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नियमों धज्जियां उड़ाते धड़ल्ले से चल रहे हैं बूचड़खाने, प्रशासन मौन

बुचड़खाना संचालकों ने कहा ‘जहां ग्राहक ही नहीं पहुंचेंगे, वहां दुकान खोलकर करेंगे क्‍या

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Dhanbad: जिले में जिस रफ्तार से नगर निगम प्रशासन ने बूचड़खाना के के खिलाफ कार्रवाई की गई थी, उससे लोगों के बीच एक भय का माहौल उत्पन्न हो गया था. सभी संचालक तय नियमों के अनुसार बूचड़खाने चलाने लगे. जो नियम के अनुसार नहीं चला पाये उन्‍होंने अपनी दुकानें बंद करने में ही भलाई समझी. जबकि  प्रत्येक दिन की कमाई अच्छी-खासी रहने के बावजूद भी प्रशासन की कार्रवाई को देखते हुए वे नियम के विरुद्ध नहीं गये और उन्‍होंने अपनी दुकानों को ही बंद कर दी. धीरे-धीरे यह कार्रवाई इतनी तेजी से फैल गयी कि पूरे जिले में खलबली मच गयी. इस दौरान मटन, चिकेन के दाम भी बेतहाशा बढ़े. फिर कुछ दिनों बाद निगम प्रशासन की ओर से होने वाली कार्रवाईधीरे-धीरे धीमी पड़ गई और देखते ही देखते एक-एक कर बूचड़खाने फिर से खुलने लगे. अब ये बुचड़खाने फिर से यहां तय नियमों की धज्जियां उड़ाने लगे हैं.

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यूपी के बाद झारखंड में हुई थी बूचड़खानों पर कार्रवाई

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यूपी में बीजेपी राज आने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने जिस कदर अवैध बूचड़खाने पर प्रतिबंध लगाना शुरु किया था. उससे वह मामला राष्‍ट्रीय स्‍तर पर सुर्खियों में आ गया था. यूपी की तर्ज पर झारखंड के सीएम रघुवर दास ने भी के सभी जिले के अधिकारी एवं नगर निगम के प्रशासन को सख्त निर्देश देते हुए कहा था कि जितने भी अवैध बूचड़खाने खुले में चल रही हैं, उसे बंद कर दिया जाय. आदेश मिलने के बाद अधिकारियों ने धड़ाधड़ कार्रवाई शुरू की. लेकिन कुछ दिनों में ही उस अभियान का अंत भी उतनी ही तेजी से हो गया.

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क्या कहते हैं नगर आयुक्त

नगर नगर आयुक्त मोहन कश्यप ने  कहना है कि जो  बूचड़खाने शहरों के बीचो-बीच एवं खुले में  हैं तो वह नहीं चलेंगी. अगर दुकानें अवैध रूप से चल रही है, तो इसकी जांच होगी. जांच में जो दोषी पाया जाएगा, उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

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क्या कहते हैं अपर नगर आयुक्त

अपर नगर आयुक्त महेश संथालिया ने कहा कि खुले में बूचड़खाने पर लगातार  छापेमारी चल रही है. रह गई बात खुले में मांस बेचने की तो प्रशासन अपना काम कर रहा है. जो दुकानें शहरों के बीचो-बीच अवैध रूप से चल रही है उसे बंद करा दिया जाएगा.

क्या कहते हैं व्यापारी

मटन विक्रेता  मोहम्मद यूसुफ ने बताया कि वर्षों से हमारी दुकान  शहरों के बीच ही चलता आ रहा है. लेकिन, प्रशासन ने ऐसे मापदंड तैयार किये, जिससे विक्रेता भुखमरी के कगार पर पहुंच गए. जहां ग्राहक ही नहीं पहुंचेंगे, वहां दुकान खोलकर क्या करेंगे.

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