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अफीम छोड़कर गांवों में अब चना उगा रहे किसान, खूंटी पुलिस की जागरुकता अभियान का असर

Chandi Dutta Jha

Ranchi: अफीम और उग्रवाद के लिए बदनाम खूंटी में लोग अब जागरुक हो रहे है. अफीम की खेती छोड़ लोग पारंपरिक और नकदी फसलों की तरफ रुख कर रहे हैं. पहले जिन गांवो में अफीम लहलहाती थी, वहां अब चने लहलहाती नजर आयेगी. खुंटी पुलिस द्वारा लोगों को अफीम खेती को लेकर जागरुकता अभियान अब सफल होती नजर आ रही है. लोग अब खुद से अफीम नष्ट कर फसल उगाने में जुटे है. इसका उदाहरण है अड़की थाना क्षेत्र स्थित बांधगड़ा और हारुमल गांव जहां लोग पुलिस के जागरुकता अभियान से प्रेरित होकर खुद अफीम के फसल को नष्ट कर चना बो रहे है. इस शुरुवात का असर अब अगल बगल के खेतो में भी देखने को मिलने लगा है. अगल-बगल के खेत वाले भी खेत में लगे अवैध अफीम की खेती को भी नष्ट किया जा रहा है, ग्रामीण बचे हुए खेतो में लगे अवैध अफीम नष्ट कर चने की खेती की तैयारी में है.
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फसलों की तरफ रुख कर रहे किसान

खूंटी जिले के कई गांव नशीली खेती के लिए बदनाम था, लेकिन आज इन्हीं खेतों में चना जैसी फसल लहलहा रही है. यहां के किसानों ने अफीम की खेती छोड़ फसलों की तरफ भी रुख किया है. खूंटी जिले के कई इलाके में अफीम की अवैध खेती की जाती है. लेकिन जिला के पुलिस प्रशासन ने भी अफीम की अवैध खेती के खिलाफ नीतिगत तरीके से काम रही है, जिसके परिणामस्वरूप लोग खुद अफीम की खेती छोड़ अन्य फसलों का दामन थाम रहे है. जिले में अफीम की खेती की सूचना एकत्रित कर क्रमवार उसे नष्ट करने की जा रही है, इसके लिए कई टीम बनायी गयी है. जो लगातार इलाके के अफीम की खेती को चिन्हित कर नष्ट करने का काम कर रही है. वही दूसरी तरफ पुलिस की एक टीम लगातार लोगों को जागरुक करने में जुटी है. जिसका परिणाम है कि लोग खुद से फसल नष्ट कर अन्य फसलो में रुचि ले रहे हैं. पिछले कई सालों के मुकाबले इस साल कम मात्रा में अफीम की खेती की गयी है. कई ऐसे पंचायत है जहां एक भी अफीम की खेती नही की गयी है.

पुलिस लगातार इलाके में चला रही जागरुकता अभियानः एसपी

खूंटी एसपी अमन कुमार ने बताया कि खूंटी जिले के विभिन्न इलाकोंं में पुलिस टीम लगातार अफीम को लेकर जागरूकता अभियान चला रही है. जागरुकता अभियान के दौरान ग्रामीणों को अफीम की खेती का दुष्परिणाम एवं कानूनी जानकारी दी जाती है. उपस्थित ग्रामीणों समझाया जाता है कि अफीम एवं पोस्ता की खेती ना करें. इससे काफी नुकसान होता है. कानून में इसकी कड़ी सजा का प्रावधान है. इस अभियान का सकारात्मक असर अब दिख रहा है, लोग अब खुद खेती नष्ट कर अन्य फसल लगाने में रुचि लेने लगे हैं.

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