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वामपंथी दलों ने दिया धरना, कहा- किसानों को बंधुआ मजदूर बनाने के लिए बने हैं नये कृषि कानून

मंडी खत्म होने से खाद्य सुरक्षा कानून के प्रभावित होने की जाहिर की चिंता

Jamtara : नये कृषि कानूनों और बिजली संशोधन बिल-2020 को वापस लेने की मांग करते हुए वामपंथी दलों ने सोमवार को एक दिवसीय धरना दिया. एसडीओ कार्यालय परिसर में धरना देकर मोदी की तानशाही नहीं चलेगी, किसान विरोधी कानून वापस लो सहित अन्य नारे लगाये.

इससे पूर्व गांधी मैदान से वामपंथी दल रैली निकालकर अनुमंडल कार्यालय परिसर तक पहुंचे, जहां धरना दिया गया. मौके पर झारखंड राज्य किसान सभा के महासचिव सुरजीत सिन्हा ने कहा कि किसानों को बंधुआ मजदूर बनाने के लिए नये कृषि कानून बनाये गये हैं. मोदी सरकार शुरू से किसान, मजदूर विरोधी रही है.

यह सरकार सिर्फ कॉरपोरेट घरानों को खुश करने के लिए ही काम कर रही है. लेकिन, इन कानूनों को सरकार जब तक वापस नहीं लेती है, तब तक वामपंथी दल सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन चलायेंगे. दिल्ली में किसान 19 दिनों से सड़क पर धरना दे रहे हैं, लेकिन केंद्र की सरकार के कानों में अभी तक जूं तक नही रेंगी. किसान अपने कामकाज को छोड़कर सर्द रात काटने पर मजबूर हैं.

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जमाखोरों के हाथ में चला जायेगा सारा खाद्यान्न

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जामताड़ा जिला किसान सभा के संयुक्त सचिव चंडीदास पुरी ने आवश्यक वस्तु भंडारण अधिनियम, मंडी व्यवस्था को खत्म करने एवं कॉरपोरेट खेती के संबंध में वक्तव्य रखते हुए कहा कि यह कानून लागू होने से किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा. जमाखोरों के हाथ में पूरा खाद्यान्न चला जायेगा, जिसे वे ऊंचे दाम पर बेचकर आम जनता का शोषण करेंगे.

खाद्य सुरक्षा कानून भी होगा प्रभावित

उन्होंने कहा कि मंडी व्यवस्था खत्म होने से खाद्य सुरक्षा कानून प्रभावित होगा, जिससे आम जनता को सस्ती दर पर अनाज मुहैया कराना बंद हो जायेगा. एक डिजाइन के तहत मोदी सरकार द्वारा अडानी-अंबानी जैसे कॉरपोरेट के हित में ये काले कानून लाये गये हैं. इसकी पूरे देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी कड़ी निंदा की जा रही है. इस किसान आंदोलन को ऐतिहासिक विश्व स्तर के किसान विद्रोह के रूप में देखा जा रहा है.

धरना कार्यक्रम में कन्हाई माल पहाड़िया, सुकुमार बाउरी, सुनील राणा, लखन मंडल, साबिर हुसैन, गौर सोरेन, हरप्रसाद खां, सुजीत मांजी, इब्राहिम अंसारी, सचिन राणा, लोकनाथ राणा, गौतम कुमार रवानी, काली पद राय, सेनापति मुर्मू, महादेव हांसदा, मधुसूदन रवानी, सुशील महोली, देबू चौधरी, सुकुमार मिर्धा, विजय राना, हिरा कोल, बुद्धू मरांडी, दूबराज भंडारी, अरुण राणा, चौड़ा मरांडी, श्रीनाथ मरांडी, सुकुमार मंडल, बबलू दास सहित सीपीआई, सीपीआईएमएल व सीपीआईएम के नेता मौजूद थे.

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