National

#International_Judicial_Conference में कानून मंत्री ने कहा, शासन की जिम्मेदारी निर्वाचित प्रतिनिधियों पर छोड़ देनी चाहिए

विज्ञापन

NewDelhi :  सुप्रीम कोर्ट में न्यायपालिका और बदलती दुनिया विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सम्मेलन 2020 में केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने शनिवार को कहा कि शासन की जिम्मेदारी निर्वाचित प्रतिनिधियों और निर्णय सुनाने का काम न्यायाधीशों पर छोड़ देना चाहिए. न्यायिक सम्मेलन में कानून मंत्री ने कहा कि आतंकवादियों और भ्रष्ट लोगों को निजता का कोई अधिकार नहीं  है और ऐसे लोगों को व्यवस्था का दुरुपयोग नहीं करने देना चाहिए.  कहा कि लोकलुभावनवाद को कानून के तय सिद्धांतों से ऊपर नहीं होना चाहिए.  इससे पूर्व सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार सुप्रीम कोर्ट  में सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि व्यवस्था में परिवर्तन तर्कसंगत और कानून के अनुसार होना चाहिए. प्रधानमंत्री ने पर्यावरण न्यायशास्त्र को पुनर्परिभाषित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की सराहना करते हुए कहा कि न्यायपालिका ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन कायम किया है. मोदी ने कहा कि कोई भी देश लैंगिक न्याय सुनिश्चित किये बिना पूर्ण विकास हासिल नहीं कर सकता.

इसे भी पढ़ें : #Shaheen_Bagh_Protest-: सुलझने के बजाय उलझता जा रहा है मामला, सुप्रीम कोर्ट के वार्ताकारों के साथ चौथे दिन भी बातचीत बेनतीजा

1.3 अरब भारतीयों ने खुले दिन से  सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों को स्वीकारा

सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इन्हें 1.3 अरब भारतीयों ने खुले दिन से अपनाया है. उन्होंने कहा कि यह दुनिया भर में उल्लेखनीय परिवर्तनों का एक दशक होने जा रहा है, जो सभी सीमाओं, समाज, अर्थव्यवस्था व प्रौद्योगिकी, को प्रभावित करेगा और इन परिवर्तनों को तर्कसंगत और न्यायसंगत होने की आवश्यकता है.

प्रधानमंत्री ने  गांधीजी को लेकर कहा कि उनका जीवन सत्य और सेवा को समर्पित था, जो किसी भी न्यायतंत्र की नींव माने जाते हैं और हमारे बापू खुद भी तो वकील थे. अपने जीवन का पहला मुकदमे के बारे में गांधी जी ने बहुत विस्तार से अपनी आत्मकथा में लिखा है.

इसे भी पढ़ें : #Bihar बीजेपी कार्यकर्ताओं से बोले नड्डा- राज्य पर बना हुआ है पीएम मोदी का आशीर्वाद

भारत में एक समृद्ध परंपरा विकसित हुई है

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हर भारतीय की न्यायपालिका पर बहुत आस्था है. हाल में कुछ ऐसे बड़े फैसले आये हैं, जिनको लेकर पूरी दुनिया में चर्चा थी. फैसले से पहले अनेक तरह की आशंकाएं व्यक्त की जा रही थीं. लेकिन हुआ क्या? सभी ने न्यायपालिका द्वारा दिए गए इन फैसलों को पूरी सहमति के साथ स्वीकार किया.उन्होंने कहा कि तमाम चुनौतियों के बीच कई बार देश के लिए संविधान के तीनों पिलर ने उचित रास्ता ढूंढा है. हमें गर्व है कि भारत में इस तरह की एक समृद्ध परंपरा विकसित हुई है. पिछले पांच वर्षों में भारत की अलग-अलग संस्थाओं ने, इस परंपरा को और सशक्त किया है.

भारत एक मिली-जुली संस्कृति वाला देश है : CJI 

इस मौके पर CJI  एसए बोबडे ने कहा कि भारत एक मिली-जुली संस्कृति वाला देश है और इसमें मुगलों, डच, पुर्तगाली और अंग्रेजों की संस्कृतियों को आत्मसात किया गया है. CJI   एसए बोबडे ने महात्मा गांधी के उन शब्दों को याद किया कि यदि सभी अपना कर्तव्य निभाते हैं, तो उनके अधिकारों का ध्यान रखा जाता है. उन्होंने कहा, भारतीय संविधान के केंद्र में व्यक्ति था और व्यक्ति के अधिकारों को मान्यता दी गयी थी. कहा कि संविधान ने एक मजबूत और स्वतंत्र न्यायपालिका बनाई है और हम इस बुनियादी सुविधा को अक्षुण्ण रखने के लिए प्रयासरत हैं.

इसे भी पढ़ें : #AIMIM नेता वारिस पठान पर एफआइआर दर्ज, भड़काऊ बयान के खिलाफ एक्शन

Advertisement

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Articles

Back to top button
Close