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नोटबंदी की तरह मोदी सरकार की नजर अब आपके घरों में रखे सोने पर

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Girish Malviya

मोदी सरकार की नजर आपके घरों में रखे सोने पर है. और अगर आपको यह खबर मजाक लग रही है तो आप बड़ी गलती कर रहे हैं. पारंपरिक मीडिया ने इस खबर को अब तक प्रमुखता नहीं दी है.

दरअसल, यह खबर बता रही है कि भारत की अर्थव्यवस्था किस गहरे दबाव से गुजर रही है. इसे सोनाबंदी का नाम दिया जा सकता है. क्योंकि यह ठीक नोटबंदी जैसी ही योजना है. जैसी नोटबंदी थी वैसी ही यह गोल्ड डिमोनेटाइजेशन होगी.

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हम एक बड़ी आर्थिक मंदी के मुहाने पर खड़े है और इस मंदी की तुलना सिर्फ एक ही घटना से की जा सकती है. वह है 1930 का अमेरिका का ग्रेट डिप्रेशन. आपको जान कर बहुत ही ज्यादा आश्चर्य होगा कि उस महान मंदी से निपटने के लिए उस वक़्त अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट ने सभी सोने के बुलियन और सिक्कों को जब्त कर लिया था. और एग्जीक्यूटिव आर्डर (यहां क्लिक कर इस बारे में जानें) पास कर के नागरिकों को अपने सोने को बाजार दर से नीचे बेचने के लिए मजबूर कर दिया था. दरअसल इसे सोने का राष्ट्रीयकरण कहना अधिक सटीक है. सोना जब्त करने की इस कोशिश को अमेरिकी सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने की कोशिश ही माना गया और इससे अमेरिकी सरकार आर्थिक मंदी के दौर में अधिक डॉलर प्रिंट करने में सक्षम हो पायी थी. 1970 के दशक तक अमेरिका में सोने का स्वामित्व अवैध ही रहा.

ऐसा नहीं है कि समकालीन इतिहास में सरकार द्वारा सोने पर प्रतिबंध लगाने की घटना यह घटना अनोखी थी. 1959 में, ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने एक कानून बनाया. जिसमें निजी नागरिकों से सोने की बरामदगी की अनुमति दी गयी.

1966 में, पाउंड में गिरावट को रोकने के लिए, ब्रिटेन की सरकार ने नागरिकों को चार से अधिक सोने या चांदी के सिक्कों के मालिक होने पर प्रतिबंध लगा दिया था. और सोने के निजी आयात को अवरुद्ध कर दिया था. 1979 में यह आदेश निरस्त किया गया.

इतिहास में भी देखें तो देश-दुनिया में जब आर्थिक संकट गहराता है तो निवेशकों के लिए निवेश की पहली पसंद सोना ही बनता है. आज की तारीख में सोने का भाव रेकॉर्ड तोड़ 53 हजार रुपये प्रति दस ग्राम के पार चले जाना वित्तीय असुरक्षा एवं आर्थिक असंतुलन को दर्शा रहा है. साथ ही यह सरकारों को भी मजबूर कर रहा है कि वह कुछ ऐसे कदम उठाये जो बेहद आपात स्थिति में उठाये जाते हैं.

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अब भारत में इस वक्त क्या हो रहा है वह समझिए. वित्त मंत्रालय भारत में गैरकानूनी रूप से घरों में रखे हुए सोने के ऊपर एमनेस्टी प्रोग्राम लाने का विचार कर रहा है. इस प्रोग्राम के जरिए सरकार टैक्स चोरी और सोने के आयात में कमी लाना चाहती है.

इस प्रस्ताव में कहा गया है कि सरकार लोगों से अपील करे कि वह गैरकानूनी रूप से रखे हुए सोने के बारे में टैक्स विभाग को जानकारी दे. इसके लिए उन्हें लेवी या पेनल्टी देनी होगी. सरकार के साथ इस प्रस्ताव पर काम करनेवाले अधिकारियों के मुताबिक लोग अपने पास रखे गोल्ड का ब्यौरा देंगे. तो उन्हें कानूनी रूप से सोने का एक हिस्सा सरकार के पास कुछ वक्त के लिए रखना होगा ( यह खबर हिन्दी दैनिक पत्रिका की है)

वर्ष 2015 में भी कुछ इसी तरह का प्रस्ताव के बारे में चर्चा हुई थी. वैसे अभी यह प्रस्ताव अपने शुरुआती चरण में ही है और सरकार फिलहाल संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर इसे लागू करने के लिए उठाये जानेवाले कदमों पर विचार कर रही है.

डिस्क्लेमरः यह लेखक के निजी विचार हैं.

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