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बिना श्रमिक संघों की सहमति के केंद्रीय कैबिनेट ने पास कर दिया श्रम सुधार कानूनः यूनियन

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  • श्रमिक संघ बता रहे कानून को मजदूर विरोधी, कहा मालिकों के हक में है कानून
  • 44 श्रम कानून को बदलकर बनाये गये हैं चार श्रम कोड
  • आजादी के समय से देश में लागू थे ये कानून

Ranchi:  दो जनवरी को केंद्रीय मंत्रीमंडल के कैबिनेट ने चार श्रम कोड, जिसका नाम श्रम सुधार कानून रखा गया है, उसे मंजूरी दे दी. 44 श्रम कानूनों को बदल कर चार श्रम कोड में बदला गया है. जिसके बाद से श्रमिक संघों में काफी असंतोष देखा जा रहा है. देश के प्रमुख श्रमिक संघों का कहना है कि सरकार ने बिना श्रमिक नेताओं से बात किये कानून में बदलाव कर दिया है. जबकि ये कानून देश की आजादी के समय से मजदूरों के हित में हैं. इनका कहना है कि बिना श्रमिक संघों को जानकारी दिये सरकार ने बिल को मंजूरी दे दी. जो मजदूरों के हित में नहीं है. औैद्योगिकीकरण के लिए सरकार देश में मजदूरों को गुलाम बनाने का काम कर रही है.

नाम के लिए बुलाई गयी ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक

: हालांकि सरकार की ओर से देश के प्रमुख श्रमिक संघों की बैठक कई बार बुलायी गयी. जिसमें श्रमिक संघों ने श्रम कानून को बदल कर चार कोड करने पर आपत्ति जतायी थी. साथ ही सरकार को देश में मजदूरों की स्थिति ठीक करने के लिए अपने सुझाव दिये थे. लेकिन इन सभी सुझावों को ताक पर रख कर सरकार ने श्रम कोड को कैबिनेट में पास कर दिया.

बीएमएस ने भी जतायी थी आपत्ति

एटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेंद्र कुमार और इंटक के राष्ट्रीय सचिव अनुप सिंह ने जानकारी दी कि श्रम कोड को लेकर पूर्व में श्रम मंत्रालय की ओर से श्रमिक युनियनों की बैठक बुलाई गयी गयी थी. जिसमें सभी मजदूर संघों ने कोड पर आपत्ति दर्ज की थी. सिर्फ विपक्ष के मजदूर संघों न ही नहीं, बल्कि भारतीय मजदूर संघ ने भी इस पर आपत्ति जतायी. लेकिन एकाएक बीएमएस ने सरकार का पक्ष लेना शुरू कर दिया. अनुप सिंह ने जानकारी दी कि मजदूरों के किसी भी मामले में बीएमएस अन्य संघों के साथ मिलकर कार्य नहीं करता है.

मजदूर संघों का अस्तित्व समाप्त कर देगा नया कानून

पूर्व की कई बैठकों में शामिल हो चुके सीटू के राष्ट्रीय महासचिव तपन सेन ने जानकारी दी कि कैबिनेट में श्रम कोड पास करने के पूर्व सरकार की ओर से कोई बैठक नहीं कि गयी. पहले कुछ बैठक बुलायी गयी थी. वो भी काफी जल्दी में. लेकिन किसी भी बैठक में मजदूर संघों ने कोड पास करने पर सहमति नहीं जतायी थी. क्योंकि कानून पूरी तरह से मजदूर संघों और मजदूरों के अधिकारों को समाप्त करने वाला है.

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क्या है श्रम कोड में

नियत अवधि के लिए बहाली

स्थायी नहीं, बल्कि नियत अवधि के लिए बहाली की जायेगी. कोड के लागू होने पर बहाली डेढ़ साल, तीन साल, पांच साल के लिए की जायेगी. किसी कंपनी में वही मजदूर यूनियन सक्रिय रहेंगे, जिसे कंपनी स्वीकृत करेगी. कंपनी की मर्जी होने पर मजदूरों या कर्मचारियों से दस से बारह घंटे काम लिया जा सकता है.

रिट्रेचमेंट ले ऑफ को हटाना

इसके आधार पर कर्मचारियों को दोबारा कंपनी में नहीं रखा जायेगा. श्रम कोड के बाद कम से कम 50 कर्मचारी किसी भी कार्यस्थल पर रहेंगे, जबकि पहले 20 कर्मचारी होने पर कार्यस्थल को प्रमाणित किया जाता था. इनके अलावे कोड में और भी मजदूर विरोधी प्रावधान हैं.

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