न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

जीवन वेद : नैतिकता सामंजस्यपूर्ण जीवन बिताने का प्रयत्न

610

श्री श्री आनंदमूर्ति जी

नैतिकता साधना की आधार भूमि है. पर यह याद रखना चाहिए कि नैतिकता साधक का चरम लक्ष्य नहीं है और Moralist (नीतिवादी) होना दूसरों के लिए भले ही चरम आदर्श हो पर साधक के लिए जीवन में कोई महत्वपूर्ण अवस्था नहीं है. साधना के प्रारंभ में ही मानसिक सामंजस्य की आवश्यकता होती है. इसी मानसिक सामंजस्य का नाम नैतिकता या Morality है.

बहुत बार लोग कहते हैं, मैं धर्म- कर्म कुछ नहीं समझता, सत्य के पथ पर रहूंगा, किसी का नुकसान नही करूंगा, झूठ नही बोलूंगा — बस इतना ही यथेष्ट है और इससे अधिक कुछ करने की या सीखने की आवश्यकता नहीं है. नैतिकता सामंजस्यपूर्ण जीवन बिताने का प्रयत्न है. इसे स्थिर शक्ति कहने की अपेक्षा गतिशील शक्ति कहना कहीं ठीक होगा, क्योंकि इसमें प्रतिक्षण अपने अंदर के विरोधी भावों के विरुद्ध लड़कर बाहरी साम्य ठीक रखना पड़ता है.

इसे भी पढ़ें- राज्य प्रशासनिक सेवा के 19 अधिकारियों का आईएएस में प्रमोशन

यह अंदर और बाहर की साम्यवस्था नहीं है. बाहर के प्रलोभन में पड़कर यदि भीतरी असाम्य खूब बढ़ जाय और इस कारण मानसिक विकृति उग्र भाव से दिख पड़े, तो लड़ने की भीतरी शक्ति भी हार जा सकती है और फलस्वरूप बाहरी साम्य या दिखावटी नैतिकता किसी भी क्षण टूट
जा सकती है. इसलिए नीतिवाद कोई लक्ष्य तो नहीं है, कोई स्थिर शक्ति भी नहीं. नीतिवादी कि नीति तो किसी भी क्षण नष्ट हो जा सकती है. जो नीतिवादी दो रुपये का घूस का लोभ रोक सका है, वह दो लाख रुपये घूस का भी लोभ रोक सकेगा यह बात बात दृढ़तापूर्वक नहीं कही जा सकती. इतना होने पर भी मनुष्य के जीवन में नीतिवाद एकदम मूल्यहीन नहीं है. नीतिवाद अच्छे नागरिक का लक्षण है और साधना –
मार्ग की तो यहां से यात्रा प्रारंभ होती है.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Comments are closed.

%d bloggers like this: