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लातेहार : पूर्व डीजीपी राजीव कुमार को भूल नहीं पा रहे मुरहर  के ग्रामीण, आज भी इंतजार में हैं

विकास से कोसों दूर लातेहार जिले के मनिका प्रखंड का अति सुदूर एवं अति नक्सल प्रभावित मुरहर ग्राम के ग्रामीण झारखंड के पूर्व डीजीपी राजीव कुमार की तारीफ करते थकते नहीं हैं.

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Manoj Dutt Dev

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Latehar : नक्सल प्रभावित ग्रामीण इलाकों में  हमेशा पुलिस की बुराई सुनी जाती है. ग्रामीण पुलिस को कोसते नजर आते हैं पुलिस पर दमन शोषण, अत्याचार करने के आरोप लगते है. हालांकि पुलिस अपनी छवि को साफ सुथरा दिखाने के लिए सामुदायिक पुलिसिंग जैसा कार्यक्रम ग्रामीणों के बीच करती नजर आती है.  मगर ग्रामीणों में अब तक अपनी पकड़ नहीं बना पायी है .

मगर घनघोर जंगल में विकास से कोसों दूर लातेहार जिले के मनिका प्रखंड का अति सुदूर एवं अति नक्सल प्रभावित मुरहर ग्राम के ग्रामीण झारखंड के पूर्व डीजीपी राजीव कुमार की तारीफ करते थकते नहीं हैं. ग्रामीणों का पूर्व डीपीजी राजीव कुमार से जिस तरह का लगाव देखा गया, मानो वे ग्रामीणों के रिश्तेदार हों. ग्रामीण आज भी डीजीपी राजीव कुमार का इन्तेजार कर रहे हैं .

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ग्रामीण क्यों याद करते हैं पूर्व डीजीपी राजीव कुमार को

वर्ष 2013 के जनवरी माह में मुरहर ग्राम के नजदीक कटिया जंगल में सुरक्षा बलों एवं मओवादियो के बीच जबरदस्त मुठभेड़  हुई थी. इस मुठभेड़ में दस सुरक्षा कर्मी एवं चार ग्रामीण शहीद हुए थे.  शहीद जवानों के पेट फाड़ कर माओवादियों ने बम लगा दिये थे . जिसके बाद से मुरहर कटिया अम्वातिकर कुमंडी आदि इलाके में पांच महीने तक लगातार  सर्च अभियान चला.  कई मुठभेड़ भी हुई .

इलाका बम के धमाकों की आवाजों से गूंजता रहा.  नक्सल विरोधी अभियान में  9 जुलाई  2013  को झारखंड के तत्कालीन  डीजीपी राजीव कुमार सुरक्षा बलों के साथ शामिल हुएदो दिवसीय अभियान के  दौरान राजीव कुमार मुरहर ग्राम के नजदीक मुंडार पहाड़  पर रात्रि विश्राम कर सुबह मुरहर ग्राम पहुंचे और ग्रामीणों की समस्या से अवगत हुए .

ग्रामीणों की विकराल समस्या देख राजीव कुमार ने ग्राम का हर सम्भव विकास करने का वादा किया. तत्काल मदद में राजीव कुमार ने मुरहर के प्रत्येक ग्रामीण को पांच-पांच सो रुपयs,  कपडे, अनाज,  खेती की सामग्री, खेलकूद का सामान आदि दिये. राजीव कुमार के प्रयास से ग्रामीणों के जन वितरण प्रणाली के राशन कार्ड बने और ग्रामीण को अनाज मिलना शुरू हुआ.

राजीव कुमार प्रयास से मुरहर ग्राम गूगल के नक्शे में शामिल हुआ. राजीव कुमार के मुरहर पहुंचने के पूर्व कोई भी पुलिस पदाधिकारी एवं विकास पदाधिकारी मुरहर नहीं पहुंचा था.

लेकिन राजीव कुमार के लौटने एवं नक्सल विरोधी अभियान समाप्त होने के बाद जिले के विकास पदाधिकारी मुरहर के विकास को ठंडे बस्ते में बंद कर सो गये . नतीजतन ग्रामीणों की परेशानी जस की तस रह गयी.  बताया जाता है कि आजादी के   बाद पहली बार कोई सरकारी अधिकारी एवं सुरक्षा बल दस जुलाई 2013 को मुरहर ग्राम पहुंचे थे . इसके बाद कोई भी पुलिस अधिकारी एवं विकास पदाधिकारी या सुरक्षा बल मुरहर नहीं गया .

आज भी मुरहर के ग्रामीण और मवेशी एक चुआरी से बुझाते हैं प्यास

मुरहर ग्राम लातेहार जिले के मनिका प्रखंड अन्तर्गत बरकाडीह पंचायत के घनघोर जंगलों व पहाडों बीच बसा हुआ है.  ग्राम की सीमा लातेहार जिला के मनिका गारू एवं लातेहार प्रखंड से सटी हुई है.   आज़ादी के 72 वर्ष बीतने के बाद आज तक कोई विकास पदाधिकारी तो दूर ग्राम पंचायत का मुखिया तक मुरहर ग्राम नहीं गया है . साफ पानी के लिए एक भी चापानल नहीं है . मुरहर के निवासी और मवेशी एक ही चुआरी के पानी से अपनी प्यास बुझाते हैं .

