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कोरोना काल में वकीलों का दर्दः तंगहाली में बीती नवरात्रि, दीपावली में भी रोशनी की उम्मीद नहीं

Ranchi : सोनी नायक सिविल कोर्ट रांची में वकालत करते हैं. परिवार में दो बच्चे और पत्नी हैं. उनका कहना है कि हम लोगों के लिए खास और आम, सभी दिन एक समान हो गये हैं. पिछले साढ़े 6 महीने से आमदनी बंद है. दुर्गा पूजा का समय है. कुछ दिनों के बाद दीपावली भी आनेवाली है. पर इस बार त्योहारों में कोई उमंग नहीं है. बच्चों को नये कपड़े चाहिए पर हम नहीं ले पा रहे हैं. न अच्छा खाना खा सकते हैं न कहीं घूम सकते हैं. आपातकाल के लिए जो पैसे बचा कर रखे थे, वह भी खत्म होने के कगार पर हैं. ऐसे में क्या करें कुछ समझ नहीं आ रहा.

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राज्य में हैं 38,000 अधिवक्ता

यह कहना सिर्फ सोनी नायक का ही नहीं बल्कि राज्य के ज्यादातर अधिवक्ताओं का है. राज्य में अधिवक्ताओं की संख्या लगभग 38,000 है. सिविल कोर्ट रांची में तकरीबन 3000 अधिवक्ता प्रैक्टिस करते हैं. कोविड की वजह से 22 मार्च के बाद से ही अदालतों में काम बंद हो गया था. पिछले कुछ समय से कोर्ट में सुनवाई हो रही है पर वर्चुअल माध्यम से इसमें भी गिने-चुने अधिवक्ता ही भाग ले पा रहे हैं. अदालतों में बहस के अलावा कई और तरह के काम अधिवक्ताओं के जरिए निपटाये जाते थे, वे सब अब बंद हैं. दुर्गा पूजा और छठ तक सिविल कोर्ट बंद रहेगा. ऐसे हालात में अधिवक्ताओं के समक्ष गंभीर आर्थिक संकट आ गया है. उनके सामने फिलहाल राहत की कोई उम्मीद नहीं है.

साढ़े छह माह में मात्र ₹4000 की मदद

रांची जिला बार एसोसिएशन की ओर से कोविड के समय में अधिवक्ताओं को ₹4000 की मदद दी गयी. यह मदद नाकाफी है. ज्यादातर अधिवक्ताओं की हालत काफी ज्यादा खराब हो चुकी है. जो किराये के मकान में रहते हैं उनके पास न तो किराया चुकाने के पैसे हैं और न ही राशन दुकान का उधार चुकाने को. अब तो दुकानदारों ने भी उधार देना बंद कर दिया है. सोनी नायक का कहना है कि सरकार गरीबों को एक रुपये में चावल उपलब्ध कराती है. उन गरीबों की हालत भी हमसे बेहतर है क्योंकि उन्हें राशन तो मिल पा रहा है. हमें न तो राशन मिल रहा है और न ही हम किसी से अपनी परेशानी कह पा रहे हैं.

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कैसे सुधरेगी हालत

जब तक फिजिकल कोर्ट नहीं खुलते तब तक अधिवक्ताओं के हालात नहीं सुधर सकते हैं. दिल्ली में तो अधिवक्ताओं ने कोर्ट खोलने की मांग को लेकर प्रोसेशन भी निकाला है. राज्य के अधिवक्ताओं ने भी बार काउंसिल से फिजिकल कोर्ट खोलने की मांग की है. काउंसिल के चेयरमैन को जिम्मेदारी दी गयी है कि वह चीफ जस्टिस से मुलाकात कर फिजिकल कोर्ट खोलने की अपील करें.

क्या कहते हैं पदाधिकारी

बार काउंसिल के सदस्य सह पूर्व सचिव रांची जिला बार एसोसिएशन के संजय विद्रोही कहते हैं कि यह समय अधिवक्ताओं के लिए सबसे बुरा है. लगभग 90% अधिवक्ता आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं. दुर्गा पूजा अधिवक्ता काफी धूमधाम से मनाया करते थे. मगर इस बार बस बेबसी है. ऐसा लगता है कि राजनेता, सांसद, विधायक और सरकारी नौकरी करनेवाले ही खुशहाल हैं और अधिवक्ताओं की हालत शायद सबसे ज्यादा खराब है.

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