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‘केन्द्र की योजनाएं श्रमिक विरोधी, संसद सत्र के दौरान वाम श्रमिक संघ राज्य में करेंगे विरोध प्रदर्शन’

रांची. संसद सत्र के दौरान केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की ओर से देशव्यापी विरोध कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा. राज्य के श्रमिक और ट्रेड कर्मचारी संघ भी इसके समर्थन में विरोध कार्यक्रम करेंगे. जो राज्य स्तर पर होगा. जिसमें श्रमिक संघ भी 
शामिल होंगे. इस संबध में वाम श्रमिक और ट्रेड यूनियनों की बैठक शुक्रवार को की गयी. बैठक में मजदूर और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए.

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इसकी जानकारी देते हुए केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, श्रमिक फेडरेशनों और कर्मचारी एसोसिएशनों की ओर से प्रकाश विप्लव ने बताया कि संसद सत्र 23 सिंतबर से है. ऐसे में बड़े पैमाने पर मोदी सरकार के श्रमिक और किसान विरोधी नीतियों के 
खिलाफ प्रदर्शन किया जायेगा. केंद्र सरकार लगातार श्रमिक और किसान विरोध निर्णय ले रही है. श्रम कानूनों को बदला जा रहा है, किसानों के लिए नयी तीन अध्यादेश पारित की गयी है. जो पूरी तरह किसान और श्रमिकों के विरूद्ध है.

लोकसभा स्पीकर के नाम सौंपा जायेगा ज्ञापन

प्रकाश ने बताया कि बैठक में राज्य में विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया है. कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए प्रखंड और अनुमंडल स्तर पर यह कार्यक्रम होंगे. सभी सार्वजनिक स्थानों पर विरोध प्रदर्शन कर उपायुक्त, अनुमंडल 
पदाधिकारी आदि को लोकसभा स्पीकर के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा. प्रकाश ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार किसान और श्रमिकों के विरोध में निर्णय ले रही है. 44 श्रम कानूनों को बदल कर चार श्रम कोड बनाया गया. श्रम कानून को केंद्र 
सरकार ने एक झटके में खत्म करने की दिशा में है.

किसान विरोधी अध्यादेश

वहीं, जून में किसान और कृषि विरोधी तीन अध्यादेश का पारित किया. पर्यावरण आंकलन के लिये बने सभी कानूनी प्रावधानों को भी समाप्त करने की कोशिश की जा रही है. ऐसे में जनता से जुड़ी क्षेत्रों को कॉरपोरेट आकाओं को सौंपने की 
कोशिश की जा रही है. ऐसा कर केंद्र सरकार देश की खनिज संपदा और भूमि संबधी अड़चनों को दूर करेगी और खेती जैसे जनहित कार्यों को भी कॉरपोरेट घरानों को सौंपा जा सकता है.

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