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ग्रामीणों ने न्यूज विंग को सुनाई अपनी समस्या

ग्रामीण चंद्रमणि सिंह, सूबेदार उरांव, अनंत मणि भेंगरा, मनियल सिरका, लीबिया मुंडा, प्रभु सहाय, जोहन भेंगरा, बिरेंदर सिंह, महेश्वरी कुंवर, पुष्पा देवी,  जिरवा देवी, लूसिया भेंगरा, तारा तिर्की, मेरी सिरका, सुशीला सिरका, चंदरी देवी आदि ने बताया कि ग्राम में कुल 13 घर है. सभी को डीजीपी राजीव कुमार की कृपा से 2013 से राशन मिलना शुरू हुआ . मगर राशन लेने के लिए २० किमी दूर मनिका प्रखंड के देबार ग्राम के डीलर के पास पैदल जाना पड़ता है.

राशन के लिए सुबह पांच बजे निकलते हैं और राशन ले कर शाम आठ बजे लौटते हैं . अन्य कोई और योजना का लाभ नहीं मिलता है  ग्रामीण और माल मवेशी आज भी चुआरी का पानी पीते हैं. एक भी चापानल नहीं है . महिलाएं   किसी भी स्वयं सहायता समूह से नहीं जुडी हैं,  जिस कारण महिलाएं जागरूक नहीं हैं . मनरेगा का कार्ड सभी के पास है,  मगर कभी भी रोजगार नहीं मिला .

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सभी ग्रामीण मतदान करते हैं, मगर…

महुआ, बीडी पत्ता, खेती बारी पर ग्रामीण आश्रित हैं. कुछ ग्रामीण पलायन कर दूसरे राज्य भी जाते है कमाने . ग्राम में कोई भी ग्रामीण पढ़ा लिखा नहीं है. ग्राम में प्राथमिक स्कूल तक नहीं है . गम्भीर रूप बीमार होने पर ग्रामीण मृत्यु का इन्तेजार करते हैं. कई ग्रामीण बीमारी में अकाल मृत्यु का शिकार हुए हैं.   ग्राम में कोई भी स्वास्थय सुविधा नहीं है और न ही कभी मेडिकल कैम्प ही लगा है.

इलाज के लिए ग्रामीणों को दस किमी का पैदल सफर करना पड़ता है. किसी भी ग्रामीण के पास आयुष्मान भारत का कार्ड भी नहीं है . मुरहर के किसी ग्रामीण को वन पट्टा भी नहीं मिला है जिससे ग्रामीणों के खेतों का विस्तार हो सके . वही ग्रामीणों ने बताया कि सभी ग्रामीण मतदान करते हैं. मगर ग्राम में चुनाव प्रचार करने कोई नहीं आता है. और न ही कोई जन प्रतिनिधि जीतने के बाद आता है . यहाँ तक कि  ग्राम पंचायत का मुखिया भी नहीं आता . हम ग्रामीण अपने दुखो में खुश रहने का प्रयास करते रहते हैं .

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 पांच साल में  एक भी योजना नहीं पहुंची मुरहर

2014 में नरेंद्र मोदी के देश के प्रधान मंत्री बनने के बाद  कई  घोषणाएं की गयी. जिसके अंतर्गत प्रधानमंत्री सौभाग्य बिजली योजना प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, प्रधानमंत्री कृषि सम्मान निधि योजना, प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना, अटल पेंशन योजना,  प्रधानमंत्री जन धन योजना.  मगर मुरहर की जमीनी हकीकत की बात करें तो इन मे से एक भी योजना ग्राम में नहीं पहुंची है.  और न हीं इन योजना की ध्वनि तक पहुंची है .

चुआरी का पानी पीते हैं,  खेतों में शौच जाते हैं

ग्रामीण चुआरी का पानी पीने को विवश हैं.  खेतों में शौच जाते हैं.  ग्राम में बिजली नहीं है. ग्रामीण ढिबरी युग में जीने को विवश हैं. ग्राम में एक भी पक्का आवास नहीं है . ग्रामीणों के पास रोजगार नहीं है . बीमार होने पर मौत का इन्तेजार करते हैं.  इलाज के अभाव में अब तक कई जाने गयी हैं . ग्रामीणों के बच्चे घर में पैदा होते हैं,  जबकि सरकार दावा करती है संस्था गत प्रसव करने का .

मुरहर का विकास होगा, मगर थोडा वक्त चाहिए : डीसी

मुरहर ग्राम के मसले पर लातेहार डीसी  ने बताया कि लातेहार में बहुत से ऐसे गांव हैं,  जहा आज तक कोई नहीं पहुंचा है . कहा कि लातेहार सामान्य जिलो में से नहीं है . पहले उग्रवाद के कारण यहां  विकास रुका हुआ था. लोग गावों में नहीं जाते थे,  मगर अब हालात में तबदीली आयी  है .  कहा कि  मुरहर का विकास होगा,  मगर थोडा वक्त चाहिए .

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