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पांचवीं अनुसूची पर 10 नवंबर को RU में होगा व्याख्यान

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Ranchi : राज्य में जल, जंगल, जमीन से संबंधित संघर्ष और आंदोलन वर्षों से चले आ रहे हैं. वहीं, देश की आजादी के बाद संविधान प्रदत्त अधिकार राज्य के आदिवासियों को मिले हैं, जिनमें जमीन से संबंधित अधिकारों के अलावा कई अन्य अधिकार भी शामिल हैं. वहीं, पांचवीं अनुसूची में भी आदिवासी इलाके के लिए विशेष प्रावधान किये गये हैं. इसे ध्यान में रखते हुए रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान की ओर से पांचवीं अनुसूची पर व्याख्यान का आयोजन किया गया है. व्याख्यान का आयोजन 10 नवंबर को आर्यभट्ट सभागार में दिन के 11 बजे से किया जायेगा. व्याख्यान का विषय संविधान की पांचवीं अनुसूची रखा गया है. इसमें सभी जिलों के उपायुक्तों को व्याख्यान में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है. जनजातीय क्षेत्रों के उपायुक्तों को विशेष तौर पर आमत्रंण दिया गया है, जिसमें रांची, खूंटी, गुमला, लोहरदगा, दुमका, सिमडेगा, पश्चिमी सिहंभूम, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, जामताड़ा, पाकुड़, लातेहार, साहेबगंज, गढ़वा, गोड्डा, पलामू शामिल हैं.

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ग्रामस्तरीय प्रतिनिधि भी होंगे शामिल

व्याख्यान में जिला उपायुक्तों के साथ ग्राम प्रतिनिधियों को भी आमंत्रण दिया गया है. इसमें पांचवीं अनुसूची क्षेत्र के जिला पंचायत राज पदाधिकारी, सहायक निदेशक, जिला परिषद्, मास्टर प्रशिक्षक, बेकन पंचायत पर कार्य कर रहे स्वयंसेवी संस्थाओं को उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है. इस दौरान संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत आदिवासियों के अधिकारों और उनके क्षेत्र अधिकारों पर चर्चा की जायेगी.

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कई आंदोलनों में पांचवीं अनुसूची का जिक्र हो चुका है

राज्य में समय-समय पर विभिन्न संस्थाओं की ओर से ऐसे आयोजन किये जाते रहे हैं, लेकिन फिर भी आदिवासी अपने क्षेत्र और अपने अधिकार से वंचित हैं. कई इलाकों में बिना पंचायत की अनुमति के जंगलों को काटा जा रहा है और जमीनों को हड़पा जा रहा है. पांचवीं अनुसूची के अधिकारों को लेकर छोटानागपुर से संतालपरगना तक आंदोलन होता रहा है. सीएनटी-एसपीटी को संशोधित कर लागू करने के समय में भी कई संगठनों ने पांचवीं अनुसूची की उपेक्षा की बात की थी, वहीं खूंटी में पत्थलगड़ी के समय में भी पांचवीं अनुसूची का हवाला दिया गया था.

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