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वामदलों का महागठबंधन से कोई सरोकार नहीं : गोपीकांत

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  • मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रदेश सचिव ने कहा- रुचि ही नहीं थी महागठबंधन में, राज्य में बिना किसी मकसद के ही बन गया है महागठबंधन
  • 17 जनवरी को हेमंत आवास में हुई महागठबंधन की बैठक में वामपंथी दल हुए थे शामिल

Ranchi : चुनावी सरगर्मी तेज है. भाजपा और महागठबंधन के बीच मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी समेत अन्य वामपंथी पार्टियों ने अपनी अलग राह बना ली है. जहां पूर्व में महागठबंधन के साथ चुनाव में शामिल होने की बात कही गयी थी, वहीं जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, वामपंथी पार्टी भी अपना रुख बदल रही है. बता दें कि 17 जनवरी को हेमंत सोरेन के आवास पर आयोजित महागठबंधन की बैठक में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मासस, माले नेता शामिल हुए थे, जहां वामपंथियों को सीट नहीं मिलने के कारण वामपंथियों ने महागठबंधन से अपने पैर खींच लिये. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव गोपीकांत बक्शी ने कहा कि उनकी पार्टी को महागठबंधन से कोई सरोकार नहीं है. बिना किसी मकसद के महागठबंधन राज्य में बना है. सीट देने, नहीं देने की कोई बात नहीं है. पार्टी की केंद्रीय लाइन भी यही है कि जिस राज्य की जैसी परिस्थिति होगी, वहां गठबंधन में शामिल होंगे. एक सीट देने की बात होगी, लेकिन इसकी जानकारी उनकी पार्टी को नहीं है.

थर्ड फ्रंट का सवाल नहीं

गोपीकांत ने कहा कि राज्य में थर्ड फ्रंट पर चुनाव लड़नेवाली कोई बात नहीं है. फ्रंट उसे कहते हैं, जिसमें साझा कार्यक्रम के तहत चुनाव लड़ा जाये. राज्य में भाजपा हो या महागठबंधन, दोनों का अपना कोई साझा कार्यक्रम नहीं है. पार्टी यह कोशिश करेगी कि राज्य में वामपंथी सोच लाने की कोशिश की जाये. जहां तक सीटों की बात है, पार्टी ने पहले भी कहा है कि सीटों का बंटवारा कम हो, यही कोशिश रहेगी.

दरकिनार करनेवाली बात नहीं, रुचि ही नहीं थी

गोपीकांत बक्शी ने कहा कि महागठबंधन द्वारा वामपंथियों को दरकिनार करनेवाली कोई बात नहीं है. जब वामपंथियों की गठबंधन में रुचि ही नहीं थी, तो हेमंत सोरेन के आवास पर भी मार्क्सवादी पार्टी की ओर से कहा गया था कि हमारा कोई सरोकार नहीं. अब वामपंथी पार्टियां एक होकर चुनाव में शामिल होंगी.

13 फरवरी को वामपंथियों की होगी बैठक

उन्होंने बताया कि तमाम वामपंथी दलों की बैठक 13 फरवरी को की जायेगी. उसके बाद वामपंथी दल सीटों और प्रत्याशी का नाम घोषित करेंगे. इसके पूर्व कोई जानकारी नहीं दी जा सकती. फिलहाल वामपंथी पार्टियां अपनी-अपनी बैठक कर रही हैं.

वामपंथी इन सीटों को कर सकते हैं प्रभावित

पहले से वामपंथियों की पकड़ राजमहल, धनबाद और कोडरमा में है. इन जगहों पर चुनाव परिणाम को ये पार्टियां प्रभावित कर सकती हैं. 2009 में कोडरमा सीट पर राजकुमार यादव को एक लाख 50 हजार वोट मिले थे. 2014 में राजकुमार यादव को दो लाख 67 हजार वोट मिले थे.

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