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लातेहार : छह कमरों में तीन कमरे माओवादियों ने उड़ा दिये, एक से आठ कक्षा के बच्चों की पढ़ाई एक ही शिक्षक के जिम्मे

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Manoj Datta Dev

Latehar : केंद्र एवं झारखंड सरकार शिक्षा के क्षेत्र में लाख उपलब्धि का दावा कर ले, मगर धरातल पर यदि जांच की जाये, तो सच्चाई कल्पना से परे है. सरकार गांवों में शिक्षा का दीप जलाने कि बात करती है मगर देखें तो परिणाम  शून्य है. उदाहरण स्वरूप लातेहार जिला अन्तर्गत सुदूर हेरहंज प्रखंड का अति नक्सल प्रभावित एवं अति दूर ग्राम सेरेंदाग है. गांव में एक उत्क्रमित मध्य विधालय सेरेंदाग है. विदयालय के  तीन कमरों को माओवादियों ने स्कूल में पुलिस कैंप होने का आरोप लगा कर  दस अक्टूबर 2015 को विस्फोट कर उड़ा दिया था. अब बचे तीन कमरों में एक से आठ कक्षा तक के बच्चे पढ़ते हैं.

एक से आठ तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए मात्र दो ही शिक्षक हैं. तीन कमरों की कक्षा में मीड डे के अनाज की बोरियों,  सर्व शिक्षा अभियान की किताबों के बीच बच्चों को शिक्षक पढ़ाते हैं, इस हालत में स्वत: ही अनुमान लगाया जा सकता है कि स्कूल में किस स्तर की शिक्षा बच्चों को मिल रही है.

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क्या कहते हैं सेरेंदाग उत्क्रमित मध्य विदयालय के छात्र-छात्राएं

कक्षा छह की छात्रा रानी कुमारी एवं क्रांति कुमारी बताती है कि स्कूल में पहले छह कमरे थे, मगर माओवादियो ने तीन कमरे बम से उड़ा दिये थे, जिसके बाद से तीन कमरों में एक से आठ तक के छात्र-छात्राएं पढ़ने को विवश हैं.    हमारे कलास में कक्षा छह एवं दो के बच्चों को एक साथ बैठा कर शिक्षक पढ़ाते हैं. इस कारण कभी-कभी हमलोगों को भी छोटे बच्चों को पढ़ाना पड़ता है.  जब शिक्षक पढ़ाते हैं, तो हमें पहली दूसरी एवं आठवीं तीनों की पढ़ाई करनी पड़ती है.  स्कूल में जगह नहीं रहने के कारण अनाज व किताबो की बोरयों के बीच पढ़ना पड़ता है.

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प्रिंसिपल स्कूल के काम से हमेशा मीटिंग में रहते हैं

कक्षा आठ का छात्र पवन कुमार, अमित यादव, कक्षा सात का छात्र अमित रंजन यादव एवं दीनबंधु यादव ने बताया कि  दूसरी कक्षा के साथ सातवीं कक्षा के छात्रों को एक ही कमरे में शिक्षक पढ़ाते हैं, जिससे बहुत समस्या उत्पन होती है. पढ़ना-समझना कुछ होता है ओर शिक्षक पढ़ाते कुछ ओर ही हैं. स्कूल मे शिक्षकों की भारी कमी है.    प्रिंसिपल स्कूल के काम से हमेशा मीटिंग में रहते हैं.  एक पारा शिक्षक हैं, जैसे तैसे उन्ही से पढ़ते हैं. हर दिन हाजिरी भी नहीं बनती है. जब प्रिंसिपल आते हैं, तो महीना या एक दो सप्ताह की हाजिरी एक ही बार में बनती हैं .

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  एक मात्र पारा शिक्षक पढ़ाते हैं

उत्क्रमित मध्य विधालय सेरेंदाग के पारा शिक्षक प्रमोद गुप्ता बताते हैं कि स्कूल में तीन शिक्षक हैं. प्रिंसिपल ब्रह्मदेव गंझू मीटिंग गोष्ठी, मीड डे मील राशन आदि में व्यस्त रहते हैं, जिस कारण वे स्कूल में कम रहते हैं.   हाजिरी भी इसी कारण हर दिन नहीं बनती है. क्योंकि स्कूल का कागजात वे अपने साथ ही रखते हैं. बताया कि मेरे अलावा एक पारा शिक्षक नीरज कुमार हैं, मगर उनका डेपुटेशन दूसरे स्कूल में किया गया है. मैं अकेला शिक्षक ही सभी बच्चों को पढ़ाता हूं.  प्रमोद गुप्ता ने बताया कि स्कूल भवन की रिपोर्ट कई बार दी गयी है, मगर जिला प्रशासन की ओर से कोई कारर्वाई नहीं होती है.

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