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SC कलीजियम के यू टर्न से विवाद, 32 न्यायाधीशों की वरिष्ठता की अनदेखी को लेकर राष्ट्रपति को पत्र

NewDelhi :  SC कलीजियम इन दिनों सुर्खियों में है; बता दें कि SC द्वारा दो हाई कोर्टों के चीफ जस्टिसों को SC का जज नियुक़्त किये जाने की सिफारिश किये जाने के बाद यू-टर्न लेने और उनके स़्थान पर दो अन्य हाई कोर्ट के चीफ जस्टिसों को SC जज बनाने की सिफारिश किये जाने पर विवाद हो गया है. बता दें कि कलीजियम राजस्थान और दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिसों प्रदीप नंद्राजोग और राजेंद्र मेनन को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश से पीछे हट गया है और उनकी जगह पर कर्नाटक हाई कोर्ट के सीजे दिनेश माहेश्वरी और दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना को सुप्रीम कोर्ट जज बनाने की सिफारिश की है. इस संबंध में दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर ने 32 न्यायाधीशों की वरिष्ठता की कथित अनदेखी करते हुए न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना को SC में भेजे जाने की सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के खिलाफ राष्ट्रपति को एक पत्र लिखा है.  

इसमें इस बात का जिक्र किया गया है कि न्यायमूर्ति खन्ना दिवंगत न्यायामूर्ति एचआर खन्ना के भतीजे हैं, जिन्होंने आपातकाल के दौरान असहमति वाला एक फैसला दिया था जिसके बाद उनकी वरिष्ठता को नजरअंदाज करके किसी और को प्रधान न्यायाधीश बनाया गया था. पत्र में कहा गया है कि जिस तरह से न्यायमूर्ति एचआर खन्ना की वरिष्ठता को नजरअंदाज कर अन्य न्यायाधीश को प्रधान न्यायाधीश बनाये जाने को भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में काला दिन बताया जाता है उसी तरह 32 न्यायाधीशों की वरिष्ठता की अनदेखी करके न्यायमूर्ति संजीव खन्ना को न्यायाधीश बनाया जाना एक और काला दिन होगा.   

  पांच सदस्यीय कलीजियम के यू-टर्न से सुप्रीम कोर्ट के कई जज नाराज

 जान लें कि सीजेआई रंजन गोगोई की अगुवाई वाले पांच सदस्यीय कलीजियम के इस  यू-टर्न से सुप्रीम कोर्ट के कई जज नाराज हैं और सांस्थानिक फैसले की रक्षा के तरीकों को लेकर चर्चा कर रहे हैं. वे नहीं चाहते कि कलीजियम द्वारा लिये गये फैसले से कहीं से भी यह संकेत जाये कि ये सदस्यों के व्यक्तिगत पसंद से प्रभावित है. टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के जज संजय कौल राजस्थान हाई कोर्ट के सीजे नंद्राजोग को नजरअंदाज किये जाने के खिलाफ पहले ही लिखित आपत्ति दर्ज करा चुके हैं. खबरों के अनुसार कलीजियम को लिखे पत्र में कौल ने कहा है कि नंद्राजोग उन सभी जजों में सबसे वरिष्ठ हैं . उन्होंने कहा कि नंद्राजोग को नजरअंदाज करने से गलत संकेत जायेगा.  कौल ने लिखा है, नंद्राजोगसुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के लिए सर्वथा उपयुक्त हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार सुप्रीम कोर्ट कलीजियम ने माहेश्वरी और खन्ना को सुप्रीम कोर्ट जज बनाने की सिफारिश की है. बता दें कि  12 दिसंबर को सीजेआई गोगोई की अध्यक्षता और जस्टिस मदन बी  लोकुर, जस्टिस ए के सीकरी, जस्टिस एस. बोबडे और जस्टिस एन वी. रमन्ना की सदस्यता वाले कलीजियम की बैठक हुई थी.

  बैठक में नंद्राजोग और मेनन को सुप्रीम कोर्ट जज के रूप में नियुक्ति की सिफारिश का फैसला किया गया. इस पर पांचों जजों ने साइन कर दिया. लेंकिन जब सीजेआई को जानकारी मिली  कि कलीजियम की सिफारिश राष्ट्रपति को भेजे जाने से पूर्व ही मीडिया में लीक हो गयी है तो वह नाराज हो गये. उसके बाद सीजेआई पुनर्विचार के लिए 5 और 6 जनवरी को कलीजियम की बैठक आहुत की. लेकिन  जस्टिस लोकुर रिटायर हो चुके थे और उनकी जगह जस्टिस अरुण मिश्रा पैनल में शामिल हो चुके थे. जानकारी के अनुसार  बैठक में नंद्राजोग की अगुआई वाली एक बेंच के फैसले के कुछ हिस्सों पर भी चर्चा हुई, तब नंद्राजोग दिल्ली हाई कोर्ट में थे.  

 सुप्रीम कोर्ट ने अपनी वेबसाइट पर इस मामले में सफाई भी है  

एफ होफमैन-ला रोच लिमिटेड बनाम सिपला लिमिटेडकेस में हाई कोर्ट के फैसले में 35 पैराग्राफ 2013 के एक आर्टिकल से उठाये गये थे.  जस्टिस नंद्राजोग और जस्टिस मुक्ता गुप्ता की बेंच ने बाद में इस पर गलती मानी थी कहा था कि एक लॉ क्लर्क ने उन पैराग्राफ्स को फैसले में डाल दिया था.  दोनों ने कॉपी करने के लिए 2013 के आर्टिकल के लेखकों से माफी भी मांगी और फैसले से उक्त 35 पैराग्राफों को हटा दिया. शायद यही वजह रही कि 5 और 6 जनवरी को जब कलीजियम की बैठक हुई तो सदस्यों ने पुराने फैसले को बदलने का फैसला किया. बता दें कि अब कलीजियम द्वारा अचानक यू-टर्न लेने खासकर नंद्राजोग के नाम की सिफारिश पलटने से वकीलों और दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज नाराज हैं. इस क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने अपनी वेबसाइट पर इस मामले में सफाई भी दी है.   

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