बाय-बाय किया और भाजपा प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने की घोषणा कर दी. झामुमो के इस निर्णय पर भी कांग्रेस कुछ बोल नहीं पा रही है.

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