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लातेहार: आपदा के शिकार चेरो आदिवासी परिवार को तीन माह बाद भी सरकार नहीं दे पायी आवास पंचायत भवन में रहने को विवश है परिवार

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Latehar: प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत राज्य में गरीबों को आवास उपलब्ध करना राज्य सरकार की प्राथमिकता सूची में है. इसके बाद भी प्राकृतिक आपदा के कारण तीन माह पूर्व बेघर हुए चेरो आदिवासी परिवार को सरकार ने अब तक आशियाना उपलब्ध नहीं कराया है. प्राकृतिक आपदा के शिकार परिवार को आर्थिक सहायता के नाम पर प्रशासन की ओर से 8000 रुपये दिये गये. आपदा के शिकार होने के बाद मानमति कुंवर का 15 सदस्यीय परिवार आज बदहाली और भुखमरी के कगार पर पहुंच गया है .घर टूट जाने के कारण परिवार ने अपना आशियाना पंचायत भवन को बना लिया था. अब पंचायत भवन छोड़ने का दबाव पंचायत प्रतिनिधि बना रहे हैं आखिर परिवार जाये तो जाये कहां.

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क्या है मामला

29 जुलाई 2018 लातेहार के बरवाडीह के कुटमू मोड़ के पास एक विशाल बरगद पेड़ मानमति कुंवर के घर पर गिर गया, जिससे घर टूट गया. साथ ही सदस्यों को गंभीर चोट लगी थी. जिसमें मानमति कुंवर की रीढ़ की हड्डी और छोटे बेटे अर्जुन सिंह चेरो के दोनों पैर टूट गये. अन्य सदस्यों को भी चोट लगी थी.

परिवार को योजना का लाभ मिलने का मामला हेमंत सोरन भी उठा चुके हैं

घर पर पेड़ गिर जाने के कारण पूरा घर टूट गया था. जिससे आदिवासी परिवार पंचायत भवन में शरण लेने को विवश हो गया.. इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं स्थानीय स्तर पर भाकपा( माले) द्वारा धरना प्रदर्शन किया गया एवं बीडीओ को ज्ञापन भी सौंपा गया था .बावजूद पीड़ित चेरो आदिवासी परिवार को आश्वासन के सिवा कुछ भी हासिल नहीं हुआ है.

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हादसे ने परिवार को कर दिया बदहाल

हादसे के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बदतर होती जा रही है. परिवार पर बीस हजार रूपये से अधिक का कर्ज हो चुका है. पेड़ गिर जाने की कारण मानमति कुंवर की रीढ़ की हड्डी टूट गयी थी. हालांकि मनमति अब चलने फिरने लगी है, लेकिन कमर में लगातार दर्द होता है, पैसे के अभाव में वह दवा नहीं खरीद पा रही है. छोटा बेटा अर्जुन सिंह चेरो भी पेड़ की चपेट में आ गया था. उसके दोनों पैर टूट गये थे. एक माह पहले ही रिम्स में इलाज के बाद घर वापस लौटा है. लेकिन चल नहीं पा रहा है. उसके एक पैर में ऑपरेशन एवं दूसरे पैर में प्लास्टर चढ़ा है. डॉक्टर ने एक महीने बाद अर्जुन को इलाज के लिए बुलाया है. लेकिन मानमति बतलाती हैं कि अर्जुन की दवा के लिए कुछ ही पैसे बचे हैं, ऐसे में बेटे को रांची कैसे ले जायेंगे.

क्या है परिवार की आर्थिक दशा

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परिवार में कमाने वाले दो लोग हैं, एक मानमति कुंवर का बड़ा बेटा श्रीराम सिंह चेरो, जिसके चार बच्चे हैं. वह बरवाडीह में पानी पहुंचाने का काम करता है, जिससे उसे 6000 रुपये मिल जाते हैं. दूसरा बेटा कार्तिक सिंह चेरो डाल्टनगंज में पिच रोड में मजदूरी कर रहा है. रोज काम नहीं मिलने के कारण वह माह में लगभग 5000 रूपये ही कमा पाता है. ऐसे में वह मां और भाई का इलाज कैसे कराये यह समझ में नही आ रहा है. मानमति कुंवर बताती है कि बहू को एक महीने के बच्चे के साथ वापस उसके मायके लेस्लीगंज से बेतला बुलाना पडा, क्योंकि सरकारी अधिकारी जब मिलने आते हैं तो परिवार से बहू को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करने के लिए कहते हैं. ऐसे में नवजात के साथ बहू को पंचायत भवन में ही लाकर रखने को विवश है परिवार. बड़ी बहू रीमा कहती हैं कि परिवार को पहले की तरह पेट भर भोजन नहीं मिल पाता है. जन वितरण प्रणाली के अनाज और पास पड़ोस के लोगों द्वारा दिये गये अनाज पर निर्भर हैं. राशन कार्ड में सिर्फ 7 सदस्यों का नाम है, उसमें भी डीलर 3 किलो अनाज काटकर 32 किलो ही देता हैं. वहीं परिवार के समक्ष तेल, मसाला, दाल का भी संकट रहता है कमाया हुआ पैसा इलाज में ही खर्च हो जा रहा है इसलिए साग सब्जी खरीद नहीं पाते हैं.

पंचायत भवन खाली करने का दबाब है परिवार पर

बदहाली और आर्थिक तंगी की स्थिति में बेघर चेरो परिवार पर पंचायत भवन खाली करने का दबाव भी बढ़ता जा रहा है. मानमति कुंवर बतलाती हैं कि पंचायत भवन में ही स्वयं सहायता समूह की बैठक होती है. समूह की महिलाएं उन पर लगातार दबाव बना रही हैं कि वे अपने लिए सरकार से घर मांगे , क्योंकि उनके रहने की वजह से उनको मीटिंग करने में परेशानी होती है.

जगह के अभाव के कारण परिवार अलग-अलग स्थानों पर रात गुजरता है

पंचायत भवन में ही प्रज्ञा केंद्र का संचालन किया जाता है. जिसमें पंचायत भवन में भीड़ होने की वजह से भी परिवार को एक साथ रहने में परेशानी होती है. पंचायत भवन में भी इतनी जगह नहीं है कि 15 सदस्यों का संयुक्त परिवार वहां रह सके. आधा परिवार रात को सोने के लिए जल छाजन भवन चला जाता है. एक बेटा और बहू पास के ही कुटमू बस्ती में चाचा ससुर के यहां रहते हैं.

घर बनाने की स्वीकृति मिल चुकी है फिर भी घर नहीं बना

मानमति कुंवर की बड़ी बहू रीमा देवी बतलाती हैं कि बेतला पंचायत के मुखिया से घर बनाने के लिए कहा, तो उनका कहना था कि ईंट अभी महंगी है इसलिए घर नहीं बन पा रहा है. एक दो दिन में पैसा आ जायेगा तो घर बन जायेगा.

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