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कृषि और श्रम कानूनों में बदलाव के विरोध में वामदल 26 को करेंगे राष्ट्रव्यापी हड़ताल

  • पूर्व सांसद भुवनेश्वर मेहता बोले, निम्न वर्ग को कमजोर कर रही सरकार

Ranchi: राष्ट्रीय संपदा की लूट के खिलाफ लोगों को एकजूट होना होगा. कॉरपोरेट कंपनियों को बसाने और निजीकरण को बढ़ावा देने के लिये केंद्र सरकार कानूनों में बदलाव कर रही है. पिछले कुछ दिनों में लगातार कई कानूनों में बदलाव किया गया. ये बातें वामदलों की संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में कही गयी.

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27 नवंबर को करेंगे विरोध प्रदर्शन

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सीपीआई के पूर्व सांसद भुवनेश्वर मेहता ने कहा कि श्रम और कृषि कानूनों में बदलाव कर केंद्र सरकार देश के निम्न वर्ग को कमजोर करना चाह रही है. ऐसे कानूनों में बदलाव कर सिर्फ मालिकों के पक्ष में निर्णय लिये जा रहे है. उन्होंने कहा कि केंद्रीय किसान संगठनों ने 26 नवंबर को देशव्यापी हड़ताल की घोषणा की है. इसमें राज्य के किसान संगठन बढ़ चढ़ कर शामिल होंगे.

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वहीं 27 नवंबर को भी इन कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जायेगा. जिस दौरान किसान संगठनों के राजभवन मार्च को समर्थन दिया जायेगा. इसके पहले वामदलों की संयुक्त बैठक की गयी थी.

कोरोना संक्रमण की आड़ में मजदूरों और किसान का हो रहा शोषण

सीपीआइएम के प्रकाश विप्लव ने कहा कि कोरोना महामारी की आड़ में केंद्र सरकार लगातार कानूनों में बदलाव कर रही है. ये कानून किसानों और मजदूरों से जुड़े है. लॉकडाउन के बाद से ही देखा जा रहा है कि सरकार कोरोना महामारी से निबटने के बजाय कानूनों में बदलाव करने में लगी है. जो सिर्फ कॉरपोरेट कंपनियों को बढ़ावा देने के लिये किया जा रहा है. ऐसे में जरूरी है कि केंद्रीय आह्वान का समर्थन करते हुए राज्य में भी इन विरोध प्रदर्शन में अधिक से अधिक लोग शामिल हो.

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विप्लव ने कहा कि 26 नवंबर के हड़ताल की तैयारी कर ली गयी है. जनता को इन कानूनों की जानकारी दी जा रही है. विरोध प्रदर्शन शहरी से लेकर ग्रामीण स्तर में किया जायेगा. इस दौरान शरीरिक दूरी का पालन करते हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की गयी. बैठक में सीपीआइएम, सीपीआइ, और सीपीआई माले के भुनेश्वर केवट मौजूद रहे.
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